गो तस्करी के शक में मॉब लिंचिंग करने वाले 14 दोषियों को उम्रकैद, फैसले के बाद कोर्ट परिसर में भारी हंगामा
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले की सिवनी मालवा एडीजे कोर्ट ने बहुचर्चित मॉब लिंचिंग मामले में बड़ा और सख्त फैसला सुनाते हुए 14 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी व्यक्ति या समूह को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।
यह मामला 3 अगस्त 2022 का है, जब ग्राम बराखड़ के पास गोवंश लेकर जा रहे एक ट्रक को कुछ लोगों ने रोक लिया था। आरोपियों को संदेह था कि ट्रक में अवैध रूप से गोवंश की तस्करी की जा रही है। इसी शक के आधार पर आरोपियों ने ट्रक में सवार तीन लोगों के साथ बेरहमी से मारपीट की थी। इस हिंसक हमले में गंभीर रूप से घायल हुए महाराष्ट्र के अमरावती निवासी नजीर अहमद की उपचार के दौरान मौत हो गई थी, जबकि अन्य दो लोग भी घायल हुए थे।
करीब तीन वर्ष से अधिक समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद शुक्रवार को न्यायाधीश तबस्सुम खान की अदालत ने मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने दीपक उर्फ बाबा केवट, अज्जू उर्फ अजय राठौर, प्रकाश कौशल, पवन बाथव, अमर उर्फ भोला बाथव, कन्हैया बाथव, अनुज उर्फ बल्लू रघुवंशी, संजू उर्फ राजेन्द्र कौशल, आकाश उर्फ पिंटोली बाथव, गौरव यादव, आकाश सराठे, चेतन मराठा, देवेन्द्र उर्फ छोटू कोरी और संदीप उर्फ राजा कौशल सहित सभी 14 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
अदालत का फैसला आते ही न्यायालय परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। सजा से आक्रोशित और भावुक परिजनों ने पुलिस वाहनों के सामने लेटकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस और परिजनों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। पुलिसकर्मियों को दोषियों को सुरक्षित जेल रवाना करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।दोषियों के परिजनों का कहना था कि उनके बच्चे गौसेवा की भावना से मौके पर पहुंचे थे और उनका किसी की हत्या करने का इरादा नहीं था। हालांकि अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सभी आरोपियों को गंभीर अपराध का दोषी पाया और कठोर सजा सुनाई। फैसले के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यायालय परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का संदेह या सामाजिक मुद्दा कानून को हाथ में लेने का औचित्य नहीं बन सकता और दोषियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही सजा दी जाएगी।











