सत्यापन के दौरान खुला राज, विश्वविद्यालय की शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई; फर्जी मोहर, हस्ताक्षर और डिग्री प्रारूप का किया जा रहा था इस्तेमाल
देहरादून। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय (HNBGU) के नाम पर फर्जी मार्कशीट, डिग्रियां और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज तैयार कर उनका इस्तेमाल करने वाले एक संगठित नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश के बिजनौर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। उसके कब्जे से विश्वविद्यालय के नाम पर तैयार की गई कई फर्जी अंकतालिकाएं, कूटरचित डिग्रियां और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

इस पूरे मामले का खुलासा मार्च 2026 में उस समय हुआ, जब विभिन्न सरकारी और गैर- सरकारी संस्थानों में कार्यरत अभ्यर्थियों की डिग्रियों और अंकतालिकाओं का सत्यापन हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से कराया जा रहा था। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने जब दस्तावेजों का मूल रिकॉर्ड से मिलान कराया तो कई मार्कशीट और डिग्रियां रिकॉर्ड से मेल नहीं खाईं। जांच आगे बढ़ने पर ऐसे कई दस्तावेज सामने आए, जिनका विश्वविद्यालय के आधिकारिक अभिलेखों में कोई रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की।
विश्वविद्यालय की जांच में सामने आया कि विश्वविद्यालय के नाम, आधिकारिक मोहर, डिग्री के प्रारूप और संबंधित अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर बेहद पेशेवर तरीके से नकली शैक्षणिक दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। इनका उपयोग कथित तौर पर सरकारी नौकरियों, निजी संस्थानों में नियुक्ति और अन्य आधिकारिक कार्यों में किया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुलपति को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। इसके बाद श्रीनगर कोतवाली में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।
विश्वविद्यालय की शिकायत के आधार पर श्रीनगर कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 336(3), 336(4), 338 और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पौड़ी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार ने विशेष जांच टीम गठित कर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए। जांच टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय पुलिस की मदद से उत्तर प्रदेश के बिजनौर में छापेमारी कर नामजद आरोपी कासिफ कलीम को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार आरोपी के कब्जे से गढ़वाल विश्वविद्यालय के नाम पर तैयार की गई कई फर्जी अंकतालिकाएं, डिग्रियां और अन्य कूटरचित दस्तावेज बरामद किए गए हैं। आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पहले डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून में बीएससी का छात्र था। परीक्षा में असफल होने के बाद उसने खुद को योग्य साबित करने और नौकरी हासिल करने के उद्देश्य से फर्जी मार्कशीट और शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करने शुरू कर दिए। धीरे-धीरे यह गतिविधि एक संगठित फर्जीवाड़े का रूप लेती चली गई।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, अब तक कितने लोगों को नकली डिग्रियां और मार्कशीट उपलब्ध कराई गईं तथा किन-किन सरकारी और निजी संस्थानों में इनका इस्तेमाल हुआ। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। शिक्षा जगत से जुड़े इस बड़े फर्जी डिग्री रैकेट ने विश्वविद्यालयों की प्रमाणपत्र सत्यापन व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए जांच हर पहलू से की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।










