मदरसों में बाहरी बच्चों की एंट्री पर सख्त निगरानी, प्रदेशभर में वेरिफिकेशन अभियान शुरू

8

 

देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों को लेकर सामने आए एक मामले ने शासन- प्रशासन को सक्रिय कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में बाहरी राज्यों, खासकर बिहार से बच्चों को मदरसों में लाए जाने के संकेत मिलने के बाद सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रदेशव्यापी जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि बच्चों की सुरक्षा, पारदर्शिता और नियमों का पालन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित संस्थानों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक सत्यापन अभियान चलाएं। इस अभियान के तहत मदरसों की वास्तविक स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।

जांच के दायरे में क्या-क्या?
जांच के दौरान कई अहम पहलुओं पर फोकस किया जाएगा:
बच्चों को किन स्रोतों से लाया गया
अभिभावकों की सहमति है या नहीं
बच्चों को लाने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका
मदरसों में रहन-सहन और शिक्षा की स्थिति
इसके लिए प्रदेश के सभी मदरसों में सघन निरीक्षण और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। वर्तमान में उत्तराखंड में कुल 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हो रहे हैं। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद इन सभी संस्थानों को जांच के दायरे में लाया जा रहा है, जिससे किसी भी तरह की अनियमितता को समय रहते पकड़ा जा सके।

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में लागू उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड को समाप्त किया जा रहा है। इसके बाद सभी मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेना अनिवार्य होगा
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करनी होगी।

सरकार ने इस कार्रवाई के जरिए साफ कर दिया है कि शिक्षा संस्थानों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में इस जांच अभियान के नतीजे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव ला सकते हैं।