शिक्षक देश और समाज का रोशन चराग़ और निर्माता : नवाब आक़िब हसन

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एस. फातिमा पब्लिक स्कूल में शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का सम्मान, शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की भूमिका पर हुआ सार्थक विमर्श

गंगोह। कस्बे के मोहल्ला गुलाम औलिया स्थित एस. फातिमा पब्लिक स्कूल, गंगोह में शिक्षक दिवस के अवसर पर एक गरिमापूर्ण, प्रेरणादायक एवं भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों के सम्मान के साथ-साथ शिक्षा, संस्कार, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका पर गंभीर एवं सार्थक विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एस. फातिमा एजुकेशनल सोसायटी के महाप्रबंधक नवाब आक़िब हसन ने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक किसी भी राष्ट्र की सबसे मूल्यवान पूंजी और आने वाली पीढ़ियों का वास्तविक निर्माता होता है। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, विचार, दृष्टिकोण, संस्कार और चरित्र को आकार देने वाला मेमार है।
उन्होंने कहा कि—
“उस्ताद मेमार है, किसान भी है, सुनार भी है और लुहार भी है।
उस्ताद यक़ीनन वाजिबुल-ए-एहतराम और लायक़-ए-ताज़ीम है।”


नवाब आक़िब हसन ने कहा कि शिक्षक स्वयं जलकर अपने शागिर्दों की राहों को रोशन करता है और उन्हें जीवन की कठिनाइयों एवं चुनौतियों का सामना करने वाला जाँबाज़ बनाता है। जिस प्रकार मेमार किसी इमारत की मजबूत बुनियाद रखता है, किसान बंजर ज़मीन को उपजाऊ बनाता है, सुनार साधारण धातु को तराशकर अनमोल बनाता है और लुहार लोहे को आग में तपाकर उसे मजबूत आकार देता है, उसी प्रकार शिक्षक विद्यार्थियों की कच्ची प्रतिभा को इल्म, मेहनत, अनुशासन, तहज़ीब और तरबियत के माध्यम से निखारकर उन्हें समाज और राष्ट्र की ख़िदमत के योग्य बनाता है। उन्होंने कहा कि उस्ताद समाज का सबसे ख़ामोश, मगर सबसे असरदार समाज-सुधारक होता है। वह केवल किताब का सबक़ नहीं पढ़ाता, बल्कि ज़िंदगी का शऊर देता है। वह विद्यार्थियों को यह समझाता है कि इल्म का मक़सद केवल अच्छे अंक प्राप्त करना या रोज़गार हासिल करना नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान बनना और अपने परिवार, समाज तथा देश के लिए फ़ायदेमंद साबित होना है।

“शिक्षक तहज़ीब का समुंदर है”
नवाब आक़िब हसन ने शिक्षक को “तहज़ीब का समुंदर” बताते हुए कहा कि शिक्षक से इल्म और तरबियत का ऐसा दरिया रवां होता है, जो विद्यार्थियों की बंजर ज़मीन को सींचकर उसमें किरदार, शऊर, इंसानियत और ख़िदमत की फ़सल पैदा करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक की ज़िम्मेदारी केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उनके भीतर ऐसी रोशनी पैदा करना है, जो उन्हें सही और ग़लत के बीच अंतर समझने की क्षमता दे। शिक्षक विद्यार्थियों को इस क़ाबिल बनाता है कि वे भविष्य में समाज की बुराइयों, कुरीतियों और अंधविश्वासों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले और देश की तरक़्क़ी में योगदान देने वाले चाँद और सितारे बन सकें।


इस्लामी तालीमी रवायत में शिक्षक और इल्म की अहमियत
नवाब आक़िब हसन ने तालीम और तरबियत के इस विचार को इस्लामी तालीमी रवायत से जोड़ते हुए कहा कि पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद ﷺ ने इल्म, अख़लाक़ और इंसान-साज़ी को अत्यंत महत्व दिया। क़ुरआन की पहली वह्य का आरंभ “इक़रा” — यानी “पढ़ो” से हुआ (सूरह अल-अलक़, 96:1)। वहीं क़ुरआन ज्ञान की महत्ता को रेखांकित करते हुए सवाल करता है कि क्या जानने वाले और न जानने वाले बराबर हो सकते हैं? (सूरह अज़-ज़ुमर, 39:9)।
उन्होंने सहीह अल-बुख़ारी की हदीस का हवाला देते हुए कहा कि क़ुरआन सीखने और सिखाने वालों को बेहतरीन लोगों में शुमार किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि तालीम केवल व्यक्तिगत तरक़्क़ी का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की बेहतरी और इंसानियत की सेवा का भी ज़रिया है।

उन्होंने इमाम ग़ज़ाली की तालीमी सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि इल्म की असली क़ीमत तभी है, जब वह इंसान के अमल और किरदार में दिखाई दे। इसी क्रम में उन्होंने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन को शिक्षक की अज़मत की मिसाल बताया और कहा कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने नौजवानों के ख़्वाबों को तालीम के माध्यम से हक़ीक़त में बदलने का संदेश दिया। नेल्सन मंडेला ने भी शिक्षा को दुनिया को बदलने वाली अत्यंत शक्तिशाली ताक़त के रूप में देखा।
“तकनीक जानकारी दे सकती है, मगर किरदार की तामीर शिक्षक ही करता है”
वर्तमान तकनीकी दौर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रही हैं। मशीनें जानकारी उपलब्ध करा सकती हैं, सीखने को आसान बना सकती हैं और ज्ञान तक पहुंच को तेज़ कर सकती हैं, लेकिन एक संवेदनशील शिक्षक की जगह नहीं ले सकतीं।

उन्होंने कहा—
“तकनीक जानकारी दे सकती है, मगर किरदार की तामीर एक शिक्षक ही करता है।”
उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थी की आँखों में छिपे ख़्वाब को पहचानता है, उसकी ख़ामोशी में छिपी परेशानी को समझता है, उसकी कमज़ोरी को ताक़त में बदलने का रास्ता दिखाता है, उसकी असफलता में उसका हौसला बनता है और उसकी कामयाबी में सबसे पहले ख़ुश होने वालों में शामिल होता है।
“विद्यार्थियों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, ज़िंदगी के लिए तैयार करें”
नवाब आक़िब हसन ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को केवल परीक्षाओं और अंकों के लिए नहीं, बल्कि ज़िंदगी के लिए तैयार करें। उनमें सवाल करने, तर्क के साथ सोचने, सपने देखने, मेहनत करने, चुनौतियों का सामना करने और असफलताओं से सीखकर दोबारा खड़े होने का हौसला पैदा करें।

उन्होंने कहा कि—
“कक्षा बदलेगी तो समाज बदलेगा और शिक्षक की सोच बदलेगी तो पूरी नस्ल की सोच बदल सकती है।”
उन्होंने कहा कि किसी देश का भविष्य संसदों, दफ़्तरों और कारखानों में ही नहीं, बल्कि कक्षाओं में भी तैयार होता है। आज शिक्षक जिन बच्चों को पढ़ा रहे हैं, वही कल देश के डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रशासक, उद्यमी, शिक्षक और ज़िम्मेदार नागरिक बनेंगे। इसलिए शिक्षक के हाथ में केवल चॉक और किताब नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का भविष्य होता है।

विद्यार्थियों से शिक्षकों के सम्मान का आह्वान
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक का एहतराम केवल शिक्षक दिवस तक सीमित नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों की मेहनत, मार्गदर्शन, अनुशासन और मोहब्बत की क़द्र करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि असली कामयाबी तब है, जब इंसान का इल्म उसके किरदार में दिखाई दे और उसकी कामयाबी से उसके परिवार, समाज और देश को फ़ायदा पहुंचे। ऐसी कामयाबी ही वास्तव में शिक्षा की सफलता है।

अपने संबोधन को काव्यात्मक अंदाज़ में समेटते हुए नवाब आक़िब हसन ने कहा—
“किरदार के इनकी यही है अज़मत ‘आक़िब’,
साये में इनके फ़तह-ए-ज़मीन-ओ-आसमान होते हैं।”
उन्होंने कहा कि शिक्षक की असली विरासत कोई पुरस्कार, प्रमाणपत्र या दीवार पर लगी तस्वीर नहीं होती, बल्कि उसके शागिर्दों का किरदार, उनकी कामयाबी, उनकी इंसानियत और समाज के प्रति उनकी ज़िम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि यदि एक शिक्षक अपने जीवन में केवल एक विद्यार्थी को भी बेहतर इंसान बनाने में सफल हो जाता है, तो वह वास्तव में एक बेहतर परिवार, बेहतर समाज और बेहतर राष्ट्र की बुनियाद रख देता है। यही शिक्षक की सबसे बड़ी कामयाबी और उसकी सबसे अमूल्य विरासत है। कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल, सफल, संस्कारित और उद्देश्यपूर्ण भविष्य की कामना की गई।