50 लाख की रिश्वत! CBI ने सेना के कर्नल को किया गिरफ्तार

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एजेंसी

नई दिल्ली। भारतीय सेना से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के एक बड़े मामले में Central Bureau of Investigation ने सेना के एक कर्नल को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सेना के टेंडर और सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के बदले लगभग ₹50 लाख की रिश्वत मांगी थी।

जांच एजेंसी के अनुसार गिरफ्तार किए गए कर्नल हिमांशु बाली भारतीय सेना के आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स (AOC) में तैनात थे और उनकी पोस्टिंग Eastern Command के तहत फोर्ट विलियम, कोलकाता में थी। सीबीआई का आरोप है कि उन्होंने कानपुर की एक निजी रक्षा सप्लाई कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया।

सीबीआई की FIR के मुताबिक कर्नल बाली पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमे:
सेना के टेंडर में हेरफेर
निजी कंपनी को फायदा पहुंचाना
घटिया गुणवत्ता के सैंपल पास करना
फर्जी या बढ़े हुए बिलों को क्लियर करना
रिश्वत के बदले रक्षा आपूर्ति अनुबंध दिलाना शामिल हैं।
जांच एजेंसी का दावा है कि यह पूरा खेल लंबे समय से चल रहा था और इसमें कुछ अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मई 2026 में कर्नल बाली ने कथित तौर पर बकाया रिश्वत राशि की मांग की थी। FIR में कहा गया है कि ₹50 लाख की रकम दिल्ली-NCR क्षेत्र में पहुंचाने की योजना बनाई गई थी और हवाला चैनल का इस्तेमाल होने की आशंका है। सीबीआई के अनुसार 22 अप्रैल 2026 को कर्नल बाली और संबंधित कंपनी के प्रतिनिधि की कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में मुलाकात हुई थी। इसके दो दिन बाद संबंधित कंपनी को टेंडर मिलने का आरोप है।

सीबीआई ने इस मामले में कर्नल हिमांशु बाली समेत कई लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें कानपुर की रक्षा सप्लायर कंपनी से जुड़े कारोबारी और कुछ कथित बिचौलिए भी शामिल हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या सेना के अन्य अधिकारी भी इस नेटवर्क से जुड़े थे। यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे सेना की खरीद प्रक्रिया और रक्षा तैयारियों से जुड़ा है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो इससे सैन्य खरीद प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

सीबीआई ने कर्नल हिमांशु बाली को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। एजेंसी हवाला नेटवर्क, रिश्वत के पैसों के ट्रांजैक्शन और रक्षा टेंडरों की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। फिलहाल भारतीय सेना की ओर से इस मामले पर आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।