पद्मश्री डा0 अनिल जोशी सहित अन्य को 2011 के पट्टे रद्द करने की मांग

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आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश नेगी का खुलासा: पर्यावरण संरक्षण की आड़ में साल के जंगल पर किया गया है कब्जा

देहरादून। उत्तराखंड में वन भूमि पर अतिक्रमण का नया मामला सामने आया है। आरटीआई एक्टिविस्ट और अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने ‘साल जंगल’ की 94.9060 हेक्टेयर (लगभग 1138.872 वीघा) जमीन पर गैरकानूनी कब्जे का खुलासा किया है। उन्होंने मुख्य सचिव, राजस्व सचिव और डीएम देहरादून को शिकायत भेजी है, जिसमें एसडीएम विकासनगर द्वारा 2011 में दिए गए पट्टों को रद्द करने की मांग की गई है।
इस मामले का केंद्र है पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित डा0 अनिल प्रकाश जोशी का नाम। आरोप है कि इस्ट होप टाउन स्थित ‘साल जंगल’ (खाता संख्या 02493, खसरा संख्या 384/1, क्षेत्रफल 0.1170 हेक्टेयर) पर HESCO एनजीओ का भवन बनाया गया, जो सरकारी रिकॉर्ड में वन भूमि दर्ज है। नेगी ने इसे संवैधानिक, वैधानिक और न्यायिक प्रावधानों का उल्लंघन बताया है।

कानूनी आधार: पट्टे ‘शून्य से शून्य’ क्यों? नेगी के प्रतिवेदन में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया गया है। 8 अगस्त 1946 के बाद वन भूमि पर पट्टा देना अवैध है और ‘Void ab initio’ माना जाता है। उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 132 तथा वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा 2 का उल्लेख है, जो ऐसी भूमि का गैर-वन उपयोग प्रतिबंधित करती हैं।
टी.एन. गोदावर्मन बनाम भारत संघ मामले और 15 मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट आदेश का जिक्र करते हुए कहा गया कि राजस्व रिकॉर्ड में ‘जंगल/वन’ दर्ज भूमि स्वतः वन मानी जाएगी। 1952-54 की उत्तर प्रदेश गजट अधिसूचनाओं के बावजूद यह आवंटन हुआ, जो प्रशासनिक मिलीभगत दर्शाता है।

नेगी ने मांग की है कि 2011 के पट्टे तत्काल रद्द हों।
HESCO भवन ध्वस्त कर भूमि को मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय, दंडात्मक और आपराधिक कार्रवाई हो। यदि कार्रवाई न हुई तो मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाएगा। नेगी ने कहा कि दून घाटी में वन अतिक्रमण से आबोहवा बिगड़ रही है, प्रदूषण बढ़ रहा है। पर्यावरण संरक्षण के नाम पर जंगल काटना विरोधाभासी है।