पिछले चुनाव में 10 में से 9 सीटें जीतने वाली भाजपा इस बार दून की सभी सीटों पर फंसी है कड़े मुकाबले में

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देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में अब केवल 48 घंटे का समय बचा है। आज शाम को चुनाव प्रचार भी थम जाएगा। वर्ष 2017 में देहरादून जिले में की 10 में से 9 सीटें जीत कर भाजपा ने रिकॉर्ड बनाया था। इस बार भाजपा जिले की सभी 10 सीटों पर फंसी हुई दिख रही है। यहां तक कि जिस रायपुर सीट से उमेश काऊ राज्य की सबसे बड़ी जीत दर्ज करने में कामयाब रहे थे वहां भी कांग्रेस भाजपा को जबरदस्त टक्कर देती हुई दिख रही है। आइए आपको देहरादून जिले की सभी 10 सीटों की वर्तमान स्थिति बताते हैं…

मसूरी विधानसभा
इस सीट पर भाजपा के सबसे सक्रिय विधायक माने जाने वाले गणेश जोशी तीसरी बार विधायक बनने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंके हुए हैं। गणेश जोशी को पूरे जिले में एकमात्र ऐसा विधायक माना जाता है जो कि 24 घंटे लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के साथ ही अपने कार्यकर्ताओं के सुख दुख में खड़े रहते हैं। कांग्रेस भी अपनी एकता के चलते पिछले 3 चुनाव में पहली बार सीधे मुकाबले में दिख रही है। कांग्रेस की प्रत्याशी गोदावरी थापली सीधे मुकाबले में हैं और भाजपा प्रत्याशी गणेश जोशी को अच्छी टक्कर भी दे रही हैं। टिकट के दावेदार रहे पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, मनमोहन सिंह मल्ल एवं युवा नेता नगर निगम पार्षद सुशांत बोरा भी तन मन से कांग्रेस प्रत्याशी गोदावरी थापली के लिए मेहनत कर रहे हैं। हालांकि इस सीट पर अभी भी बढ़त भाजपा की ही दिख रही है।

राजपुर रोड विधानसभा
इस सीट पर भाजपा ने एक बार फिर खजान दास पर दांव खेला है। माना जाता है कि 2017 की मोदी लहर में ये सीट भाजपा की झोली में आई थी। लोग कांग्रेस प्रत्याशी को 2017 में भी इस सीट पर जीता हुआ मान रहे थे। चुनाव हारने के बावजूद राजकुमार का क्षेत्र में सक्रिय रहना भी उन्हें फायदा पहुंचा रहा है और इस बार भी कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। भाजपा भी इस सीट को जीतने के लिए रात-दिन एक किए हुए है। क्षेत्रीय विधायक खजान दास को भी सरल स्वभाव का माना जाता है। परंतु राजपुर रोड क्षेत्र की अधिकतर खस्ताहाल सड़कें उनको सीधे सीधे नुकसान पहुंचाती दिख रही हैं। इस सबके बावजूद सीट पर मुकाबला अच्छा हो रहा है। आज की स्थिति में राजकुमार बढ़त में दिख रहे हैं।

कैंट विधानसभा
हरबंश कपूर के निधन के बाद ये सीट एकाएक रोचक हो गई है। कपूर की पत्नी सविता कपूर भाजपा के कैडर वोट के भरोसे मजबूती से मैदान में हैं तो कांग्रेस के धस्माना प्रेमनगर जैसे बड़े वोटर वाले इलाकों में बढ़िया बढ़त लेते दिख रहे। कुल मिलाकर इस बार सूर्यकान्त धस्माना ने भाजपा की इस परम्परागत सीट को हॉट बना दिया है और मुकाबला कड़ा दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी के बागी दिनेश रावत भी पहाड़ी वोटों के सहारे भाजपा के मतों में सेंध लगाते दिख रहे हैं। इस सीट पर दोनों ही पार्टियों से टिकट के दावेदारों की लंबी लाइन थी। यह दावेदार टिकट नहीं मिलने से कहीं ना कहीं अंदरखाने नाराज बताए जा रहे हैं। जो पार्टी अपने नाराज लोगों को मनाने में कामयाब हो जाएगी वहीं इस सीट पर जीत का परचम लहरा देगी।

रायपुर विधानसभा
उमेश काऊ इस सीट से रिकॉर्ड धारी हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से सबसे बड़े अंतर से जीतकर उमेश शर्मा काऊ ने पूरे प्रदेश में रिकॉर्ड बनाया था। लेकिन पुराने चावल यानि हीरा सिंह बिष्ट ने उनकी नाक में दम कर रखा है। ननुरखेड़ा में अपना गांव साधने से लेकर पुरानी नाते रिश्तेदारी निकालने से लेकर तिवारी सरकार में हुए कामकाज गिनाकर इस अनुभवी योद्धा ने मुकाबले को रोचक बनाया हुआ है। कहा तो ये भी जा रहा कि भाजपा की एक पूरी टीम इनके लिए काम कर रही है। काऊ केवल अपने काम और अपने लोगों के भरोसे मैदान में हैं। जिस प्रकार से कांग्रेस प्रत्याशी हीरा सिंह बिष्ट ने नेहरू कॉलोनी जैसे भाजपा के मजबूत गढ़ में सेंध लगाई है उसको देखते हुए इस सीट पर भाजपा को नुकसान होना तय माना जा रहा है। इस विधानसभा के मूल लोग जहां क्षेत्र में हुए अवैध अतिक्रमण से परेशान हैं। वहीं बस्ती वाले भी सत्ताधारी पार्टियों द्वारा मालिकाना हक़ दिए जाने के लॉलीपॉप से दुखी दिख रहे हैं। बस्ती वासियों का कहना है कि सरकार उन्हें वादा करने के बावजूद मालिकाना हक नहीं दे रही है। जिससे बस्ती वालों की इस नाराजगी का नुकसान भी सत्ताधारी पार्टी को उठाना पड़ सकता है।

धर्मपुर विधानसभा
धर्मपुर विधानसभा में भाजपा के बागी वीर सिंह पंवार ने भाजपा प्रत्याशी विनोद चमोली की नाक में दम क्या हुआ है। हालांकि ऐसा नहीं है कि वीर सिंह पंवार से सिर्फ विनोद चमोली को ही नुकसान हो रहा है। भाजपा नेता के साथ ही पहाड़ी प्रजामंडल के अध्यक्ष के रूप में क्षेत्र में लगातार रही उनकी सक्रियता भी उन्हें मजबूत स्थिति में लाकर खड़ा कर रही है। उन्होंने कई मुस्लिम क्षेत्रों में जबरदस्त पकड़ बनाकर कांग्रेस प्रत्याशी दिनेश अग्रवाल को भी अच्छा खासा परेशान किया हुआ है। इसके साथ ही समाजवादी पार्टी ने भी इस सीट पर मुस्लिम प्रत्याशी मोहम्मद नासिर को प्रत्याशी बनाया है। साथ ही मुस्लिम समाज में अच्छी खासी पकड़ रखने वाले एडवोकेट जावेद खान भी इस सीट पर किस्मत आजमा रहे हैं। जिसका सीधा सीधा नुकसान कांग्रेस प्रत्याशी दिनेश अग्रवाल को ही होने वाला है। ऐसा कहा जा रहा है कि पंवार चमोली के पहाड़ी वोटों में खूब सेंधमारी रहे हैं और चमोली भी मुँह खोलकर बहुत कुछ गंवाते दिख रहे हैं। खैर, इस सीट पर अभी तो चमोली बढ़त में दिख रहे हैं। लेकिन नतीजे चौंकाने वाले भी हो सकते हैं।

सहसपुर विधानसभा
इस सीट पर सीधी टक्कर भाजपा के सहदेव पुंडीर और कांग्रेस के आर्येन्दर शर्मा के बीच है। आर्येन्दर इस बार अपर हैंड तो हैं लेकिन भाजपा टीम ने इस सीट पर पूरा डेरा डाला हुआ है। एक मुस्लिम नेता का बयान भी इसी सीट के कारण देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि अपने समाज की शैक्षिक स्थिति को ऊंचा उठाने के लिए शैक्षिक संस्थान की मांग करना कोई गलत काम नहीं है। वैसे भी यह सरकारों की जिम्मेदारी बनती है कि पिछड़े हुए क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए शैक्षिक संस्थान खोले जाएं। जिससे कि देश 100% साक्षर हो सके। नेता जी ने यह बयान गलत समय पर दिया है ऐसा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है। साथ ही इस सीट पर लेफ्ट पार्टी से कामरेड कमरुद्दीन भी चुनाव लड़ रहे हैं जिसका नुकसान भी कांग्रेस प्रत्याशी आर्येंद्र शर्मा को हो सकता है।

विकासनगर विधानसभा
वर्ष 2017 की तरह यहां का चुनाव इस बार भी दोनों अनुभवी नेताओं के बीच है। इस सीट पर निष्क्रिय रहने के बावजूद कांग्रेसी नवप्रभात ने मुकाबले को टाइट बनाया हुआ है। सूत्र बता रहे हैं कि क्षेत्र में जनता एक बार फिर पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात को विधायक बनाने के मूड में दिख रही है। अंडर करंट चला तो इस सीट पर कुछ भी हो सकता है।

चकराता विधानसभा
ये पूरे जिले में एक मात्र ऐसी सीट है जहां लड़ाई नंबर एक पर नहीं बल्कि नंबर दो की चल रही है। प्रीतम जहां रामशरण के प्रत्याशी बनाने से बेफिक्र हैं तो निर्दलीय कमलेश भट्ट यहां मुकाबले में दूसरे नंबर की लड़ाई रामशरण से लड़ रहे हैं। यदि कमलेश भट्ट ऐसे ही 2 दिन और अपने चुनाव को संभाल ले गए तो बहुत संभव है कि भाजपा इस सीट पर तीसरे नंबर पर पिछड़े जाए।

डोईवाला विधानसभा
इस सीट पर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत की ख्याति भी दावं पर है। दरअसल, चुनाव तो भाजपा प्रत्याशी लड़ रहे हैं लेकिन इज्जत त्रिवेंद्र की दाव पर है। निर्दलीय जितेंद्र नेगी इस सीट पर अच्छा कर रहे हैं जबकि कांग्रेस प्रत्याशी चौधरी भी पूरा जोर लगाए हुए हैं। वैसे सीट से कांग्रेस ने यदि हेमा पुरोहित को टिकट दिया होता तो कांग्रेश के लिए इस सीट पर परचम लहराना कोई मुश्किल काम नहीं था। तमाम किंतु परंतु के बावजूद अभी इस सीट पर स्थिति भाजपा की मजबूत नजर आ रही है।

ऋषिकेश विधानसभा
इस सीट पर यूं तो भाजपा के प्रेमचंद अग्रवाल अब तक अपर हैंड हैं लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी से ज्यादा निर्दलीय।कनक धनै टेंशन देने का काम कर रहे हैं। यदि यहां कांग्रेस ने पूर्व कैबिनेट मंत्री शूरवीर सिंह सजवान को टिकट दिया होता तो बहुत संभव था कि इस सीट पर इस बार कांग्रेस का परचम लहरा जाता।

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