कुम्भ को 12 वर्ष की जगह 11वें वर्ष में आयोजित करने की साजिश का हो खुलासा: आचार्य

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देहरादून। मंगलवार को होटल निर्वाणा पैलेस में हुई पत्रकार वार्ता में भारत साधू समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत ऋषिश्वरानन्द ने कहा कि कुम्भ में सनातन धर्म की परम्पराओं पर भाजपा सरकार कुठाराघात कर रही है। कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि हरिद्वार कुम्भ हर 12 वर्ष में आयोजित होता है,चूँकि पिछला कुम्भ 2010 में हुआ था इसलिए अगला कुम्भ 2022 में होना चाहिए था उसे एक वर्ष पूर्व 2021 में आयोजित करने की साजिश खुलासा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले कुम्भ 1986, 1998, 2010 में तो अगला कुम्भ 2022 में होना चाहिए। वह 2021 में क्यों किया गया?


उन्होंने कहा कि जब बंगाल चुनाव में रोड शो और रैलियों में कोरोना की किसी गाइड का पालन नहीं हो रहा तो कुम्भ के लिए ही कोरोना की 36 पेज की एसओपी आखिर क्यों ? क्या इस एसओपी माध्यम से कुम्भ की तैयारियों में हुई लापरवाही और कुम्भ बजट में हुई धांधली को छिपाने का प्रयास है। यहाँ के जल, जंगल, जमीन, पर्यटन जड़ी बूटी, ऑक्सीजन बैंक आदि का नियोजन क्यों नहीं ?

युवा भारत साधु समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत शिवानंद ने सवाल खडे करते हुए कहा कि जब कैम्प ही नहीं तो मेला कहाँ ?
देश विदेश के शिष्य अपने गुरुओं से कहाँ और कैसे मिलेंगे ?
धर्म और ज्ञान के जिज्ञासु सनातन आचार्यों से सम्पर्क कैसे कर पाएंगे ?

परमार्थ निकेतन के पर्यावरण प्रभारी विनीत जी ने कहा कि हरिद्वार कुम्भ के पर्व स्नान जो कि शाही स्नान होते थे,यथा मकर संक्रांति,वसंत पंचमी,महाशिवरात्रि आदि की उपेक्षा क्यों ? चार महीने का कुम्भ एक महीने में क्यों समेटा जा रहा है ?

स्वर्गाश्रम जोंक नगर पंचायत के अध्यक्ष माधव अग्रवाल ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध राम झूला और लक्ष्मण झूला क्षेत्र के लिए आजादी के बाद पहली बार कुम्भ में कोई बजट क्यों नहीं दिया गया। प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री शूरवीर सजवाण, योगाचार्य अभय दास राजस्थान, मनोज महंत, नीरज त्यागी, पुरुषोत्तम शर्मा, अरविन्द जैन, ललित मोहन मिश्रा, पुष्कर सारस्वत, आदेश तोमर एवं समाज सेवी विजय शर्मा आदि उपस्थित थे।

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