लोअर पीसीएस-2024 में नायब तहसीलदार की मेरिट में प्रयाग आईएएस का जलवा, आयुष प्रथम और बिकरांत दूसरे स्थान पर

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आयुष ने पहले ही प्रयास में हासिल किया शीर्ष स्थान, बोले—सिर्फ ज्ञान नहीं, उत्तर लिखने की प्रभावी शैली भी सफलता की कुंजी
बिकरांत ने ट्रेनिंग के साथ जारी रखी तैयारी और हासिल किया दूसरा स्थान, परिवार और गुरुजनों के मार्गदर्शन को दिया सफलता का श्रेय

देहरादून। सपनों को लक्ष्य बनाकर जब मेहनत सही दिशा में आगे बढ़ती है तो सफलता की कहानी खुद-ब-खुद लिखी जाती है। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की लोअर पीसीएस-2024 परीक्षा में प्रयाग आईएएस अकादमी, देहरादून से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों ने ऐसी ही प्रेरणादायी सफलता की कहानी लिखी है। नायब तहसीलदार पद की जारी मेरिट सूची में प्रयाग आईएएस के आयुष बैलवाल ने प्रथम और बिकरांत सिंह ने द्वितीय स्थान हासिल कर संस्थान के साथ-साथ अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

नायब तहसीलदार पद की मेरिट सूची के शीर्ष दो स्थानों पर एक ही संस्थान के अभ्यर्थियों का चयन अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि है। आयुष और बिकरांत की इस सफलता ने यह भी साबित किया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सही रणनीति, निरंतर अभ्यास, अनुशासन और अनुभवी मार्गदर्शन के साथ लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। प्रयाग आईएएस अकादमी के इन दो अभ्यर्थियों के अलावा सचिन, सरिता कुंवर, मनीष, शीर्षवाल और मयंक रावत ने भी सफलता हासिल की है। एक साथ कई अभ्यर्थियों के चयन से संस्थान में खुशी का माहौल है। संस्थान के निदेशक आर.ए. खान ने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

नायब तहसीलदार पद की मेरिट में पहला स्थान हासिल करने वाले आयुष बैलवाल की सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने यह मुकाम अपने पहले ही प्रयास में हासिल किया है। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े आयुष ने अपनी मेहनत, अनुशासन और सही रणनीति के दम पर प्रतियोगी परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल कर यह साबित किया कि मजबूत तैयारी और आत्मविश्वास के साथ पहली कोशिश में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

आयुष के पिता सरकारी विद्यालय में शिक्षक हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। परिवार में शिक्षा का वातावरण रहा है। उनके एक भाई एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि बहन बीएससी-बीएड की पढ़ाई कर रही हैं। परिवार के इसी शैक्षणिक वातावरण और माता-पिता के निरंतर सहयोग ने आयुष को अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर और प्रतिबद्ध बनाए रखा। आयुष ने अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रारंभिक तैयारी प्रयाग आईएएस अकादमी, देहरादून से की। तैयारी के दौरान उन्होंने विषयों की समझ विकसित करने के साथ ही परीक्षा की मांग को समझने पर विशेष जोर दिया।

आयुष के मुताबिक प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल विषय का ज्ञान हासिल कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। परीक्षा में सफलता के लिए उस ज्ञान को कम शब्दों में, स्पष्ट, तार्किक और प्रभावी तरीके से उत्तर पुस्तिका में प्रस्तुत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी राइटिंग स्किल और उत्तर लेखन की शैली पर विशेष ध्यान दिया। लगातार लिखने का अभ्यास किया और कोशिश की कि उत्तरों में तथ्यों के साथ तार्किकता और स्पष्टता भी दिखाई दे।
आयुष का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कई अभ्यर्थियों के पास लगभग समान स्तर का ज्ञान होता है, लेकिन उत्तर को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता कई बार परिणाम में महत्वपूर्ण अंतर पैदा करती है। उन्होंने अपनी तैयारी में इसी पहलू को प्राथमिकता दी और लगातार अपनी लेखन शैली को बेहतर बनाने का प्रयास किया। उनके अनुसार, “पढ़ना जरूरी है, लेकिन जो पढ़ा है उसे परीक्षा में प्रभावी ढंग से लिख पाना भी उतना ही जरूरी है।” उनकी इस रणनीति का परिणाम नायब तहसीलदार पद की मेरिट में प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान के रूप में सामने आया।

सफलता के बाद आयुष ने कहा कि आज का युवा सिर्फ अपने करियर के बारे में नहीं सोच रहा, बल्कि देश और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नायब तहसीलदार के रूप में वह प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ जनसेवा को प्राथमिकता देना चाहते हैं। आयुष ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों, प्रयाग आईएएस अकादमी और दोस्तों के सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि परिवार का विश्वास और शिक्षकों का लगातार मार्गदर्शन उन्हें लक्ष्य से भटकने नहीं देता था। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान असफलताओं और कमियों से घबराने के बजाय उन्हें पहचानना और उन पर काम करना चाहिए। उनका मानना है कि लगातार मेहनत के साथ आत्ममूल्यांकन सफलता की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है। आयुष ने युवाओं से कहा कि लक्ष्य कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि तैयारी को सही दिशा दी जाए और नियमित रूप से अपनी प्रगति का मूल्यांकन किया जाए तो उसे हासिल किया जा सकता है।

नायब तहसीलदार पद की मेरिट सूची में दूसरा स्थान हासिल करने वाले बिकरांत सिंह मूल रूप से जसपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने भी प्रयाग आईएएस अकादमी से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की और अपनी मेहनत से मेरिट सूची में दूसरा स्थान हासिल किया। बिकरांत की सफलता की कहानी इसलिए भी प्रेरणादायी है, क्योंकि उन्होंने एक अन्य सरकारी पद के चयन के बाद भी अपने बड़े लक्ष्य के लिए तैयारी जारी रखी। इससे पहले उनका चयन शिक्षा विभाग में ईओ पद के लिए हो चुका है और वर्तमान में उनकी ट्रेनिंग चल रही है। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी को जारी रखा। उन्होंने अपनी तैयारी में निरंतरता बनाए रखी और अंततः लोअर पीसीएस-2024 में नायब तहसीलदार पद की मेरिट में दूसरा स्थान हासिल किया।

बिकरांत ने बताया कि किसी एक परीक्षा या पद पर चयन हो जाने के बाद तैयारी रोक देना उनके लिए विकल्प नहीं था। उन्होंने अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए नियमित अध्ययन जारी रखा। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए नियमित अध्ययन, सही रणनीति और धैर्य बेहद जरूरी हैं। कई बार परिणाम तुरंत नहीं मिलता, लेकिन लगातार प्रयास करने वाला अभ्यर्थी अपनी तैयारी के दौरान लगातार बेहतर होता जाता है। बिकरांत ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के आशीर्वाद, परिवार के सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा कि परिवार ने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

बिकरांत ने कहा कि प्रयाग आईएएस अकादमी के निदेशक आर.ए. खान के दिशा-निर्देशन में तैयारी करने का उन्हें काफी लाभ मिला। उनके अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सही दिशा का होना उतना ही जरूरी है जितना कि मेहनत करना। उन्होंने कहा कि यदि अभ्यर्थी को यह स्पष्ट हो कि उसे क्या पढ़ना है, किस स्तर तक पढ़ना है और परीक्षा में उस ज्ञान का उपयोग किस तरह करना है, तो तैयारी अधिक प्रभावी हो जाती है। बिकरांत के मुताबिक सही मार्गदर्शन, नियमित अध्ययन, लगातार अभ्यास और परिवार के सहयोग ने उन्हें परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।

शीर्ष दो स्थानों पर प्रयाग आईएएस के अभ्यर्थी, संस्थान में जश्न
लोअर पीसीएस-2024 में नायब तहसीलदार पद की मेरिट सूची में पहले और दूसरे स्थान पर प्रयाग आईएएस के अभ्यर्थियों का चयन संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है। आयुष बैलवाल और बिकरांत सिंह की सफलता के साथ ही संस्थान के अन्य अभ्यर्थियों का चयन भी तैयारी कर रहे युवाओं के लिए उत्साह और प्रेरणा का विषय बना है। सचिन, सरिता कुंवर, मनीष, शिर्षवाल और मयंक रावत ने भी परीक्षा में सफलता हासिल की है। एक ही परीक्षा में संस्थान के कई अभ्यर्थियों के सफल होने से प्रयाग आईएएस अकादमी में खुशी का माहौल है।

संस्थान के निदेशक आर.ए. खान ने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत, उनके अभिभावकों के सहयोग और शिक्षकों के निरंतर मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने सफल अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि आने वाले समय में भी संस्थान का प्रयास रहेगा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन और अध्ययन का उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

आयुष बैलवाल और बिकरांत सिंह की सफलता की परिस्थितियां भले ही अलग हों, लेकिन दोनों की कहानी में एक बात समान है—लक्ष्य के प्रति निरंतरता।
आयुष ने जहां अपने पहले ही प्रयास में उत्तर लेखन की प्रभावी शैली और अनुशासित तैयारी के दम पर मेरिट में शीर्ष स्थान हासिल किया, वहीं बिकरांत ने एक सरकारी पद पर चयन और ट्रेनिंग के बावजूद अपने लक्ष्य की तैयारी जारी रखकर दूसरा स्थान प्राप्त किया। दोनों की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सफलता केवल घंटों पढ़ने से नहीं, बल्कि सही दिशा में पढ़ने, अपनी कमियों को पहचानने, उन्हें दूर करने और अंतिम लक्ष्य तक निरंतर प्रयास करते रहने से हासिल होती है। लोअर पीसीएस-2024 के नायब तहसीलदार पद की मेरिट में प्रयाग आईएएस के इन दोनों अभ्यर्थियों ने शीर्ष दो स्थान हासिल कर न केवल अपनी मेहनत को मुकाम दिया, बल्कि यह भी दिखाया कि जब लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और मार्गदर्शन सही हो, तो सफलता की राह खुद बनती चली जाती है।