SIR-2026 का 92% काम पूरा; फिर भी वोटर लिस्ट पर क्यों बढ़ी बेचैनी?

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प्रदेश में 8.41 लाख एन्यूमरेशन फॉर्म ‘अन-कलेक्टेबल’; ड्राफ्ट सूची के बाद अब दावे-आपत्तियों की बारी, हर वोटर के नाम पर निगाह

देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) की प्रक्रिया अब बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। घर-घर सत्यापन और मतदाता संबंधी रिकॉर्ड के डिजिटाइजेशन का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है। एक चरण में 92 प्रतिशत से अधिक डेटा डिजिटाइज किए जाने और 99 प्रतिशत से अधिक एन्यूमरेशन फॉर्म वितरित होने के बाद भी निर्वाचन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन मतदाताओं के रिकॉर्ड की है, जिनके फॉर्म निर्धारित प्रक्रिया में प्राप्त नहीं हो सके। ऐसे 8,41,020 एन्यूमरेशन फॉर्म ‘अन-कलेक्टेबल’ श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। अब इन मामलों की दोबारा पड़ताल और सत्यापन महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, ‘अन-कलेक्टेबल’ का अर्थ फर्जी मतदाता होना नहीं है। इसके पीछे अनुपस्थिति, स्थायी रूप से स्थानांतरण, मृत्यु अथवा अन्य कारण हो सकते हैं।

SIR के तहत 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई, जिसमें 71,33,785 मतदाताओं को शामिल किया गया। इसके बाद अब मतदाताओं को अपने नाम और विवरण की जांच करने तथा आवश्यकता पड़ने पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर है।
यही चरण यह तय करने में अहम होगा कि सत्यापन के दौरान प्रभावित हुए वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची में बरकरार रहें और अपात्र, मृत अथवा स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं के रिकॉर्ड को नियमानुसार दुरुस्त किया जाए।

8.41 लाख ‘अन-कलेक्टेबल’ फॉर्म ने खींचा ध्यान
SIR के शुरुआती आंकड़ों में राज्यभर में 8.41 लाख फॉर्म अन-कलेक्टेबल श्रेणी में सामने आए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इनमें लगभग—
4,79,762 मामले स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं से जुड़े,
1,66,741 मामले अनुपस्थित मतदाताओं के,
1,24,278 मामले मृत मतदाताओं से संबंधित बताए गए। इन आंकड़ों को सीधे-सीधे “वोटर लिस्ट से हटाए गए नाम” मानना उचित नहीं होगा। ड्राफ्ट सूची और उसके बाद की दावा-आपत्ति प्रक्रिया के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

तीन जिलों में सबसे ज्यादा UEF
जिलेवार तस्वीर में देहरादून में लगभग 1.91 लाख फॉर्म अन-कलेक्टेबल श्रेणी में दर्ज हुए। इसके बाद ऊधमसिंह नगर में करीब 1.82 लाख और हरिद्वार में करीब 1.31 लाख मामले सामने आए।मैदानी जिलों में बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार, शिक्षा और कारोबार के लिए दूसरे स्थानों पर जाने से मतदाता रिकॉर्ड को अपडेट रखना बड़ी चुनौती बनता है। वहीं पहाड़ी जिलों में भी स्थिति महत्वपूर्ण है, लेकिन कई जिलों में UEF का अनुपात अपेक्षाकृत कम रहा। जिलों में डिजिटाइजेशन की रफ्तार भी अलग-अलग
SIR की समीक्षा के दौरान सामने आए आंकड़ों के मुताबिक डिजिटाइजेशन में कई जिले काफी आगे रहे।

जिला
डिजिटाइजेशन की स्थिति
अल्मोड़ा
100%
चंपावत
100%
बागेश्वर
97%
पिथौरागढ़
97%
टिहरी गढ़वाल
96%
उत्तरकाशी
95%
चमोली
94%
पौड़ी गढ़वाल
94%
रुद्रप्रयाग
93%
नैनीताल
91%
ऊधमसिंह नगर
91%
देहरादून
88%
हरिद्वार
88%
राज्य का औसत 92 प्रतिशत से अधिक होने के बावजूद जिलों के बीच अंतर साफ दिखाई देता है। अब शेष रिकॉर्ड के सत्यापन और डेटा की शुद्धता पर विशेष ध्यान देना होगा।

ASD सूची पर भी रहेगी नजर
SIR की प्रक्रिया में ASD—Absent, Shifted and Deceased यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृत मतदाताओं की सूची भी बेहद महत्वपूर्ण है।
निर्वाचन विभाग ने ASD सूची की बूथवार समीक्षा पर जोर दिया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी वास्तविक मतदाता का नाम केवल अनुपस्थित पाए जाने के कारण गलत तरीके से प्रभावित न हो और दूसरी ओर मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं के रिकॉर्ड को भी सही किया जा सके।
यही वजह है कि ‘अन-कलेक्टेबल’ को लेकर दोबारा जांच जरूरी
एक मतदाता घर पर नहीं मिला तो इसका अर्थ यह नहीं कि वह फर्जी है। वह नौकरी, पढ़ाई, इलाज या किसी अन्य कारण से बाहर हो सकता है। इसी तरह किसी परिवार के स्थानांतरित होने की स्थिति में भी पुराने पते की मतदाता सूची और वर्तमान निवास के बीच अंतर हो सकता है।निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता इसी बात पर निर्भर करेगी कि ऐसे मामलों का निष्पक्ष और सही सत्यापन हो। SIR को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज है। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव की संभावना के कारण राजनीतिक दल भी बूथ स्तर पर निगरानी कर रहे हैं।

राजनीतिक दलों के साथ आम मतदाता की भी परीक्षा
SIR केवल निर्वाचन विभाग की कवायद नहीं है। इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों और आम मतदाताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। राजनीतिक दलों को बूथवार सूची की जांच करनी होगी, जबकि मतदाताओं को स्वयं यह सुनिश्चित करना होगा कि—
• उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में है या नहीं।
• नाम और पता सही दर्ज है या नहीं।
• परिवार के सभी पात्र सदस्यों के नाम मौजूद हैं या नहीं।
• किसी मृत व्यक्ति का नाम सूची में तो नहीं है।
• स्थायी रूप से स्थानांतरित व्यक्ति का रिकॉर्ड सही है या नहीं।
• किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से सूची से बाहर तो नहीं हुआ।

सीडीओ अभिनव शाह ने कहा- निर्धारित प्रक्रिया के तहत मिलेगा पक्ष रखने का अवसर, दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र मतदाताओं के नाम होंगे सूची में शामिल

देहरादून। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण SIR (Special Intensive Revision) को लेकर मतदाताओं के बीच चल रही आशंकाओं के बीच जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन ने कहा है कि SIR प्रक्रिया के दौरान किसी मतदाता का मामला Anomaly अथवा No- Mapping के रूप में सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उसका नाम तत्काल मतदाता सूची से बाहर कर दिया जाएगा। संबंधित मतदाता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने और आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाएगा। जांच और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र पाए जाने वाले मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।

SIR की प्रगति को लेकर ऋषिपर्णा सभागार में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत किए जा रहे कार्यों की प्रगति के साथ ही Anomalies, No-Mapping Notice, दावे-आपत्तियों और प्राप्त प्रपत्रों की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और शुद्धता के साथ समयबद्ध तरीके से कार्य किया जाए।
Anomaly और No-Mapping को लेकर स्थिति स्पष्ट
SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आ रहे Anomaly और No-Mapping के मामलों को लेकर मतदाताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसे देखते हुए बैठक में सीडीओ ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति सामने आने पर मतदाताओं को परेशान या घबराने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। मतदाता आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत कर सकता है। संबंधित दस्तावेजों और मामले की नियमानुसार जांच की जाएगी। जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो मतदाता पात्र पाए जाएंगे, उनके नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि Anomaly अथवा No-Mapping की स्थिति को लेकर प्रत्येक मामले में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसी भी मामले में जल्दबाजी के बजाय नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक में सीडीओ अभिनव शाह ने अधिकारियों और BLO (Booth Level Officer) को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि SIR से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं को सही और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए। मतदाताओं को यह बताया जाए कि उन्हें किन परिस्थितियों में कौन से दस्तावेज अथवा प्रपत्र प्रस्तुत करने हैं और दावे-आपत्तियां किस प्रकार दर्ज कराई जा सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि SIR कार्य में पारदर्शिता, शुद्धता और समयबद्धता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। साथ ही दावे और आपत्तियों का निष्पक्ष तरीके से निर्धारित समय सीमा में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में SIR के तहत प्राप्त दावे-आपत्तियों और विभिन्न प्रपत्रों की स्थिति पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों से अब तक की प्रगति की जानकारी लेते हुए लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। सीडीओ ने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रत्येक स्तर पर रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच नियमानुसार की जाए, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बने रहें और सूची की शुद्धता भी सुनिश्चित हो सके।

बैठक में SIR के तहत सामने आ रहे Anomalies और No-Mapping Notice से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों से इन मामलों की वर्तमान स्थिति और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी ली गई। सीडीओ ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे सभी मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाए। मतदाताओं को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही उनके द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले अभिलेखों की नियमानुसार जांच की जाए। समीक्षा बैठक में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी SIR से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। विशेष रूप से विभिन्न प्रपत्रों तथा Anomalies और No-Mapping मामलों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के संबंध में जानकारी साझा की गई। बैठक के दौरान प्रपत्र 9, 10, 11, 11A और 11B की अद्यतन सूचियां भी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को वितरित की गईं। प्रशासन की ओर से SIR की प्रगति और प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ आवश्यक जानकारी साझा की गई।

सीडीओ अभिनव शाह ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से SIR कार्य में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जिसमें सभी संबंधित पक्षों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुनरीक्षण कार्य पूरी गंभीरता के साथ किया जाए और प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता एवं शुद्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाताओं को प्रक्रिया को लेकर किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए उन्हें आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए। बैठक में उप जिलाधिकारी मुख्यालय रविन्द्र ज्वांठा, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेन्द्र देवली, सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा विभिन्न मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। राजनीतिक दलों की ओर से सीपीआईएम के अनंत आकाश, भाजपा के अरविन्द जैन एवं महेश गुप्ता, कांग्रेस के डॉ. जसविन्दर सिंह एवं रितेश जोशी, आम आदमी पार्टी के कमल राना और बसपा के सतेन्द्र सिंह सहित अन्य प्रतिनिधियों ने बैठक में प्रतिभाग किया।

मतदाताओं के लिए अहम संदेश
SIR प्रक्रिया के दौरान यदि किसी मतदाता का नाम Anomaly या No- Mapping की स्थिति में सामने आता है तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रशासन के अनुसार संबंधित मतदाता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के बाद मामले की नियमानुसार जांच की जाएगी।जांच और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र पाए जाने वाले मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे। ऐसे में प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह या भ्रम में न आएं और SIR से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए अपने संबंधित BLO अथवा निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क कर सही जानकारी प्राप्त करें।

देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बीच दस्तावेजों को लेकर प्रदेशभर में फैली असमंजस की स्थिति के बीच निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं को बड़ी राहत दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस प्राप्त मतदाता निर्धारित 11 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि इनमें से कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है तो आधार कार्ड, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड के आधार पर भी पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।


इस फैसले से उन हजारों मतदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जो आवश्यक दस्तावेज जुटाने के लिए विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। निर्वाचन विभाग का कहना है कि एसआईआर अभियान का उद्देश्य किसी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है।

प्रदेशभर में बूथ स्तर पर लगाए गए एसआईआर शिविरों और निर्वाचन कार्यालयों में इन दिनों बड़ी संख्या में मतदाता दस्तावेजों के साथ पहुंच रहे हैं। कई लोगों में यह भ्रम भी है कि निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। निर्वाचन अधिकारियों ने इसे गलतफहमी बताते हुए कहा कि पात्र मतदाताओं को सत्यापन के लिए पर्याप्त अवसर दिया जा रहा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि यदि किसी मतदाता के पास निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं तो आधार कार्ड, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड के आधार पर भी सत्यापन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने नोटिस प्राप्त मतदाताओं से निर्धारित समय के भीतर अपने बीएलओ या संबंधित निर्वाचन कार्यालय में पहुंचकर सत्यापन कराने की अपील की।

मैप्ड और अनमैप्ड को लेकर भी स्थिति स्पष्ट
एसआईआर अभियान के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के सामने पहली बार ‘मैप्ड’ और ‘अनमैप्ड’ शब्द आए हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार मैप्ड मतदाता वह है, जिसका रिकॉर्ड सत्यापित होकर संबंधित पते, परिवार या मतदान केंद्र से जोड़ दिया गया है। वहीं अनमैप्ड मतदाता वह है, जिसका रिकॉर्ड अभी पूरी तरह सत्यापित नहीं हो पाया है या तकनीकी अथवा दस्तावेजी कारणों से मैप नहीं किया जा सका है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अनमैप्ड होने का अर्थ यह नहीं है कि मतदाता का नाम स्वत: मतदाता सूची से हट जाएगा। ऐसे मतदाताओं को केवल आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपना सत्यापन पूरा कराना होगा।

मतदाताओं के लिए सलाह
नोटिस मिलने पर उसे नजरअंदाज न करें।
उपलब्ध दस्तावेजों के साथ बीएलओ या एसआईआर केंद्र पर पहुंचें।
11 निर्धारित दस्तावेज नहीं होने पर आधार, राशन कार्ड या आयुष्मान कार्ड साथ ले जाएं।