धरमपुर में कांग्रेस गुटबाजी की शिकार, वालिया के होली मिलन में स्थानीय दावेदार और पार्षद नही आए नज़र 

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देहरादून। राजधानी के महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों में शुमार धरमपुर विधानसभा क्षेत्र में चल रही कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी अब सार्वजनिक रूप लेती दिखाई दे रही है। हाल ही में कांग्रेस नेता और टिकट के दावेदार वैभव वालिया द्वारा आयोजित होली मिलन कार्यक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है। कार्यक्रम में जहां पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की उपस्थिति रही, वहीं अन्य वरिष्ठ नेताओं और कई स्थानीय दावेदारों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक संकेत दे दिए हैं कि क्षेत्रीय संगठन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह होली मिलन कार्यक्रम केवल सामाजिक मेल-मिलाप का आयोजन नहीं था, बल्कि इसे आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया गया था। वैभव वालिया पिछले कई महीने से क्षेत्र में सक्रिय हैं और वे खुलकर टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में कार्यक्रम के जरिए संभवत उन्होंने अपने समर्थन आधार को प्रदर्शित करने की कोशिश की।हालांकि कार्यक्रम में पार्टी के कई स्थानीय चेहरे नदारद रहे। इसे सीधा संदेश माना जा रहा है कि टिकट को लेकर अंदरखाने असहमति गहराई हुई है।

स्थानीय दावेदारों में बढ़ी सक्रियता
धरमपुर सीट पर कांग्रेस से टिकट पाने की दौड़ में कई नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। इनमें पूर्व प्रधान/पार्षद हरिप्रसाद भट्ट, प्रदेश सचिव रमेश कुमार मंगू, सुरेन्द्र रांगड़, पूरन सिंह रावत, संदीप चमोली और याक़ूब सिद्दीकी शामिल हैं। इनमें से कुछ भी इस होली मिलन के कार्यक्रम में शामिल नही हुआ। इन सभी नेताओं की अपने -अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ मानी जाती है और उनके समर्थक भी सक्रिय रूप से इन्हीं में से किसी एक को टिकट की पैरवी कर रहे हैं।
स्थानीय पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जो कार्यकर्ता विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पिछले चार वर्षों से पार्टी का झंडा उठाकर मैदान में सक्रिय हैं, टिकट का हकदार वही होना चाहिए। उनका तर्क है कि चुनाव के समय बाहरी या अचानक सक्रिय हुए नेताओं को तरजीह देने से जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है।

पार्षदों की गैरमौजूदगी ने बढ़ाए सवाल
होली मिलन कार्यक्रम से कांग्रेस के पार्षदों की दूरी ने राजनीतिक हलकों में अटकलों को और हवा दी है। पार्षद श्रीमती प्रिया वर्मा, आयुष गुप्ता ‘बंटी’, श्रीमती कुसुम वर्मा कार्यक्रम में नजर नहीं आए। इसके अलावा माजरा वार्ड से पार्षद जाहिद अंसारी, मुस्लिम कॉलोनी से दूसरी बार के पार्षद इतात खान की अनुपस्थिति को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि संगठन एकजुट होता तो इतने बड़े स्तर पर जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति देखने को नहीं मिलती। यह संकेत है कि टिकट वितरण को लेकर असंतोष और रणनीतिक दूरी दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।

हाईकमान के सामने संगठनात्मक संतुलन की चुनौती
धरमपुर सीट को कांग्रेस के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है। राजधानी क्षेत्र की यह सीट राजनीतिक रूप से संवेदनशील भी है और यहां का सामाजिक समीकरण भी काफी विविध है। ऐसे में टिकट चयन में जरा सी चूक पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस हाईकमान को अब सक्रिय भूमिका निभानी होगी। यदि समय रहते स्थानीय दावेदारों, पार्षदों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित नहीं किया गया, तो गुटबाजी खुलकर चुनावी समीकरण बिगाड़ सकती है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पार्टी को यहां ऐसा चेहरा उतारना होगा जो संगठन को साथ लेकर चल सके और सभी गुटों के बीच संतुलन स्थापित कर सके। धरमपुर में कांग्रेस की टिकट को लेकर चल रही सरगर्मी आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। होली मिलन कार्यक्रम ने जिस तरह आंतरिक मतभेदों को उजागर किया है, उससे साफ है कि टिकट वितरण से पहले पार्टी नेतृत्व को कई दौर की बैठकें और संवाद करने पड़ सकते हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस नेतृत्व इस सीट पर किस रणनीति के तहत निर्णय लेता है और क्या वह गुटबाजी को समाप्त कर एकजुटता का संदेश दे पाता है या नहीं।