UPL फाइनल में मासूम शर्मा की प्रस्तुति पर कांग्रेस का सवाल—‘विवाद के बावजूद मंच क्यों?

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देहरादून। उत्तराखंड प्रीमियर लीग (यूपीएल) के फाइनल में हरियाणवी गायक मासूम शर्मा को प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किए जाने को लेकर कांग्रेस ने सरकार और आयोजन समिति से जवाब मांगा है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश उपाध्यक्ष लालचंद शर्मा ने सवाल उठाया है कि देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज में मंच से कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर विवादों में रहे कलाकार को इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन के फाइनल में प्रस्तुति के लिए क्यों चुना गया। दून के डीएवी पीजी कॉलेज में अप्रैल 2026 में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मासूम शर्मा के मंच से आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का मामला सामने आया था। इस प्रकरण में पुलिस ने जांच शुरू की थी और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की भी रिपोर्ट सामने आई थी। बाद में गायक की ओर से इस घटना को लेकर माफी मांगे जाने की खबरें भी प्रकाशित हुईं।

लालचंद शर्मा ने कहा कि आयोजन समिति को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि क्या मासूम शर्मा से जुड़े विवाद की जानकारी होने के बावजूद उन्हें यूपीएल फाइनल में प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि कलाकार के चयन से पहले आयोजन समिति ने पूरे मामले की समीक्षा की या नहीं और क्या सरकार अथवा आयोजन से जुड़े जिम्मेदार संस्थानों ने कलाकारों के चयन के लिए कोई आचार या चयन संबंधी दिशा-निर्देश तय किए हैं। उन्होंने कहा कि यूपीएल जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजन में मंच पर प्रस्तुति देने वाले कलाकारों के चयन को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। ऐसे आयोजनों में कलाकारों के चयन की प्रक्रिया और उससे जुड़े निर्णयों की जानकारी सार्वजनिक किए जाने से अनावश्यक विवादों से बचा जा सकता है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि एक ओर बड़े आयोजन के फाइनल में बाहरी कलाकार को प्रस्तुति का अवसर दिया जा रहा है, वहीं उत्तराखंड की संस्कृति, लोक संगीत और पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने वाले स्थानीय कलाकारों के भुगतान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से लोक -फ्यूजन बैंड पांडवाज के लंबित भुगतान का मुद्दा उठाया। हालिया रिपोर्टों के अनुसार पांडवाज ने 38वें राष्ट्रीय खेलों से जुड़े दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 के अपने कार्यों का भुगतान सितंबर 2026 तक लंबित होने का दावा किया है और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। शर्मा ने कहा कि यदि राष्ट्रीय खेलों जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में उत्तराखंड की संस्कृति और संगीत को प्रस्तुत करने वाले कलाकारों का भुगतान लंबे समय तक लंबित रहता है, तो सरकार को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि भुगतान किस स्तर पर अटका है, इसके लिए कौन-सा विभाग या संस्था जिम्मेदार है और कलाकारों को उनका पारिश्रमिक कब तक मिलेगा।

लालचंद शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड के कलाकार राज्य की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में स्थानीय कलाकारों के भुगतान में देरी और दूसरी ओर बड़े आयोजनों में कलाकारों के चयन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब सरकार को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति और कलाकारों के सम्मान की बात केवल सरकारी कार्यक्रमों, मंचों और भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कलाकारों को उनके काम का पारिश्रमिक समय पर मिलना और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना भी उतना ही जरूरी है।

लालचंद शर्मा ने सरकार और यूपीएल आयोजन समिति से मांग की कि मासूम शर्मा को फाइनल में आमंत्रित किए जाने के निर्णय का आधार, चयन प्रक्रिया और कलाकार की प्रस्तुति पर होने वाले खर्च का विवरण सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने साथ ही मांग की कि राष्ट्रीय खेलों में प्रस्तुति देने वाले पांडवाज सहित अन्य कलाकारों के यदि भुगतान लंबित हैं तो उनकी स्थिति स्पष्ट की जाए और लंबित पारिश्रमिक का तत्काल निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि उत्तराखंड के कलाकारों को प्राथमिकता देने, उनके लंबित भुगतान निपटाने और बड़े सार्वजनिक आयोजनों में कलाकारों के चयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उसकी नीति क्या है।