सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे जुगाड़ मालवाहक वाहन, प्रशासन की अनदेखी पर उठे सवाल

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देहरादून। राजधानी देहरादून की सड़कों पर इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर चल रहे जुगाड़ मालवाहक वाहन आम लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। बिना सुरक्षा मानकों का पालन किए ओवरलोडिंग और खतरनाक तरीके से लोहे एवं अन्य सामान ढो रहे ऐसे वाहन शहर के प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर बेखौफ दौड़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।

सामाजिक संगठन “जागरूक बनो आवाज उठाओ” के संयोजक यश वीर आर्य ने इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए प्रशासन और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि शहर में बड़ी संख्या में जुगाड़ वाहनों का संचालन हो रहा है, जिनमें क्षमता से कई गुना अधिक और असुरक्षित तरीके से सामान लादा जा रहा है। इससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि मात्र लगभग 2 मीटर लंबे वाहन पर करीब 6 मीटर लंबा लोहे का सामान बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के लादा गया था। इतना ही नहीं, लोहे के पीछे कोई चेतावनी संकेत, रेड फ्लैग या रिफ्लेक्टर तक नहीं लगाया गया था। ऐसे में यदि वाहन चालक अचानक ब्रेक लगा दे तो पीछे चल रहा वाहन सीधे लोहे से टकरा सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं यदि पीछे वाला वाहन अचानक रुके तो संतुलन बिगड़ने से दुर्घटना होना तय है।

यश वीर आर्य ने सवाल उठाया कि आखिर यह वाहन शहर के कई चौराहों और पुलिस जांच बिंदुओं से गुजरता रहा, लेकिन किसी भी अधिकारी या पुलिसकर्मी ने इसे रोकने की जरूरत क्यों नहीं समझी। उन्होंने कहा कि प्रशासन अक्सर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद कुछ दिनों के लिए अभियान चलाकर कार्रवाई करता है, लेकिन फिर स्थिति जस की तस हो जाती है।

उन्होंने मांग की कि ऐसे अवैध और खतरनाक जुगाड़ वाहनों के खिलाफ तत्काल विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही ओवरलोडिंग, बिना फिटनेस और बिना सुरक्षा मानकों वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में किसी निर्दोष की जान न जाए। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सड़क सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए और शहर में चल रहे अवैध मालवाहक वाहनों की नियमित जांच हो। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।