दुग्ध विकास संगठन जबरन थोपे जा रहे चुनाव का करेगा विरोध : बिष्ट

Astitva Times Desk
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अल्मोड़ा/देहरादून। दुग्ध विकास संगठन के अध्यक्ष आनन्द सिंह बिष्ट ने कहा, दुग्ध सहकारिता के लिए सरकार द्वारा बार-बार बदले जा रहे नियमों से दुग्ध समितियों की प्रबंध कमेटियां अस्थिर हो रही हैं। जिसके चलते पांच वर्ष के लिए चुनी गयी कमेटियां एक वर्ष में ही भंग कर दी जाती हैं तथा एक वर्ष बाद ही उन समितियों में चुनाव थोप दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे नियमों के विरोध स्वरूप संगठन द्वारा समितियों की चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करने का आह्वान किया है।

प्रेस को जारी बयान में बिष्ट ने कहा कि सरकार के नीति-नियंता पर्वतीय क्षेत्रों की स्थिति से अवगत नहीं हैं इसलिए ऐसे नियम बना रहे हैं जिनसे आने वाले समय में पर्वतीय क्षेत्रों में दुग्ध समितियों में चुनाव नहीं हो पायेंगे तथा सहकारिता का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा। उन्होंने कहा कि विगत कुछ वर्षों में सरकार द्वारा प्रबंध कमेटी की सदस्यता के लिए आवेदन शुल्क में भी भारी वृद्धि कर दी है उसमें भी यदि चुनाव प्रतिवर्ष होने लगे तो कोई भी गरीब दुग्ध उत्पादक बार बार चुनाव में भागीदारी क्यों करना चाहेगा।

डेरी विकास द्वारा अपने बचाव के लिए समितियों से अपने खर्चे पर चुनाव करवाने के लिए प्रस्ताव भी मांगे जा रहे जो समितियों के साथ एक धोखा है। सरकार को चुनाव प्रक्रिया का पूरा खर्च सदस्यों के आवेदन शुल्क सहित स्वयं वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा एक सप्ताह के भीतर समितियों की चुनाव प्रक्रिया को पर्वतीय क्षेत्रों के अनुरूप नहीं बनाया जाता है तो दुग्ध विकास संगठन जबरन कराये जा रहे चुनावों का विरोध करेगा।

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