बस्ती वासियों एवं मजदुर संगठनो ने विभिन्न मांगों को लेकर किया प्रदर्शन

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वक्ता बोले; “बस्तियों, मजदूरों और गरीबों को चाहिए कानूनी अधिकार, नहीं तो होगा बड़ा जनांदोलन”

देहरादून। तिलाड़ी विद्रोह की वर्षगांठ पर राजधानी देहरादून में मजदूरों, बस्तीवासियों और सामाजिक -राजनीतिक संगठनों ने सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए गरीबों और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने का ऐलान किया। बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा से गांधी पार्क तक निकाले गए प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि सरकार एक ओर मजदूरों और गरीबों को उनके कानूनी अधिकारों से वंचित कर रही है, वहीं दूसरी ओर एलिवेटेड रोड जैसी विनाशकारी परियोजनाओं को कानून की अनदेखी करते हुए आगे बढ़ा रही है।

दून समग्र विकास अभियान के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में शहर की विभिन्न मजदूर बस्तियों से आए प्रतिनिधियों, कांग्रेस, चेतना आंदोलन, सर्वोदय मंडल तथा अनेक जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछले दस वर्षों से चुनावों के दौरान बस्तियों के नियमितीकरण और मजदूरों के अधिकारों के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही उन्हीं गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी शुरू हो जाती है। वक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बना मलिन बस्ती अधिनियम-2016 आज भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया है। इसके कारण हजारों परिवार असुरक्षा और विस्थापन के खतरे में जीवन गुजारने को मजबूर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब जनता को खोखले आश्वासन नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की कानूनी गारंटी चाहिए।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने निर्माण मजदूरों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि महंगाई, बेरोजगारी और गैस संकट से जूझ रहे मजदूरों के लिए बने निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड में पंजीकरण की प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया गया है कि वास्तविक श्रमिक ही सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित रह जा रहे हैं। यूनियनों के प्रमाणपत्रों को मान्यता देने के बजाय ऐसे नियम लागू किए गए हैं जिनसे श्रमिकों का अधिकार छिन रहा है। प्रदर्शनकारियों ने प्रदेशभर में चल रहे औद्योगिक श्रमिक आंदोलनों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन मजदूरों के बजाय उद्योग मालिकों के हितों की रक्षा में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की मांगों की अनदेखी और दमनकारी रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

सभा में प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर भी तीखा विरोध दर्ज कराया गया। वक्ताओं ने इसे पर्यावरण, जनहित और शहर के भविष्य के लिए नुकसानदेह बताते हुए कहा कि इस परियोजना से आम जनता को कोई लाभ नहीं मिलेगा। इसका फायदा केवल कुछ चुनिंदा कंपनियों, अधिकारियों और नेताओं तक सीमित रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं और जनभावनाओं की अनदेखी की जा रही है।
कांठ बांग्ला बस्ती के मुद्दे पर बोलते हुए नेताओं ने कहा कि वहां के निवासियों को जबरन विस्थापित करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि जनसंघर्षों के दबाव में ही इस मामले में कई महत्वपूर्ण सवाल उठे हैं और यहां तक कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय को भी संबंधित प्रक्रिया पर गंभीर टिप्पणियां करनी पड़ी हैं। वक्ताओं ने दावा किया कि यदि सरकार गरीबों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखती है तो व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।

कार्यक्रम में स्वतंत्र पत्रकार हेम भट्ट की कथित गैरकानूनी गिरफ्तारी की भी कड़ी निंदा की गई। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनआंदोलनों पर बढ़ता दमन सरकार के वास्तविक चरित्र को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज को दबाने का हर प्रयास जनता के प्रतिरोध को और मजबूत करेगा। इस अवसर पर तिलाड़ी विद्रोह के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर और महात्मा गांधी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर संविधान, लोकतंत्र और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय शर्मा, प्रदेश कांग्रेस महामंत्री सुनीता प्रकाश, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया आनंद, सर्वोदय मंडल के हरबीर सिंह कुशवाहा, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के भोपाल, शिक्षाविद एवं कांग्रेस आईटी सेल के पूर्व महामंत्री कुलदीप ज़ख्मोला, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मानसिंह, रोहित मित्तल तथा स्वतंत्र पत्रकार स्वाति नेगी सहित अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया। प्रदर्शन में कांग्रेस, चेतना आंदोलन, उत्तराखंड इंसानियत मंच और विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं के अलावा बड़ी संख्या में मजदूर, बस्तीवासी और आम नागरिक उपस्थित रहे।