मजदूरों एवं बस्तीवासियो के अधिकार, महिलाओं को निशुल्क बस यात्रा की मांग को लेकर सभा आयोजित 

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बस्तीवासियों के अधिकार, 500 नई बसें, महिलाओं के लिए निशुल्क बस यात्रा और रोजगार गारंटी की मांग; एक माह तक शहरभर में अभियान चलाने का ऐलान

देहरादून। राजधानी देहरादून के जौहडी रोड क्षेत्र में आयोजित जनसभा में मजदूरों और बस्तीवासियों से जुड़े अधिकारों तथा शहर की प्रस्तावित विकास योजनाओं को लेकर विभिन्न मांगें उठाई गईं। सभा में दिहाड़ी मजदूरों के अधिकार, बस्तीवासियों के लिए 2016 के अधिनियम के तहत हक, सार्वजनिक परिवहन के विस्तार, महिलाओं के लिए निशुल्क बस यात्रा और रोजगार गारंटी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान एलिवेटेड रोड को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताएं भी सामने रखी गईं।

जनसभा में “नहीं चाहिए एलिवेटेड रोड की मार, हमें चाहिए घर, बस और रोजगार” अभियान के तहत लोगों ने अपनी मांगों के समर्थन में हस्ताक्षर किए। आयोजकों ने बताया कि अभियान का उद्देश्य मजदूरों और बस्तीवासियों से जुड़े सवालों को व्यापक स्तर पर उठाना तथा इन मुद्दों पर जनसमर्थन जुटाना है।सभा में वक्ताओं ने एलिवेटेड रोड की प्रस्तावित योजना को लेकर स्थानीय आबादी पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि शहर के विकास की योजनाओं के साथ स्थानीय लोगों के आवास, आजीविका और बस्तियों से जुड़े हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि जनता की बुनियादी समस्याओं का समाधान किए बिना केवल बड़े निर्माण कार्यों को विकास का आधार नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से विकास योजनाओं पर स्थानीय लोगों के साथ संवाद करने और उनकी चिंताओं को गंभीरता से लेने की मांग की।

2016 के अधिनियम के क्रियान्वयन का मुद्दा
जनसभा में बस्तीवासियों के अधिकारों से जुड़े 2016 के अधिनियम को लेकर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि लंबे समय के बावजूद अधिनियम के प्रावधानों का अपेक्षित लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने सरकार से अधिनियम के तहत बस्तीवासियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि बस्तियों में रहने वाले लोगों की आवास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है।

500 नई बसें और महिलाओं के लिए निशुल्क यात्रा की मांग
शहर की परिवहन व्यवस्था को लेकर सभा में 500 नई बसें खरीदने की मांग रखी गई। साथ ही महिलाओं के लिए बसों में निशुल्क यात्रा की व्यवस्था किए जाने की मांग भी उठी। आयोजकों का कहना था कि बेहतर सार्वजनिक परिवहन से आम लोगों, मजदूरों और महिलाओं को आवागमन में सुविधा मिल सकती है। सभा में वक्ताओं ने सार्वजनिक परिवहन को शहर की बुनियादी जरूरत बताते हुए इसे मजबूत करने की मांग की। सभी मजदूरों के पंजीकरण और रोजगार गारंटी पर जोर दिहाड़ी मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए वक्ताओं ने मांग की कि मजदूर योजनाओं के तहत सभी पात्र मजदूरों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें। इसके साथ ही मजदूरों के लिए रोजगार गारंटी की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि असंगठित और दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका को सुरक्षित करने के लिए रोजगार के अवसर और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।

जनसभा में घोषणा की गई कि “नहीं चाहिए एलिवेटेड रोड की मार, हमें चाहिए घर, बस और रोजगार” अभियान को अगले एक महीने तक देहरादून शहर के विभिन्न क्षेत्रों में चलाया जाएगा। अभियान के दौरान मजदूरों और स्थानीय बस्तीवासियों से जुड़े मुद्दों को सामने लाने तथा उनकी मांगों के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चलाने की बात कही गई। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के साथ चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, सुनीता देवी, राकेश, रामदास, इंद्रदेव और शिवचरण सहित अन्य लोग मौजूद रहे। सभा के अंत में आयोजकों ने मजदूरों, बस्तीवासियों और स्थानीय नागरिकों से अपने अधिकारों और जनसमस्याओं को लेकर अभियान में भागीदारी करने का आह्वान किया।