पंजाबी महासभा के दोनों गुट एकजुट; संगठन को मजबूत बनाने पर मंथन

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देहरादून। उत्तरांचल पंजाबी महासभा की एक बैठक शनिवार को श्री गीता भवन मंदिर, राजा रोड, देहरादून में आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन के विस्तार, प्रदेश के विभिन्न जनपदों में नई इकाइयों के गठन, संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने तथा समाजहित में आगामी कार्ययोजना तैयार करना रहा। बैठक में उत्तराखंड प्रभारी एवं कोर कमेटी सदस्य सुभाष कोहली, राकेश ओबेरॉय, श्रीमती सविता ओबेरॉय तथा हरीश नारंग के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल रहे।

बैठक के प्रारंभ में संगठन की वर्तमान स्थिति, भविष्य की योजनाओं तथा उत्तराखंड के सभी जिलों में उत्तरांचल पंजाबी महासभा को सशक्त एवं सक्रिय बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि समाज की एकजुटता, युवाओं की भागीदारी तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों को प्राथमिकता देते हुए संगठन को गांव, नगर और जिला स्तर तक मजबूत किया जाएगा। इसके लिए प्रदेशभर में नई इकाइयों का गठन, सदस्यता अभियान तथा नियमित सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के दौरान एक सकारात्मक घटनाक्रम सामने आया। उत्तरांचल पंजाबी महासभा से अलग होकर नया गुट बनाने वाले पदाधिकारी बलदेव पराशर, जी.एस. आनंद तथा सरदार पी.एस. कोचर स्वयं बैठक में पहुंचे और उन्होंने सभा के समक्ष संगठन की एकता का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि समाज के व्यापक हित में अलग- अलग गुटों में कार्य करने के बजाय सभी को एक मंच पर आकर मिलकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य समाज को विभाजित करना नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर संगठन को मजबूत बनाना है। उनके इस प्रस्ताव का बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि संगठनात्मक एकता केवल संवैधानिक और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है। सभा में सर्वसम्मति से कहा गया कि यदि वास्तव में एकता स्थापित करनी है तो असंवैधानिक तरीके से गठित अलग गुट की सभी घोषणाओं एवं निर्णयों को निरस्त किया जाए और पूर्व में गठित मूल कोर कमेटी को सर्वोच्च मान्यता दी जाए।

बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि उत्तरांचल पंजाबी महासभा की मूल कोर कमेटी, जिसमें तिलक राज बेहड़, सरदार हरभजन सिंह चीमा, सुभाष कोहली, राकेश ओबेरॉय, राजकुमार अरोरा, प्रदीप सचदेवा, राजीव घई, दिनेश मानसेरा तथा जगदीश पाहवा शामिल हैं, की शीघ्र बैठक बुलाई जाए। इस बैठक में दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात रखें और कोर कमेटी जो भी निर्णय ले, उसे दोनों पक्ष अंतिम एवं सर्वोपरि मानते हुए पूर्ण रूप से स्वीकार करें। इस प्रस्ताव पर अलग गुट के प्रतिनिधियों ने भी अपनी सहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती और समाज के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए वे पुरानी कोर कमेटी के निर्णय को अंतिम रूप से स्वीकार करेंगे तथा उसके अनुरूप आगे की कार्रवाई करेंगे। दोनों पक्षों की इस सहमति को बैठक में उपस्थित सभी लोगों ने संगठनात्मक एकता की दिशा में एक ऐतिहासिक और सकारात्मक कदम बताया। सभा में मौजूद पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस प्रस्ताव का स्वागत किया।

वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि लंबे समय से चली आ रही संगठनात्मक दूरियां अब समाप्त होंगी और उत्तरांचल पंजाबी महासभा एक बार फिर पूरे प्रदेश में एक मजबूत, प्रभावी एवं सक्रिय सामाजिक संगठन के रूप में कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए सभी को व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर संगठन एवं समाजहित को सर्वोपरि रखना होगा। बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि पुरानी कोर कमेटी की बैठक शीघ्र अति शीघ्र आयोजित कर एकता के प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि संगठन का पुनर्गठन कर प्रदेशभर में सामाजिक, सांस्कृतिक एवं जनसेवा से जुड़े कार्यक्रमों को नई गति प्रदान की जा सके।

बैठक का सफल संचालन हरीश नारंग ने किया। उन्होंने सभी उपस्थित पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तरांचल पंजाबी महासभा सदैव समाज की एकता, भाईचारे और सेवा की भावना को सर्वोच्च प्राथमिकता देती रही है और भविष्य में भी इसी उद्देश्य के साथ कार्य करती रहेगी। बैठक में अनिल मारवाह, सरदार बलविंदर सिंह साहनी, गोपाल पुरी, आशीष नागरथ, सुनील मेसोन, संतोख नागपाल, नवनीत ओबेरॉय, सुनील विरमानी, हरीश कोहली, सरदार मेजर सिंह, सतीश कपूर, सुनील बांगा, सरदार गुरजिंदर सिंह, सरदार रविंद्र सिंह, नरेश चंडोक, अर्जुन कोहली, राजू गुलाटी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने संगठन की मजबूती और समाज की एकजुटता के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प दोहराया।