NCC teacher एवं अधिकारी पर छात्रा ने लगाया छेड़छाड़ का आरोप, POCSO act में मुकदमा दर्ज 

Astitva Times Desk
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एक सप्ताह में सामने आए तीसरे मामले ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर खड़े किये गंभीर सवाल

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड पूरे देश में स्वच्छ वातारण एवं अच्छी शिक्षा के लिए प्रसिद्ध है। परंतु पिछले कुछ समय से स्कूलों में बच्चों के उत्पीड़न की सामने आई घटनाओं ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने पूरे शिक्षा तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। पिछले एक सप्ताह के भीतर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से स्कूलों में छात्र-छात्राओं के साथ कथित उत्पीड़न के तीन मामले सामने आ चुके हैं।

पहले नैनीताल जिले में एक नाबालिग छात्रा के उत्पीड़न का मामला सामने आया, इसके बाद देहरादून के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में 15 वर्षीय छात्र के साथ कथित उत्पीड़न की घटना ने सभी को झकझोर दिया। अब उत्तरकाशी जिले के मनेरी क्षेत्र में एक छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आने से अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जिन विद्यालयों को बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है, वहां ही छात्र -छात्राओं की सुरक्षा क्यों सवालों के घेरे में आ रही है।
उत्तरकाशी के मनेरी थाना क्षेत्र स्थित एक विद्यालय में एनसीसी की नियमित कक्षा के दौरान छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है। छात्रा के पिता की शिकायत पर पुलिस ने विद्यालय के एक शिक्षक और एनसीसी अधिकारी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) अधिनियम सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, घटना बुधवार की है। आरोप है कि विद्यालय के एक शिक्षक ने छात्रा से कहा कि एनसीसी अधिकारी उसे बुला रहे हैं और उसे एनसीसी कक्ष में लेकर गया। शिकायत के अनुसार, कमरे में पहुंचने के बाद शिक्षक और एनसीसी अधिकारी ने छात्रा के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ की। छात्रा ने साहस दिखाते हुए स्वयं को बचाया और वहां से निकलकर अपनी कक्षा में पहुंच गई। घटना के बाद छात्रा मानसिक रूप से बेहद आहत हो गई। घर पहुंचकर उसने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई, जिसके बाद उसके पिता ने मनेरी थाने में दोनों आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल पॉक्सो एक्ट सहित अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने बताया कि छात्रा के बयान दर्ज किए जा रहे हैं तथा विद्यालय और घटनास्थल से जुड़े सभी संभावित साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।आवश्यकता पड़ने पर विद्यालय के कर्मचारियों और अन्य छात्रों के बयान भी लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लगातार तीन घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
उत्तराखंड में महज एक सप्ताह के भीतर तीन अलग-अलग विद्यालयों से सामने आए मामलों ने शिक्षा व्यवस्था और बाल सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले नैनीताल जिले में नाबालिग छात्रा के उत्पीड़न का मामला सामने आया। इसके बाद देहरादून के एक प्रतिष्ठित स्कूल में 15 वर्षीय छात्र के साथ कथित उत्पीड़न की घटना ने प्रदेशभर में चिंता पैदा की। अब उत्तरकाशी की घटना ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है।

“जागरूक बनो आवाज़ उठाओ” अभियान के संयोजक यशवीर आर्य का कहना है कि यदि स्कूल परिसर में ही बच्चे स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे तो शिक्षा का उद्देश्य और अभिभावकों का विश्वास दोनों प्रभावित होंगे। ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति यह संकेत देती है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की भी आवश्यकता है।

आर्य ने लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद विद्यालयों में चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी का सख्ती से पालन, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने, शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने, शिक्षकों एवं कर्मचारियों का नियमित सत्यापन तथा छात्र-छात्राओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की है।

क्षेत्र में घटना को लेकर आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई ही समाज में विश्वास कायम कर सकती है।
फिलहाल उत्तरकाशी पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल यही है—जब स्कूल ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो अभिभावक अपने बच्चों को निश्चिंत होकर शिक्षा के लिए कहां भेजेंगे? बच्चों की सुरक्षा केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है।

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