“अपहरण से फरारी तक: ‘सलीम खान’ से ‘सलीम वास्तिक’ बनने की पूरी कहानी, 26 साल बाद फिर गिरफ्तारी”

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जेल से बचने को धर्म – पहचान बदली….
फरारी काटने के दौरान उसे आईडिया मिला की यदि वह अपना धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म के खिलाफ जहर उगलेगा तो वह बचा रहेगा? ऐसा ही किया.. उसने सोशल मीडिया पर मुस्लिम धर्म को निशाने पर रखा। नतीजा यह हुआ की वह फेमस हो गया.. सोशल मीडिया से उसकी कमाई भी होने लगी।

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सलीम खान उर्फ सलीम वास्तविक एक शातिर किस्म का व्यक्ति है। सलीम को दिल्ली में वर्ष 1995 में हुए एक सनसनीखेज अपहरण और हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था और सलीम को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी। अब सलीम एक बार फिर कानून के शिकंजे में आ गया है। करीब तीन दशक पुराने इस मामले ने तब नया मोड़ लिया, जब आरोपी नई पहचान के साथ गाजियाबाद में सक्रिय पाया गया।

पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार समझें तो यह कहानी अपराध, फरारी और पहचान बदलकर समाज में घुल-मिल जाने की है।सब कुछ 20 जनवरी 1995 से शुरू हुआ, जब दिल्ली के एक व्यापारी के 13 वर्षीय बेटे संदीप का अपहरण कर लिया गया।अपहरणकर्ताओं ने फिरौती की मांग की, लेकिन रकम न मिलने पर बच्चे की निर्मम हत्या कर दी गई। इस घटना ने उस समय राजधानी में भारी आक्रोश पैदा किया था। मामले की जांच और सुनवाई के बाद वर्ष 1997 में दिल्ली की एक अदालत ने मुख्य आरोपी सलीम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, यह सजा लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सकी। वर्ष 2000 में सलीम पैरोल पर जेल से बाहर आया और इसके बाद वह फरार हो गया। फरारी के दौरान उसने अपनी पहचान छुपाते हुए गाजियाबाद में शरण ली।

शुरुआती समय में उसने कंस्ट्रक्शन के काम से जीवन यापन शुरू किया, लेकिन धीरे -धीरे उसने खुद की पहचान एक धार्मिक व्यक्ति की बनानी शुरू कर दी। स्थानीय स्तर पर उसकी पहचान बनने लगी और वह धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय हो गया। करीब सात साल पहले उसने अपनी असली पहचान को पूरी तरह छुपाने के लिए नाम बदलकर “सलीम वास्तिक” रख लिया। इस नई पहचान के साथ उसने डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी सहारा लिया। “Salim Vastik 007” नाम से एक यूट्यूब चैनल बनाकर वह सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर वीडियो पोस्ट करने लगा, जिससे उसकी पहचान और प्रभाव क्षेत्र बढ़ता गया।

हाल ही में गाजियाबाद में उस पर हुए एक हमले के बाद वह अचानक चर्चा में आया। इसी दौरान दिल्ली पुलिस को उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी दोबारा मिली। जांच में पुष्टि हुई कि “सलीम वास्तिक” वास्तव में वही फरार आरोपी सलीम खान है, जिसे 1997 में उम्रकैद की सजा मिली थी। जिसके बाद पुलिस ने उसकी स्थिति पर नजर रखी और उसके स्वास्थ्य में सुधार का इंतजार किया। जैसे ही स्थिति अनुकूल हुई, दिल्ली पुलिस की टीम गाजियाबाद पहुंची और उसे गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। अब आरोपी को अदालत में पेश किया जाएगा, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस गिरफ्तारी के साथ ही लगभग 30 साल पुराने मामले में एक बार फिर न्यायिक कार्रवाई तेज हो गई है।