लखनऊ। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) अपनी भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। आयोग जल्द ही समूह ‘ग’ की भर्तियों में अभ्यर्थियों के शैक्षणिक एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन डिजीलॉकर (DigiLocker) के माध्यम से करेगा। इसके लिए आयोग ने नए डिजिटल पोर्टल का ट्रायल शुरू कर दिया है। तकनीकी परीक्षण सफल होने के बाद इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
आयोग ने पिछले कुछ वर्षों में भर्ती प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए कई बदलाव किए हैं। पहले जहां अभ्यर्थियों को दस्तावेजों की हार्ड कॉपी जमा करनी पड़ती थी, वहीं अब ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड करने और उनका ऑनस्क्रीन सत्यापन किया जा रहा है। अब आयोग इस व्यवस्था को और आगे बढ़ाते हुए डिजीलॉकर से सीधे दस्तावेजों का सत्यापन करेगा, जिससे प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता तत्काल जांची जा सकेगी। नई व्यवस्था के तहत यूपी माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड), केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) तथा देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा जारी हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक और अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्र, अंकपत्र एवं डिग्रियां डिजीलॉकर से सत्यापित की जाएंगी। इससे दस्तावेजों के सत्यापन में लगने वाला समय काफी कम होगा और फर्जी प्रमाणपत्रों की संभावना पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा।
आयोग के अधिकारियों के अनुसार, डिजीलॉकर आधारित सत्यापन प्रणाली लागू होने के बाद अभ्यर्थियों द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेजों का मिलान सीधे डिजिटल रिकॉर्ड से किया जा सकेगा। इससे सत्यापन प्रक्रिया में मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी और भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनेगी। इस नई व्यवस्था की शुरुआत 7,994 पदों वाली लेखपाल भर्ती के दस्तावेज सत्यापन से किए जाने की संभावना है। लेखपाल भर्ती की लिखित परीक्षा पहले ही संपन्न हो चुकी है और आयोग अब दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। यदि ट्रायल सफल रहता है तो भविष्य में आयोग द्वारा आयोजित सभी समूह ‘ग’ की भर्तियों में डिजीलॉकर आधारित दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था लागू की जाएगी।
भर्ती विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग की यह पहल डिजिटल इंडिया अभियान को भी मजबूती देगी। इससे अभ्यर्थियों को बार-बार मूल प्रमाणपत्र लेकर सत्यापन केंद्रों पर जाने की आवश्यकता कम होगी, दस्तावेजों के सत्यापन में तेजी आएगी तथा चयन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकेगी। इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने की संभावनाओं पर भी प्रभावी रोक लगेगी।यूपीएसएसएससी की यह पहल राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं में डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है। यदि यह व्यवस्था सफल रहती है तो आने वाले समय में आयोग की सभी प्रमुख भर्तियों में दस्तावेज सत्यापन पूरी तरह डिजीलॉकर आधारित होने की संभावना है।













