यूपी के 17 जिलों में भाजपा ने किया क्लीन स्वीप, विपक्ष को नहीं मिली एक भी सीट

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 17 जिलों में सभी विधानसभा सीटें जीत कर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया है

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 17 जिलों में सभी विधानसभा सीटें जीत कर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य में ऐसे पहले मुख्यमंत्री बने है जिन्होने पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के साथ दोबारा जीत भी दर्ज की है।

भाजपा ने वाराणसी, सोनभद्र, बुलंदशहर, गोंडा, पीलीभीत, शाहजहांपुर, खीरी-हरदोई, उन्नाव, फर्रुखाबाद, गोरखपुर, कन्नौज, कानपुर देहात, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, देवरिया में सारी की सारी सीटें जीतीं हैं ।

पार्टी सूत्रों ने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच साल के कार्यकाल के दौरान अपने कुशल नेतृत्व और कल्याणकारी योजनाओं के दम पर पूरे यूपी में बहुत बड़ी लाइन खींच दी, जिसे विरोधी पार नहीं कर पाए। योगी यूपी के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल भी पूरा किया और दोबारा जीत भी दर्ज की। चुनाव में भाजपा को इस बार सभी वर्ग का वोट मिला। योगी ने उत्तर प्रदेश को जाति के वोट बैंक को राष्ट्रवादी वोट बैंक में बदल दिया। यूपी में योगी की जीत की कई वजह रही, जिसमें प्रमुख रूप से मोदी का मार्गदर्शन, योगी का शासन, यूपी में गरीबों को राशन, महिलाओं को सुरक्षा का आश्वासन और हिन्दुत्व फैक्टर है।

विधानसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी में जाट वोटर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बंट गये। दलित वोट पहली बार बीएसपी से बीजेपी में शिफ्ट होता दिखा। इस साथ के साथ बीजेपी ने गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्धनगर, आगरा, कासगंज और एटा में क्लीन स्वीप किया, जबकि अलीगढ़, मथुरा, सहारनपुर, बुलंदशहर में बीजेपी की परफोरमेंस काफी बढ़िया रही। यूपी के हर फेज में चुनाव में बीजेपी विरोधियों को नुकसान हुआ।

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इस बार के चुनाव में योगी के खिलाफ अखिलेश यादव और जयंत चौधरी, मायावती और प्रियंका गांधी मैदान में थीं। पश्चिम यूपी में जहां दावा जा रहा था कि एसपी और आरएलडी का गठबंधन आगे रहेगा लेकिन यहां बीजेपी लीड ले गई। जाट लैंड में राष्ट्रीय लोक दल के बड़ी मार्जिन से जीतने का दावा किया गया, पर जाटों ने बीजेपी को सपोर्ट किया। बुंदेलखंड ने भी बीजेपी को सियासी बुलंदी पर पहुंचा दिया।

बुलंदशहर में सात सीटों पर कमल खिला। आगरा की नौ सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज कर इतिहास रचने का काम किया। सोनभद्र की तीन और वाराणसी की सात सीटें भाजपा के नाम रही। गोरखपुर की आठ सीटों पर कमल खिला, देवरिया भी पीछे नहीं रहा यहां सात विधानसभाओ में कमल का फूल खिल गया। गोंडा की भी सात सीटें भाजपा के नाम दर्ज हुईं। पीलीभीत की चार, शाहजहांपुर की सात, खीरी की आठ, हरदोई की आठ, उन्नाव की छह, फर्रुखाबाद की चार सीटों पर मोदी-योगी का जादू चला। कन्नौज की तीन, कानपुर देहात की चार, झांसी की चार, ललितपुर दो, हमीरपुर की दो, महोबा की दो सीटें भी भाजपा की झोली में पहली बार चली गईं, जबकि सहारनपुर में सात में से पांच सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की। बागपत में तीन में से दो सीटें भाजपा ने अपने नाम की। बरेली में नौ में से आठ सीटें भाजपा के खाते में आईं। सीतापुर की नौ में से आठ सीटें, लखनऊ की नौ में से सात, बांदा में चार में से तीन सीटों पर कमल खिला।

कानपुर देहात की चारों विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की। लखीमपुर खीरी में भाजपा ने सभी आठ सीटों पर जीत दर्ज की जबकि जौनपुर की सदर सीट से बीजेपी कैंडिडेट और योगी कैबिनेट के मंत्री गिरीश चंद्र यादव चुनाव जीत गए हैं। उन्होंने 6000 से अधिक वोटों से सपा के मोहम्मतद अरशद को हराया। सोनभद्र जिले की चारों विधानसभा सीटों पर कमल खिला। हरदोई की आठों विधानसभा सीट पर भाजपा का कब्जा हो गया है। गोरखपुर में बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया। सीएम योगी के शहर गोरखपुर की सभी नौ सीटों पर भाजपा ने कब्जा कर लिया है। बुंदेलखंड में बीजेपी ने विपक्ष का पूरी तरह सफाया कर दिया। बीजेपी ने बुंदेलखंड की सभी 19 सीटों पर जीत दर्ज की। हरदोई सदर सीट पर इतिहास में पहली बार भाजपा के नितिन अग्रवाल ने 43 हज़ार वोटों से जीत दर्ज की। बीजेपी ने शाहजहांपुर की छह विधानसभाओं में जीत का परचम लहराया। प्रयागराज की 12 में से 8 सीटों पर भाजपा तो चार पर सपा जीती। बागपत की दो सीटों पर भाजपा को जीत मिली।

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