आर्केडिया–चंद्रबनी क्षेत्र में भाजपा की बढ़ती मुश्किलें! बुटोला थाम सकते हैं यूकेडी का दामन

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देहरादून। राजधानी देहरादून के आर्केडिया और चंद्रबनी क्षेत्र की राजनीति में इन दिनों हलचल बढ़ती नजर आ रही है। क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की नाराज़गी चर्चा का विषय बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन नाराज़ नेताओं की नाराज़गी दूर नहीं हुई तो इसका असर आने वाले चुनावों में साफ दिखाई दे सकता है।

कुछ समय पहले आर्केडिया क्षेत्र की पूर्व पार्षद वीना रतूड़ी की नाराज़गी की चर्चा राजनीतिक गलियारों में हुई थी। अब इसी क्षेत्र से जुड़े भाजपा के वरिष्ठ नेता और दो बार शिवालिक मंडल के अध्यक्ष रह चुके सुखबीर सिंह बुटोला (सुखबीर सिंह बुटोला) की नाराज़गी भी सामने आ रही है।

संगठन में लंबे समय तक निभाई भूमिका
सुखबीर सिंह बुटोला वर्ष 2006 से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं और विभिन्न मंडलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। संगठन में उनकी सक्रियता और क्षेत्र में मजबूत पकड़ के कारण उन्हें भाजपा का प्रभावशाली जमीनी नेता माना जाता है। उन्होंने दो बार शिवालिक सहसपुर मंडल के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई है और लंबे समय तक पार्टी संगठन को मजबूत करने का कार्य किया है।

रिकॉर्ड मतों से बने थे पार्षद
सुखबीर बुटोला चंद्रबनी वार्ड नंबर 91 से पार्षद भी रह चुके हैं। वर्ष 2018 के देहरादून नगर निगम चुनाव (2018 देहरादून नगर निगम चुनाव) में उन्होंने रिकॉर्ड जीत दर्ज करते हुए लगभग 2170 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी, जो उस समय उत्तराखंड में पार्षद चुनावों में सबसे बड़ी जीतों में गिनी गई थी। उनकी इस जीत ने क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता और मजबूत जनाधार को स्पष्ट कर दिया था। वर्तमान में उनकी पत्नी श्रीमती सुमन बुटोला उसी वार्ड से पार्षद के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। बताया जा रहा है कि लंबे समय तक पार्टी के लिए सक्रिय रहने के बावजूद वर्तमान में सुखबीर बुटोला को संगठन में कोई महत्वपूर्ण दायित्व नहीं मिला है। इसी कारण वे पार्टी नेतृत्व से नाराज़ बताए जा रहे हैं।

 

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, बुटोला अब नए राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं और जल्द ही क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल में शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह भाजपा के लिए आर्केडिया–चंद्रबनी क्षेत्र में बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।

पहाड़ी वोटरों की भूमिका अहम
राजनीतिक जानकारों के अनुसार सहसपुर विधानसभा क्षेत्र (सहसपुर विधानसभा क्षेत्र) में पहाड़ी समाज के मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। अनुमान है कि इस क्षेत्र में लगभग 90 हजार पहाड़ी मतदाता हैं, जिनका चुनावी परिणामों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

2022 चुनाव में भाजपा को मिली थी बड़ी बढ़त
वर्ष 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव (2022 उत्तराखंड विधानसभा चुनाव) में चंद्रबनी वार्ड से भाजपा को करीब 3300 से अधिक वोटों की बढ़त मिली थी। इसके साथ ही आर्केडिया क्षेत्र के तीनों वार्डों ने भाजपा की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्र के प्रभावशाली नेता पार्टी से नाराज़ होकर अलग राह चुनते हैं तो आने वाले चुनावों में इसका असर दिखाई दे सकता है।

किस करवट बैठेगी क्षेत्र की राजनीति
फिलहाल आर्केडिया और चंद्रबनी क्षेत्र में इन घटनाक्रमों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि भाजपा नेतृत्व नाराज़ नेताओं को मनाने में कितना सफल होता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पहाड़ी बहुल आर्केडिया क्षेत्र की राजनीति आने वाले दिनों में किस करवट बैठती है और इसका आगामी चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।