दहेज प्रथा, फिजूलखर्ची, नशाखोरी और मोबाइल की लत से बचने की नसीहत
मां-बाप, पत्नी, बच्चों और पड़ोसियों के अधिकारों की हिफाजत जरूरी
देहरादून। हालात कैसे भी हो घबराने की जरूरत नहीं है, कानून के दायरे में रहकर अपनी सामाजिक, धार्मिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना ही सबसे बेहतर रास्ता है। यह बात शनिवार को भारूवाला स्थित एक वेडिंग प्वाइंट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से खुसूसी फिक्री व इस्लाही बैठक में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कही। यूसीसी (समान नागरिक संहिता) के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट कहा इस संबंध में बोर्ड अदालत का दरवाजा खटखटा चुका है।
उन्होंने समाज के हर तबके—बुद्धिजीवियों, आधुनिक शिक्षित वर्ग और उलमा—से अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने और निभाने की अपील की। साथ ही समाज में फैली कुरीतियों जैसे दहेज प्रथा, फिजूलखर्ची, नशाखोरी और मोबाइल की लत से बचने की नसीहत दी। उन्होंने मां-बाप, पत्नी, बच्चों और पड़ोसियों के अधिकारों की हिफाजत पर भी जोर दिया।
राष्ट्रीय सचिव मौलाना उमरैन महफूज रहमानी ने कहा कि हर मुसलमान को शरीयत के बताए रास्ते पर चलने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बोर्ड लगातार जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहा है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

वहीं, राष्ट्रीय प्रवक्ता सैय्यद कासिम रसूल इलियास ने संस्थागत पारदर्शिता पर बल देते हुए कहा कि सभी शिक्षण और धार्मिक संस्थानों, मस्जिदों व मदरसों के दस्तावेज दुरुस्त रखने चाहिए और वित्तीय लेनदेन पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए।
इस अवसर पर बोर्ड के उत्तराखंड सदस्य मुफ्ती सलीम अहमद कासमी, कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. एस फारूख, जमीयत के प्रदेश महासचिव मौलाना शराफत, जिलाध्यक्ष मौलाना अब्दुल मन्नान, इमाम संगठन अध्यक्ष मुफ्ती रईस कासमी, मुफ्ती तौफीक इलाही, मुफ्ती अयाज अहमद, मौलाना एजाज, मौलाना गुलशेर, मौलाना रागिब, मास्टर अब्दुल सत्तार, हाफिज शाहनजर, मोहम्मद युसुफ, गुलजार अहमद, मो. हसन, कारी नईम, कारी फरहान, अनवर कमाल, मास्टर मुस्तकीम, शमीम अंसारी व तौसीफ खान आदि मौजूद रहे।










