दुष्यंत गौतम की जगह राम माधव, बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन को सह प्रभारी की जिम्मेदारी; चुनाव से पहले संगठन में बदलाव ने बढ़ाई सियासी हलचल
देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठन के स्तर पर बड़ा बदलाव किया है। भाजपा ने प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम की जगह वरिष्ठ नेता राम माधव को उत्तराखंड की जिम्मेदारी सौंपी है। उनके साथ बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन को प्रदेश का सह प्रभारी बनाया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की ओर से की गई नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। यह बदलाव केवल चेहरों की अदला-बदली भर नहीं माना जा रहा। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा पहले ही संगठनात्मक स्तर पर कई कदम उठा चुकी है। ऐसे में प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी राम माधव को सौंपे जाने से पार्टी के चुनावी प्रबंधन और संगठन संचालन को लेकर नई दिशा के संकेत मिले हैं।
राम माधव भाजपा के उन नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्हें पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी हैं। वह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं और जम्मू-कश्मीर जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में संगठनात्मक और चुनावी जिम्मेदारियों से जुड़े रहे हैं। सितंबर 2020 में उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पद से हटाया गया था और बाद में उन्होंने पार्टी की विभिन्न गतिविधियों में भूमिका निभाई। अब उन्हें उत्तराखंड की जिम्मेदारी ऐसे समय दी गई है जब पार्टी राज्य में 2027 की चुनावी तैयारी को लगातार संगठन के निचले स्तर तक ले जाने में जुटी है। जुलाई में भाजपा ने 15 प्रमुख संगठनात्मक विभागों में संयोजक और सह संयोजक नियुक्त किए थे, जबकि अगस्त में 19 संगठनात्मक जिलों के प्रभारी और सह प्रभारी भी घोषित किए गए। यानी प्रदेश प्रभारी के बदलाव को पार्टी के व्यापक संगठनात्मक पुनर्संयोजन की कड़ी के रूप में देखा जा सकता है।
राम माधव के साथ बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन को सह प्रभारी बनाए जाने से उत्तराखंड में केंद्रीय नेतृत्व की टीम को भी नया स्वरूप मिला है। भाजपा की नई सूची में उत्तराखंड के लिए यही संयोजन घोषित किया गया है। बांसुरी स्वराज वर्तमान में दिल्ली से भाजपा सांसद हैं और पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर उभरते चेहरों में शामिल हैं। वहीं अरविंद मेनन लंबे समय से भाजपा के संगठनात्मक कामकाज से जुड़े रहे हैं। ऐसे में नई टीम में एक ओर राजनीतिक-सार्वजनिक चेहरा है तो दूसरी ओर संगठनात्मक अनुभव वाला चेहरा।
दुष्यंत गौतम की जगह राम माधव को जिम्मेदारी दिए जाने के बाद उत्तराखंड भाजपा के भीतर और बाहर इस बदलाव को लेकर चर्चा स्वाभाविक है। हालांकि पार्टी ने नियुक्ति के पीछे कोई विशिष्ट कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताया है, लेकिन समय महत्वपूर्ण है—राज्य में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है और भाजपा ने पहले से ही चुनावी संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। इसलिए इस फेरबदल को चुनावी तैयारी के अगले चरण के लिए केंद्रीय नेतृत्व की नई टीम तैयार करने के रूप में देखा जा रहा है। इसे किसी एक नेता के प्रदर्शन पर अंतिम टिप्पणी के रूप में देखना उचित नहीं होगा। इतना जरूर है कि नई नियुक्तियों के साथ भाजपा ने उत्तराखंड में संगठनात्मक कमान का चेहरा बदल दिया है और अब नई टीम के सामने आने वाले महीनों में पार्टी की चुनावी तैयारियों को जमीन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी।
2027 के लिए तैयार हो रहा संगठन
भाजपा के हालिया कदमों को एक साथ देखें तो साफ है कि पार्टी ने चुनाव से काफी पहले संगठनात्मक ढांचे को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। जुलाई में 15 विभागों के संयोजक-सह संयोजक नियुक्त किए गए। अगस्त में 19 संगठनात्मक जिलों में प्रभारी और सह प्रभारी घोषित किए गए। इसके बाद अगस्त-सितंबर के लिए विस्तृत संगठनात्मक कैलेंडर के जरिए बूथ और घर-घर संपर्क तक गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी की गई। यानी अब प्रदेश प्रभारी की नई टीम को एक ऐसे संगठन की कमान मिल रही है जिसकी चुनावी मशीनरी पहले से अलग-अलग स्तरों पर सक्रिय की जा चुकी है।असली चुनौती—संगठन से चुनावी नैरेटिव तक
राम माधव के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती केवल संगठन की बैठकें और नियुक्तियां नहीं होंगी। चुनावी राजनीति में संगठन को जमीनी मुद्दों और मतदाताओं से जोड़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। उत्तराखंड में पहाड़ बनाम मैदान, रोजगार, पलायन, पर्यटन, चारधाम और धार्मिक पर्यटन, सड़क एवं कनेक्टिविटी, स्थानीय विकास, युवा मतदाता तथा महिला मतदाताओं से जुड़े मुद्दे चुनावी विमर्श का हिस्सा रहे हैं। भाजपा ने भी 2027 की तैयारी में युवा मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने और संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने पर जोर दिया है। नई टीम के सामने अब यही सवाल रहेगा कि इन मुद्दों को किस तरह संगठनात्मक अभियान, सरकार की उपलब्धियों और चुनावी संदेश के साथ जोड़ा जाता है।उत्तराखंड में भाजपा की चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू सरकार और संगठन के बीच समन्वय होगा। प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार और भाजपा संगठन के बीच चुनावी तैयारियों को एक साझा राजनीतिक अभियान में बदलना नई टीम की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हो सकता है। पहले ही भाजपा ने संगठनात्मक विभागों में चुनाव प्रबंधन, राजनीतिक संवाद, मीडिया संपर्क, नीति अनुसंधान, सुशासन और चुनाव आयोग से जुड़े अलग-अलग दायित्व तय किए हैं। इस लिहाज से राम माधव की नियुक्ति का प्रभाव केवल प्रदेश भाजपा कार्यालय तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में सरकार-संगठन समन्वय, क्षेत्रवार राजनीतिक फीडबैक और चुनावी मुद्दों की प्राथमिकता तय करने में भी नई टीम की भूमिका पर नजर रहेगी।
भाजपा के संगठनात्मक पुनर्गठन का असर विपक्ष की रणनीति पर भी पड़ना स्वाभाविक है। हालांकि विपक्षी दलों की आगामी रणनीति और सीटवार समीकरणों को लेकर तस्वीर समय के साथ स्पष्ट होगी, लेकिन भाजपा ने अपने स्तर पर चुनावी संगठन को पहले ही सक्रिय करना शुरू कर दिया है। ऐसे में 2027 का मुकाबला केवल चुनावी नारों का नहीं, बल्कि बूथ प्रबंधन, स्थानीय नेतृत्व, मतदाता संपर्क, उम्मीदवार चयन और मुद्दों के प्रभावी संचार का भी होगा।
राम माधव के सामने उत्तराखंड की राजनीतिक परिस्थितियों को समझने और संगठन की मौजूदा मशीनरी को अपनी कार्यशैली के साथ जोड़ने की चुनौती होगी। बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन के साथ नई टीम किस तरह राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय होती है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण संकेत देगा। भाजपा के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी ने 2027 के चुनाव को लेकर संगठनात्मक तैयारियों की शुरुआत काफी पहले कर दी है। अब नए प्रदेश प्रभारी के सामने सवाल सिर्फ संगठन चलाने का नहीं, बल्कि पहाड़ से मैदान तक संगठन की सक्रियता को चुनावी अभियान में बदलने का होगा।
अब उत्तराखंड की सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या भाजपा की यह नई केंद्रीय टीम संगठन को चुनावी मोड में और तेज गति दे पाएगी? इसका जवाब आने वाले महीनों में होने वाली संगठनात्मक गतिविधियों, क्षेत्रीय बैठकों और जमीनी अभियानों से सामने आएगा।










