मोदी सरकार ने AI और डीपफेक पर किए सख्त नियम लागू, AI जनरेटेड कंटेंट पर लेबल अनिवार्य

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नई दिल्ली। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल और डीपफेक जैसी तकनीकों के दुरुपयोग को देखते हुए केंद्र सरकार ने नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं। इन नियमों का उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शिता बढ़ाना, फर्जी और आपत्तिजनक कंटेंट पर रोक लगाना तथा आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

AI जनरेटेड कंटेंट पर लेबल अनिवार्य
नए निर्देशों के अनुसार अब AI की मदद से तैयार किए गए फोटो, वीडियो और ऑडियो पर स्पष्ट रूप से ‘AI Generated’ या ‘AI से निर्मित’ का लेबल लगाना अनिवार्य होगा।
सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों को असली और नकली सामग्री में अंतर समझने में मदद मिलेगी और डीपफेक के जरिए फैलाए जाने वाले भ्रम, अफवाह और फर्जी प्रचार पर रोक लगेगी।

3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट
सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को भी सख्त निर्देश दिए हैं कि—
किसी भी आपत्तिजनक, भ्रामक या कानून-विरुद्ध कंटेंट की शिकायत मिलने पर
अधिकतम 3 घंटे के भीतर उसे हटाना अनिवार्य होगा
यदि प्लेटफॉर्म इस समयसीमा का पालन नहीं करते हैं, तो उन पर जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

किन मामलों में होगी सख्त कानूनी कार्रवाई?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि AI तकनीक का दुरुपयोग निम्नलिखित मामलों में पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी—
बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री (Child Sexual Abuse Material) तैयार या प्रसारित करना
धोखाधड़ी, ठगी या वित्तीय घोटालों के लिए AI का उपयोग
हथियारों या गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी फैलाना
किसी व्यक्ति की आवाज़ या चेहरा नकल कर उसकी फर्जी पहचान बनाना (डीपफेक)
ऐसे मामलों में आईटी कानून और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।

सरकार का उद्देश्य
सूत्रों के अनुसार, सरकार का कहना है कि AI एक शक्तिशाली और उपयोगी तकनीक है, लेकिन इसके दुरुपयोग से समाज, लोकतंत्र और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। नए नियमों का मकसद तकनीक पर रोक लगाना नहीं, बल्कि जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करना है।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि इन नियमों को प्रभावी बनाने के लिए सख्त निगरानी तंत्र और तकनीकी ढांचे की आवश्यकता होगी।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार के इस फैसले को डिजिटल सुरक्षा और जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन नियमों का प्रभाव सोशल मीडिया और AI आधारित प्लेटफॉर्म्स पर साफ दिखाई दे सकता है।