“फर्जी डिग्री पर गिरी गाज” 10 शिक्षकों की सेवा समाप्त, जनगणना ड्यूटी से भी हटाए गए

Astitva Times Desk
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देहरादून। उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में सख्ती का बड़ा संदेश देते हुए रुद्रप्रयाग जिले में 10 शिक्षकों की सेवाएं एक झटके में समाप्त कर दी गई हैं। यह कार्रवाई न सिर्फ नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पूरे प्रदेश में हलचल पैदा कर रही है।

जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी अजय कुमार चौधरी द्वारा जारी आदेश के बाद शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। जांच में सामने आया कि संबंधित शिक्षकों ने जम्मू-कश्मीर से बी.एड. की डिग्री हासिल की थी, जहां स्नातक में 50% अंक अनिवार्य नहीं होते। जबकि उत्तराखंड में बी.एड. के लिए यह न्यूनतम योग्यता अनिवार्य है। यही “तकनीकी खामी” अब इन शिक्षकों के लिए भारी पड़ गई और उनकी नियुक्ति को नियमों के विपरीत मानते हुए सेवा समाप्त कर दी गई। आदेश में साफ कहा गया है कि यदि ये शिक्षक जनगणना कार्य में लगे थे, तो उन्हें तत्काल प्रभाव से उस जिम्मेदारी से भी मुक्त किया जाए। उनकी जगह रिजर्व सूची से नए कार्मिकों की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं, ताकि राष्ट्रीय महत्व का यह कार्य बाधित न हो।

इन शिक्षकों पर गिरी गाज:
सरिता चमोला, अरविंद नेगी, सादेव प्रसाद, श्याम लाल, सुभाष कुमार (जखोली), खजान सिंह (अगस्त्यमुनि), अनूप पुजारी, रानी देवी, पुष्पेंद्र सिंह और चंदर सिंह (ऊखीमठ)।

सूत्रों के अनुसार, हरिद्वार जिले में भी इसी तरह के मामलों की जांच तेज हो गई है। माना जा रहा है कि वहां भी कई शिक्षकों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। यह फैसला साफ संकेत देता है कि उत्तराखंड में अब शैक्षणिक योग्यता और नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और योग्य उम्मीदवारों को अवसर देने की दिशा में एक बड़ा सुधार साबित हो सकता है। यह निर्णय सिर्फ 10 शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है—नियमों से समझौता अब महंगा पड़ेगा।

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