फर्जीवाड़े के नेटवर्क पर SIT का शिकंजा, कार से 5.58 लाख रुपये बरामद, तीन छात्रों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से दाखिला दिलाने का आरोप
देहरादून। नीट यूजी-2025 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के कथित मामले में एसआईटी ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। भोपाल निवासी धीरज कुमार श्रीवास्तव (37) को पुलिस ने उसके वाहन समेत गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान कार से 5.58 लाख रुपये नकद बरामद हुए। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि यह रकम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के एवज में कमीशन के रूप में मिली थी। इस गिरफ्तारी के साथ ही मामले में अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस अब फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने से लेकर मेडिकल कॉलेजों में दाखिले तक के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
13 सितंबर को थाना रायपुर और क्लेमेंटाउन में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने के मामले में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। रायपुर थाने में मु0अ0सं0 380/26 के तहत धारा 318(4), 338, 336(2), 340(2) बीएनएस में मुकदमा दर्ज हुआ, जबकि क्लेमेंटाउन थाने में मु0अ0सं0 86/26 के तहत धारा 318(4), 338, 340(2), 61(2) बीएनएस में मामला दर्ज किया गया। रायपुर के मामले की विवेचना के दौरान धारा 3(5) बीएनएस भी जोड़ी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) गठित की। जांच के दौरान अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते संदिग्ध पाए गए। एसआईटी ने संबंधित शिक्षण संस्थानों से दस्तावेज कब्जे में लेकर अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी जुटाई।
पुलिस के अनुसार, एसआईटी ने 21 सितंबर को रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया था। रूपेश की निशानदेही पर मेरठ स्थित उसके घर से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने के एवज में लिए गए आठ लाख रुपये भी बरामद किए गए थे। जांच आगे बढ़ी तो इस कथित नेटवर्क में भोपाल निवासी धीरज कुमार श्रीवास्तव की भूमिका सामने आई। पुलिस के मुताबिक, धीरज भोपाल के पिपलानी क्षेत्र में ‘एमबीबीएस वे’ नाम से कार्यालय संचालित करता था और विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम समेत कई पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिला दिलाने का काम करता था। एसआईटी के मुताबिक, धीरज की मुलाकात करीब दो साल पहले उत्तरकाशी के एक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में रूपेश पंडित से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच लगातार संपर्क बना रहा।
पुलिस के अनुसार, अरविंद ने अपनी बेटी और दो परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया। आरोप है कि रूपेश ने धीरज से संपर्क किया, जिसके बाद कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों को उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के माध्यम से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने की योजना सामने आई। एसआईटी की जांच में आरोप है कि धीरज ने रूपेश और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर तीन अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए और फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाए। इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिला लिया।
धीरज की गिरफ्तारी और नकदी बरामदगी के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ गया है। एसआईटी इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका, फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वाले तंत्र और मेडिकल दाखिले तक पहुंचने वाली पूरी कड़ी की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।










