NEET-UG दाखिले में फर्जी फ्रीडम फाइटर प्रमाण-पत्र मामले में SIT जांच तेज, चार अभ्यर्थियों के पते सत्यापन में फर्जी

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धर्मवीर के नाम से जारी प्रमाण-पत्र के आधार पर MBBS में प्रवेश लेने का आरोप; परिजनों और जांचकर्ता पटवारी के बयान दर्ज, विश्वविद्यालयों से मांगे जा रहे दस्तावेज

देहरादून। NEET-UG के माध्यम से MBBS पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए कथित तौर पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी (Freedom Fighter) श्रेणी के प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल कर आरक्षण अथवा कोटा का लाभ लेने के मामले में देहरादून पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने जांच तेज कर दी है। पुलिस के अनुसार, विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों में संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते के सत्यापन में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। पुलिस का दावा है कि चार अभियुक्तों के दस्तावेजों में दर्ज पते सत्यापन के दौरान फर्जी पाए गए हैं। मामले में थाना क्लेमेंटाउन और थाना रायपुर में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं में अभियोग दर्ज किए गए हैं। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने 18 सितंबर 2026 को अभियोगों की विवेचना के लिए पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश के नेतृत्व में SIT का गठन किया था।

पुलिस के मुताबिक SIT की अब तक की विवेचना में यह तथ्य सामने आया है कि संबंधित अभ्यर्थियों ने धर्मवीर के नाम से जारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्रेणी के प्रमाण-पत्र का कथित रूप से इस्तेमाल कर MBBS पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त किया। हालांकि, प्रमाण-पत्र की वास्तविकता, उसे जारी किए जाने की प्रक्रिया और उससे जुड़े दस्तावेजों की वैधता की अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। SIT इन सभी बिंदुओं पर दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य जुटा रही है। प्रमाण-पत्र में दर्ज विवरण की पुष्टि के लिए SIT ने संबंधित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी धर्मवीर के परिजनों से संपर्क किया। पुलिस के अनुसार, जांच टीम ने धर्मवीर के पुत्र और पौत्र के बयान दर्ज किए हैं। इन बयानों के माध्यम से पुलिस प्रमाण-पत्र में दर्ज पारिवारिक विवरण, संबंधित दावों और दस्तावेजों की वास्तविकता का मिलान कर रही है। पुलिस जांच में इन बयानों को महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि इनके आधार पर अंतिम निष्कर्ष विवेचना पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

राजस्व रिकॉर्ड की पड़ताल, जांचकर्ता पटवारी से भी पूछताछ
प्रमाण-पत्र से जुड़े राजस्व अभिलेखों और उसके जारी होने की प्रक्रिया की जानकारी जुटाने के लिए SIT ने संबंधित जांचकर्ता पटवारी के बयान भी दर्ज किए हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रमाण-पत्र जारी करने के दौरान कौन-कौन से राजस्व अभिलेखों का परीक्षण किया गया था, संबंधित सत्यापन किस स्तर पर हुआ और प्रमाण-पत्र में दर्ज तथ्यों के समर्थन में कौन से दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे। चारों अभियुक्तों के पते फर्जी पाए जाने का पुलिस का दावा
मामले की विवेचना के दौरान SIT ने संबंधित अभियुक्तों के दस्तावेजों में दर्ज पतों का सत्यापन कराया। पुलिस के अनुसार, चारों अभियुक्तों के पते सत्यापन में फर्जी पाए गए। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन पतों का इस्तेमाल किन दस्तावेजों में किया गया था और प्रवेश प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत रिकॉर्ड में इन पतों का क्या महत्व था। साथ ही, कथित तौर पर गलत पते उपलब्ध कराने के पीछे की परिस्थितियों और उससे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

प्रकरण में इस्तेमाल किए गए प्रमाण-पत्रों तथा अन्य दस्तावेजों की वास्तविकता और वैधता की पुष्टि के लिए SIT ने संबंधित विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों से पत्राचार किया है। पुलिस द्वारा प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड, प्रस्तुत किए गए प्रमाण-पत्र और संबंधित श्रेणी के तहत मिले लाभ से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही है। संबंधित संस्थानों से प्राप्त दस्तावेजों और सूचनाओं को विवेचना में शामिल कर उनका परीक्षण किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है कि अभ्यर्थियों ने प्रवेश के समय कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए थे और उन दस्तावेजों का सत्यापन किस प्रक्रिया के तहत हुआ। SIT की जांच फिलहाल कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। एक ओर जहां संबंधित परिवार के सदस्यों और राजस्व अधिकारी से जुड़े व्यक्ति के बयान दर्ज किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रमाण-पत्र, राजस्व अभिलेख, प्रवेश संबंधी दस्तावेज और पते के सत्यापन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि विवेचना में सामने आने वाले प्रत्येक तथ्य और दस्तावेज का विधि के अनुरूप परीक्षण किया जाएगा। किसी दस्तावेज की वास्तविकता अथवा कथित फर्जीवाड़े के संबंध में अंतिम निष्कर्ष साक्ष्यों के समग्र परीक्षण के बाद ही निकाला जाएगा।

पुलिस के अनुसार, प्रकरण से संबंधित सभी तथ्यों, दस्तावेजों और साक्ष्यों का विधि के अनुसार संकलन एवं परीक्षण किया जा रहा है। विवेचना के दौरान जो तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच निष्पक्ष और साक्ष्यपरक तरीके से की जा रही है। पुलिस के अनुसार, यदि विवेचना में यह प्रमाणित होता है कि किसी व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शैक्षणिक प्रवेश या आरक्षण का अनुचित लाभ प्राप्त किया, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे प्रकरण में SIT द्वारा की जा रही जांच अभी जारी है। धर्मवीर के परिजनों के बयान, पटवारी से प्राप्त जानकारी, राजस्व रिकॉर्ड, अभ्यर्थियों के पतों का सत्यापन तथा विश्वविद्यालयों से मिलने वाले दस्तावेजों का समग्र परीक्षण किया जाना बाकी है। ऐसे में फिलहाल सामने आए तथ्यों को पुलिस की विवेचना में सामने आए आरोप और प्रारंभिक साक्ष्यों के रूप में देखा जा रहा है। मामले में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।