नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से कम से कम एक साल तक सोना नही खरीदने की अपील की है। तेलंगाना में पार्टी द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के औद्योगिक जगत को एक स्पष्ट संदेश दिया है। पीएम मोदी ने भारत की असली ताकत ‘विदेशी मुद्रा’ (Forex) को बचाने और उसे रणनीतिक रूप से उपयोग करने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर चिंता जताई कि भारत की मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा सोने (Gold), कच्चे तेल (Crude Oil) और तांबे (Copper) जैसे संसाधनों के आयात में विदेशों में चला जाता है। उन्होंने इसे रोकने के लिए एक ‘बिजनेस मॉडल’ और ‘आर्थिक देशभक्ति’ का आह्वान किया है।

प्रधानमंत्री ने आर्थिक नजरिए से एक साहसिक अपील करते हुए कहा कि भारतीयों का सोने के प्रति मोह देश की बैलेंस शीट पर भारी पड़ता है। भारत दुनिया के शीर्ष स्वर्ण आयातकों में से एक है, जिसका भुगतान कीमती डॉलर में करना पड़ता है। पीएम ने सुझाव दिया कि अगर देशवासी कम से कम एक साल के लिए सोने की भारी खरीदारी को टाल दें, तो इससे बचने वाली विदेशी मुद्रा का उपयोग देश के बुनियादी ढांचे और तकनीक को विकसित करने में किया जा सकता है। यह कदम सीधे तौर पर रुपये की मजबूती और चालू खाता घाटे (CAD) को कम करने में मदद करेगा।

भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। पीएम मोदी ने कहा कि हम जो सोना खरीदते हैं, उसका भुगतान डॉलर में करना पड़ता है, जिससे हमारे विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी बोझ पड़ता है। उन्होंने जनता से एक भावुक और रणनीतिक अपील करते हुए कहा, “क्या हम कम से कम एक साल के लिए सोने की खरीद को टाल नहीं सकते? अगर हम शादियों और त्योहारों पर सोने की खरीदारी में थोड़ी कमी लाएं, तो हम अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकते हैं।” पीएम का तर्क है कि बचाई गई यह विदेशी मुद्रा देश के बुनियादी ढांचे, रक्षा और तकनीक के विकास में काम आ सकती है, जो अंततः देश को अधिक समृद्ध बनाएगी।
पीएम ने ‘कॉपर’ (तांबा) को ‘भविष्य का सोना’ बताया। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए कॉपर अनिवार्य है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। पीएम ने उद्योगपतियों को संकेत दिया कि कॉपर रिसाइक्लिंग और स्वदेशी खनन में बड़े निवेश की जरूरत है। उन्होंने इसे सेमीकंडक्टर मिशन की तरह ही महत्वपूर्ण बताया, ताकि आयात पर निर्भरता खत्म हो और ‘मेक इन इंडिया’ को नई ऊंचाई मिले।
ऊर्जा सुरक्षा पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के लिए हम खाड़ी देशों पर निर्भर हैं। विदेशी मुद्रा का सबसे बड़ा हिस्सा इसी मद में जाता है। उन्होंने एथेनॉल ब्लेंडिंग और ग्रीन हाइड्रोजन को बिजनेस के नए अवसर के रूप में पेश किया। पीएम ने स्पष्ट किया कि कृषि अपशिष्ट से ईंधन बनाकर हम न केवल किसानों की आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा भी बचा रहे हैं।
प्रधानमंत्री का मानना है कि जो पैसा हम सोना या तेल के आयात में ‘खर्च’ करते हैं, उसे बचाकर आधुनिक तकनीक और उद्योग में ‘निवेश’ करना होगा। उन्होंने बिजनेस कम्युनिटी से आग्रह किया कि वे ऐसी तकनीक विकसित करें जो आयात का विकल्प (Import Substitution) बने। यह केवल एक भाषण नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक नीतियों और बजट की दिशा का एक बड़ा संकेत है।









