एक टैक्सी, 42 चालान और ₹4.15 लाख का जुर्माना!

Astitva Times Desk
5 Min Read

देहरादून-हरिद्वार हाईवे के लच्छीवाला टोल प्लाजा पर ई-डिटेक्शन सिस्टम का बड़ा असर, फिटनेस समाप्त होने पर बार-बार कटते रहे चालान

देहरादून। तकनीक जहां यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित कर रही है, वहीं लापरवाही लोगों पर भारी भी पड़ रही है। इसका ताजा उदाहरण देहरादून-हरिद्वार हाईवे स्थित लच्छीवाला टोल प्लाजा पर सामने आया है, जहां एक टैक्सी पर ई-डिटेक्शन सिस्टम के जरिए 42 बार चालान काटे गए। इन चालानों की कुल राशि ₹4 लाख 15 हजार तक पहुंच गई, जो वाहन की कीमत से भी अधिक बताई जा रही है।


भानियावाला निवासी विजय कुमार अपनी टैक्सी को ऑनलाइन बुकिंग ऐप के माध्यम से देहरादून, ऋषिकेश और भानियावाला रूट पर संचालित करते हैं। बुकिंग संबंधी कार्यों के लिए उन्होंने अपनी सिम ड्राइवर को दे रखी थी। इसी दौरान फरवरी माह में लच्छीवाला टोल प्लाजा पर ‘ई-चालान डिटेक्शन सिस्टम’ लागू किया गया। बताया जा रहा है कि टैक्सी की फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी थी, लेकिन वाहन लगातार सड़क पर संचालित होता रहा। जैसे ही टैक्सी टोल प्लाजा से गुजरती, सिस्टम वाहन के दस्तावेजों की जांच कर स्वतः चालान जारी कर देता। यह प्रक्रिया कई बार दोहराई गई और देखते ही देखते चालानों की संख्या 42 तक पहुंच गई।


मैसेज आते रहे, ड्राइवर समझता रहा साधारण नोटिफिकेशन
परिवहन विभाग की ओर से प्रत्येक चालान की सूचना पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजी जाती रही, लेकिन ड्राइवर ने इन संदेशों को सामान्य रिमाइंडर या गैर-जरूरी मैसेज समझकर नजरअंदाज कर दिया। जब टैक्सी मालिक विजय कुमार को चालानों की वास्तविक स्थिति का पता चला तो वे हैरान रह गए।
मालिक का कहना है कि उनकी टैक्सी की कुल कीमत भी करीब ₹4 लाख से कम है, ऐसे में ₹4.15 लाख का जुर्माना भरना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने परिवहन विभाग और आरटीओ से राहत देने तथा चालान माफ करने की गुहार लगाई है।

लच्छीवाला टोल प्लाजा पर फरवरी से लागू ई-डिटेक्शन सिस्टम के तहत वाहन के बीमा, फिटनेस, रजिस्ट्रेशन और प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) की वैधता की डिजिटल जांच की जाती है। किसी भी दस्तावेज के अमान्य पाए जाने पर सिस्टम स्वतः चालान जारी कर देता है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस व्यवस्था के लागू होने के बाद अब तक 15 हजार से अधिक चालान जारी किए जा चुके हैं। हालांकि इनमें से केवल 578 चालानों का ही भुगतान किया गया है।

मोबाइल पर आने वाले परिवहन विभाग के संदेशों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों का कहना है कि ई-चालान प्रणाली पूरी तरह डिजिटल है। इसलिए वाहन मालिकों और चालकों को अपने मोबाइल पर आने वाले परिवहन विभाग के संदेशों को गंभीरता से लेना चाहिए। कई बार लोग इन्हें फर्जी या प्रचार संबंधी संदेश समझकर अनदेखा कर देते हैं, जिसका परिणाम भारी आर्थिक नुकसान के रूप में सामने आ सकता है।
ऐसे करें अपने वाहन का चालान चेक
यदि आप जानना चाहते हैं कि आपकी गाड़ी पर कोई चालान लंबित है या नहीं, तो एम-परिवहन (mParivahan) ऐप या परिवहन विभाग के आधिकारिक पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं। वाहन संख्या या चेसिस नंबर दर्ज करते ही सभी लंबित चालानों की जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देने लगती है।

आरसी में सही मोबाइल नंबर होना बेहद जरूरी
ई-डिटेक्शन और ई-चालान प्रणाली के दौर में वाहन के दस्तावेजों के साथ सही और चालू मोबाइल नंबर का पंजीकृत होना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि वाहन रिकॉर्ड में पुराना या बंद मोबाइल नंबर दर्ज है, तो चालान और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएं समय पर नहीं मिल पाएंगी। परिवहन विभाग की वेबसाइट के माध्यम से वाहन मालिक घर बैठे अपना मोबाइल नंबर अपडेट कर सकते हैं।
लच्छीवाला टोल प्लाजा की यह घटना वाहन चालकों और मालिकों के लिए एक बड़ा सबक है। वाहन के दस्तावेज समय पर नवीनीकृत कराना, मोबाइल पर आने वाले सरकारी संदेशों की जांच करना और ई-चालान की नियमित निगरानी करना अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। थोड़ी सी लापरवाही लाखों रुपये के जुर्माने में बदल सकती है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!