देहरादून। आगामी विधानसभा चुनाव में देहरादून की धर्मपुर विधानसभा सीट प्रदेश की सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो सकती है। भाजपा और कांग्रेस अपनी-अपनी चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटी हैं, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव के बाद भी क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे बीर सिंह पंवार चुनावी समीकरणों को नया मोड़ देते हुए नज़र आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पंवार के चुनाव मैदान में उतरते ही धर्मपुर में मुकाबला सीधा नहीं, बल्कि त्रिकोणीय होना तय है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर बीर सिंह पंवार ने निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए 5309 वोट हासिल किए थे। सीमित संसाधनों और संगठन के अभाव के बावजूद मिला यह जनसमर्थन उनके व्यक्तिगत जनाधार का संकेत माना गया था। चुनाव के बाद भी उन्होंने अपनी राजनीतिक सक्रियता बरकरार रखी। क्षेत्र के सामाजिक, धार्मिक और जनसरोकार से जुड़े कार्यक्रमों में लगातार मौजूदगी के कारण उनकी पहचान और प्रभाव दोनों बढ़े हैं।
पंवार की राजनीतिक सक्रियता का असर पिछले वर्ष हुए नगर निगम चुनाव में भी देखने को मिला। उन्होंने धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के नौ वार्डों में अपने समर्थित प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। इनमें दो प्रत्याशी विजयी रहे, जबकि तीन दूसरे स्थान पर रहे। शेष चार प्रत्याशी भी उल्लेखनीय संख्या में वोट हासिल करने में सफल रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निगम चुनाव के इन परिणामों ने यह संकेत दिया कि पंवार का प्रभाव केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने समर्थकों के पक्ष में भी प्रभावी जनसमर्थन जुटाने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि उन्हें अब विधानसभा चुनाव में एक प्रभावशाली फैक्टर के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच धर्मपुर का राजनीतिक परिदृश्य भी बदला है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार रहे दिनेश अग्रवाल अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं। भाजपा में टिकट के कई दावेदार सक्रिय हैं, जबकि कांग्रेस भी नए और मजबूत चेहरे की तलाश में है। ऐसे में बीर सिंह पंवार की मौजूदगी चुनावी मुकाबले को नया आयाम दे सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धर्मपुर में बीर सिंह पंवार अब केवल एक प्रत्याशी नहीं, बल्कि चुनावी समीकरण तय करने वाले महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभर रहे हैं। यदि वे निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरते हैं तो दोनों प्रमुख दलों की रणनीति पर सीधा असर पड़ सकता है। उनका प्रभाव विशेष रूप से गढ़वाली मतदाताओं के साथ ही उन मतदाताओं पर भी माना जा रहा है, जो स्थानीय नेतृत्व और व्यक्तिगत संपर्क को प्राथमिकता देते हैं।
धर्मपुर विधानसभा में इस बार मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीमित रहने की संभावना कम दिखाई दे रही है। बीर सिंह पंवार की सक्रियता, लगातार बढ़ता जनसंपर्क और नगर निगम चुनाव में समर्थित प्रत्याशियों के प्रदर्शन ने इस सीट के राजनीतिक समीकरणों को पहले ही बदलना शुरू कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चुनावी बिगुल बजने से पहले बीर सिंह पंवार अपना अगला राजनीतिक कदम क्या उठाते हैं, क्योंकि वही धर्मपुर की चुनावी तस्वीर बदलने वाला सबसे अहम फैसला साबित हो सकता है।















