पौड़ी की सियासत में बड़ा घटनाक्रम: तीन बार नगर पालिका अध्यक्ष और दो बार विधायक रहे बेनाम ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता छोड़ी, पार्टी की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी; अंकिता भंडारी प्रकरण और दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर भी उठाए सवाल

देहरादून। प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पौड़ी नगर पालिका के तीन बार अध्यक्ष और दो बार विधायक रह चुके यशपाल बेनाम ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया। अपनी बेबाक राजनीतिक शैली और शेरो-शायरी के लिए पहचाने जाने वाले बेनाम ने एक वीडियो संदेश जारी कर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की। उनके इस फैसले को पौड़ी की राजनीति के साथ-साथ प्रदेश भाजपा के लिए भी एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।

बेनाम ने अपने फैसले की जानकारी देते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। हालांकि, भाजपा छोड़ने के बाद उनकी आगे की राजनीतिक राह क्या होगी, इस पर उन्होंने फिलहाल कोई खुलासा नहीं किया। उनके शब्दों में, “फैसला सुरक्षित है।” इस एक वाक्य ने उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलों का रास्ता खोल दिया है।
शेरो-शायरी के अंदाज में विदाई
यशपाल बेनाम ने अपने वीडियो संदेश में शेरो-शायरी के अंदाज में भाजपा से विदाई का संदेश दिया। उनके वक्तव्य से स्पष्ट था कि पार्टी छोड़ने का निर्णय केवल सदस्यता की औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे पार्टी की मौजूदा कार्यप्रणाली को लेकर उनकी नाराजगी भी है। बेनाम लंबे समय से पौड़ी की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में तीन बार जिम्मेदारी संभालने और दो बार विधायक रहने के दौरान उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
राज्य आंदोलन में भागीदारी और जनप्रतिनिधि के तौर पर क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित रहने का उल्लेख करते हुए उन्होंने अपने राजनीतिक सफर के विभिन्न पड़ावों की याद भी दिलाई।
उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारी होने के नाते उन्हें जेल भी जाना पड़ा। उनके राजनीतिक जीवन का आधार जनसरोकार और क्षेत्र के विकास के प्रति प्रतिबद्धता रहा है। ऐसे में भाजपा की मौजूदा कार्यप्रणाली से उनकी असहमति उनके पार्टी छोड़ने के फैसले में अहम दिखाई देती है। उनके इस कदम को महज एक राजनीतिक दल की सदस्यता छोड़ने की घटना के बजाय उनके आठ साल के राजनीतिक अनुभव और मौजूदा परिस्थितियों के बीच उभरी असहमति के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे किसी एक घटना को निर्णायक कारण के रूप में स्पष्ट नहीं किया। उनके बयान और पार्टी की कार्यप्रणाली को लेकर जताई गई नाराजगी से इतना जरूर संकेत मिलता है कि भाजपा के भीतर की परिस्थितियों से वह संतुष्ट नहीं थे।

अंकिता भंडारी प्रकरण पर भी भाजपा को घेरा
‘अविकल उत्तराखण्ड’ से बातचीत के दौरान पूर्व विधायक यशपाल बेनाम भाजपा नेताओं के प्रति अपनी नाराजगी छिपाते नजर नहीं आए। बातचीत में अंकिता भंडारी प्रकरण का मुद्दा भी उठा। इस मामले को लेकर भाजपा की भूमिका और कार्रवाई के तरीके पर बेनाम ने असंतोष जाहिर किया।
अंकिता भंडारी प्रकरण उत्तराखंड में लंबे समय से संवेदनशील और जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा रहा है। ऐसे में इस मामले को लेकर बेनाम की टिप्पणी उनके राजनीतिक असंतोष के एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में सामने आई। दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के घटनाक्रम पर भी बेनाम हतप्रभ दिखाई दिए। उन्होंने इस मामले में भाजपा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी की ओर से हीलाहवाली की जा रही है। हालांकि इस संबंध में उनके वक्तव्य को उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में ही देखा जाना चाहिए। भाजपा की ओर से इन टिप्पणियों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह आगे स्पष्ट होगा।
भाजपा छोड़ दी, लेकिन अगली पारी का पत्ता नहीं खोला
यशपाल बेनाम के इस्तीफे की घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब उनकी राजनीतिक दिशा क्या होगी? क्या वह फिर निर्दलीय राजनीति की राह पकड़ेंगे, किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ जाएंगे या फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखेंगे? इन सवालों पर उन्होंने कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है।
बेनाम ने अपने अगले कदम को लेकर केवल इतना कहा कि फैसला सुरक्षित है। उनका यह बयान बताता है कि भाजपा से अलग होने का निर्णय सार्वजनिक कर देने के बावजूद उन्होंने अपनी आगे की रणनीति का खुलासा फिलहाल टाल रखा है।
उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए इस घटनाक्रम पर पौड़ी और प्रदेश की राजनीति में नजरें टिकना स्वाभाविक है। तीन बार नगर पालिका अध्यक्ष और दो बार विधायक रह चुके बेनाम का अगला फैसला स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है। हालांकि, किसी नए राजनीतिक दल में शामिल होने या चुनावी रणनीति को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
पौड़ी की राजनीति में नए समीकरणों की आहट?
यशपाल बेनाम का भाजपा से अलग होना ऐसे समय में सामने आया है, जब उत्तराखंड में क्षेत्रीय मुद्दों, जनभावनाओं और राजनीतिक दलों की जवाबदेही को लेकर लगातार बहस होती रही है। बेनाम ने अपने इस्तीफे के माध्यम से भाजपा की मौजूदा कार्यप्रणाली पर असहमति दर्ज कराई है। उनके आरोपों और टिप्पणियों पर पार्टी का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल इतना तय है कि बेनाम ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान कर अपने राजनीतिक सफर का एक अध्याय बंद कर दिया है। लेकिन आगे की कहानी अभी बाकी है।

