ग्राम पंचायतों में कौन बनेगा प्रशासक? प्रधान या एडीओ पंचायत पर जल्द होगा फैसला

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर न होने के कारण सरकार अब ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी में जुट गई है। पंचायतीराज विभाग ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिया है और माना जा रहा है कि मई महीने के अंत तक इस पर अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, प्रदेश में विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी कारणों से पंचायत चुनाव समय से नहीं कराए जा सके। ऐसे में ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई, क्षेत्र पंचायतों का 19 जुलाई तथा जिला पंचायतों का 11 जुलाई को खत्म होगा। कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति अनिवार्य हो जाएगी।

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, पंचायतीराज विभाग ने शासन के समक्ष दो प्रमुख विकल्प रखे हैं। पहला विकल्प यह है कि वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी सौंप दी जाए, ताकि पंचायतों के विकास कार्य और प्रशासनिक गतिविधियां बिना किसी व्यवधान के चलती रहें। दूसरा विकल्प एडीओ पंचायत (सहायक विकास अधिकारी पंचायत) को प्रशासक नियुक्त करने का है।

सरकार अब इन दोनों विकल्पों पर मंथन कर रही है। बताया जा रहा है कि 22 या 23 मई तक शासन स्तर पर इस संबंध में अंतिम फैसला लिया जा सकता है। हालांकि, फिलहाल जो संकेत मिल रहे हैं, उनके अनुसार मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाए जाने की संभावना अधिक दिखाई दे रही है।
प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 57,694 ग्राम प्रधान कार्यरत हैं। यदि सरकार इन्हें ही प्रशासक नियुक्त करती है तो पंचायतों के संचालन में निरंतरता बनी रहेगी। वहीं, एडीओ पंचायतों को जिम्मेदारी देने की स्थिति में प्रशासनिक नियंत्रण सीधे विभागीय अधिकारियों के हाथ में आ जाएगा। अब सभी की नजर शासन के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है, क्योंकि यह फैसला पंचायतों के प्रशासनिक ढांचे और ग्रामीण विकास कार्यों पर सीधा असर डालेगा।