MBBS सीट फर्जीवाड़ा, फर्जी प्रमाण पत्र का खेल उजागर; दो गिरफ्तार, SDM तहसीलदार भी रडार पर

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​देहरादून। देश भर के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) की सीट पक्की कराने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी और सरकारी आरक्षित कोटे में सेंधमारी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के दो मुख्य मास्टरमाइंड—अनुकूल पंवार और संजय तोमर को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में सामने आए तथ्यों ने न केवल प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि फर्जी प्रमाण पत्रों के दम पर सरकारी व्यवस्था में सेंध लगाने की गहरी साजिश को भी उजागर किया है।

पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह नीट (NEET) परीक्षा में कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों को मेडिकल कॉलेजों में शत-प्रतिशत दाखिला दिलाने का झांसा देता था। प्रति सीट 45 से 50 लाख रुपये का सौदा तय किया जाता था और प्रक्रिया शुरू करने के नाम पर 20-20 लाख रुपये एडवांस ऐंठ लिए जाते थे। एडवांस रकम हासिल करने के बाद आरोपी जाली अलॉटमेंट लेटर थमाकर गायब हो जाते थे।

​स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे में बड़ा फर्जीवाड़ा
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित (FFD) कोटे के दुरुपयोग को लेकर हुआ है। आरोपी मोटी रकम लेकर ऐसे अभ्यर्थियों के फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार करवाते थे, जिनका इस कोटे से कोई संबंध ही नहीं था। इस फर्जीवाड़े के जरिए कम मेरिट वाले छात्रों को आरक्षित सीटों पर दाखिला दिलाने का खेल खेला जा रहा था, जिससे वास्तविक हकदार अभ्यर्थी प्रवेश से वंचित रह जाते थे।


​प्रशासनिक महकमे में हड़कंप, अधिकारियों पर जांच की गाज
बिना ठोस भौतिक सत्यापन और आख्या के फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने के मामले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पुलिस व एसटीएफ की तफ्तीश में सामने आया है कि प्रशासनिक शह के बिना यह खेल संभव नहीं था। मामले में संबंधित तहसील के तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और एसडीएम (SDM) स्तर के अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है। एजेंसियों ने तहसील कार्यालयों से संबंधित सभी फाइलों का रिकॉर्ड तलब कर लिया है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के जाली लेटरहेड, फर्जी मोहरें, अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज और करोड़ों रुपये के बैंक ट्रांजेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड बरामद किए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में शामिल अन्य बिचौलियों व संदिग्ध प्रशासनिक कर्मचारियों की धरपकड़ के लिए दबिश जारी है।