उत्तराखण्ड भाजपा को बडा़ झटका: 2 विधायकों राजकुमार ठुकराल एवं धन सिंह नेगी ने छोडी़ पार्टी

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बगावत थामने के लिए तैयार भाजपा का डैमेज कंट्रोल प्लान बेअसर

देहरादून। भारतीय जनता पार्टी की ओर से विधानसभा चुनावों में बगावत थामने के लिए तैयार किया गया डैमेज कंट्रोल प्लान पूरी तरह बेअसर होता दिख रहा है। टिकट न मिलने से नाराज उत्तराखण्ड भाजपा के दो विधायकों ने बृहस्पतिवार को पार्टी छोड़ दी। रुद्रपुर से भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल ने टिकट नहीं मिलने पर भाजपा को अलविदा कह निर्दलीय चुनाव मैदान में कूदने का फैसला कर लिया है। पार्टी ने वहां से शिव अरोड़ा को प्रत्याशी बनाया है।

वहीं टिहरी सीट से पार्टी के विधायक धन सिंह नेगी भी आज भाजपा छोड़ कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। आज सुबह ही भाजपा ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को पार्टी की सदस्यता दिलाई है जो कि भाजपा से टिहरी सीट से प्रत्याशी होंगे! किशोर के भाजपा में शामिल होते ही धन सिंह ने भी देर ना करते हुए कांग्रेस पार्टी का हाथ थाम लिया। और वह कांग्रेस पार्टी से चुनाव मैदान में होंगे।

इसी प्रकार देहरादून की कैंट विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार रहे दिनेश रावत ने भी पार्टी को अलविदा कहते हुए आज निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कैंट विधानसभा सीट से निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया। इसके अलावा डोईवाला विधानसभा से पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के करीबी पूर्व प्रधान राहुल पवार ने भी निर्दलीय नामांकन भर दिया है।

दरअसल विधानसभा चुनावों से काफी पहले से ही भाजपा टिकट वितरण और संभावित बगावत रोकने के लिए काम कर रही थी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से इस संदर्भ में बूथ स्तर तक के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रणनीति बनाई गई थी। टिकट वितरण से पहले ही संभावित बगावत को नियंत्रित करने का फार्मूला तय हो गया था। विधानसभा प्रभारियों को ऐसे लोगों की पहचान कर उनको मनाने वाले प्रभावशाली कार्यकर्ताओं या नेताओं तक की सूची उपलब्ध कराने को कहा गया था।

यही नहीं टिकट वितरण से कुछ कुछ दिन पूर्व हुई चुनाव संचालन और कोर ग्रुप की बैठक के दौरान सांसदों को बगावत रोकने या डैमेज कंट्रोल को सुलझाने का जिम्मा दिया गया था।

लेकिन पार्टी की सूची आने के बाद दावेदार न केवल खुलकर टिकट वितरण पर ऐतराज जता रहे हैं बल्कि कई तो निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी तक कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि कुछ दावेदार तो पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों तक के फोन नहीं उठा रहे जिससे पार्टी की मुश्किल बढ़ सकती है। साथ ही पार्टी का डैमेज कंट्रोल प्लान भी धराशाही होता दिख रहा है। हालांकि पार्टी के पदाधिकारी इस संदर्भ में कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।

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