देहरादून। राजधानी देहरादून के बैरागीवाला में हुई हत्या के बाद भड़की हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ तथा आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाए जाने की घटना के विरोध में गुरुवार को विभिन्न जन संगठनों और विपक्षी दलों ने देहरादून के गांधी पार्क गेट पर धरना-प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने हत्या के आरोपियों को कड़ी सजा देने के साथ-साथ हिंसा, आगजनी और कथित गैर-कानूनी बुलडोजर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों और अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बैरागीवाला में विनोद कश्यप की हत्या एक गंभीर अपराध है और इसके दोषियों को कानून के अनुसार कठोर दंड मिलना चाहिए।लेकिन हत्या के बाद क्षेत्र में हुई पत्थरबाजी, आगजनी, निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और वाहनों में तोड़फोड़ जैसी घटनाएं भी उतनी ही गंभीर हैं। उनका आरोप था कि इन घटनाओं में शामिल लोगों और संगठनों के खिलाफ अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। वक्ताओं ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाया जाना कानून के शासन और न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कुछ संगठनों को अप्रत्यक्ष संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण वे पुलिस पर हमले, सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने तथा आम नागरिकों को निशाना बनाने जैसी घटनाओं में शामिल होने के बावजूद कार्रवाई से बच जाते हैं।धरने में शामिल फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्यों ने बैरागीवाला दौरे के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि क्षेत्र में कई परिवारों की निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है। कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई, दुकानों और मकानों को क्षति पहुंचाई गई तथा कुछ स्थानों पर आगजनी की घटनाएं भी हुईं। उनका कहना था कि प्रभावित परिवारों में अभी भी भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुरोला, उत्तरकाशी, नैनीताल और देहरादून सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में धर्म के नाम पर हिंसा और सामाजिक तनाव पैदा करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन और पुलिस ऐसे मामलों में निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहे हैं, जिससे असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ रहा है।
धरने के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें विनोद कश्यप के हत्यारों को सख्त सजा देना, आगजनी, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी, बुलडोजर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों या संगठनों पर कानूनी कार्रवाई, क्षेत्र में शांति और सौहार्द बहाल करने के लिए प्रभावी कदम उठाना तथा धर्म के नाम पर हिंसा फैलाने वाले संगठनों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कठोर कार्रवाई करना शामिल है।धरने में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय शर्मा, सुजाता पॉल, याकूब सिद्दीकी सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय परिषद सदस्य समर भंडारी, माकपा के प्रदेश सचिव राजेंद्र पुरोहित और जिला महामंत्री शिव प्रसाद देवली, भाकपा (माले) के प्रदेश सचिव इंद्रेश मैखुरी ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
इसके अलावा उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत और विमला कोहली, सर्वोदय मंडल के हरबीर सिंह कुशवाहा, उत्तराखंड इंसानियत मंच के त्रिलोचन भट्ट और हरी ओम पाली, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, सुनीता देवी, पप्पू, संजय और शैलेश, तंजीम -ए-रहनुमा-ए-मिल्लत के लताफत हुसैन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के भोपाल, मजदूर संघर्ष संगठन के कुलदीप, सामर्थ तथा अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने भी धरने में भागीदारी की। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सत्यनारायण सचान ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया। महिला कांग्रेस की शिवानी थपलियाल, सीटू के जिला महामंत्री लेखराज, पीपुल्स साइंस मूवमेंट के विजय भट्ट और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राज्य सचिव हिमांशु चौहान उपस्थित रहे।










