फर्जी तरीके से SIM खरीदना और बेचना पड़ेगा भारी; तीन साल की जेल के साथ ही 50 लाख का जुर्माना

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फर्जी पहचान से कनेक्शन लेने से लेकर गलत तरीके से जारी करने तक पर कानून की नजर, तीन साल की जेल के साथ ही 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान

नई दिल्ली। मोबाइल SIM कार्ड लेना अब महज एक सामान्य प्रक्रिया नहीं रह गई है। पहचान में थोड़ी सी भी गड़बड़ी या किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल कानूनी मुसीबत खड़ी कर सकता है। दूरसंचार अधिनियम के तहत धोखाधड़ी, छल या किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करके SIM कार्ड अथवा दूरसंचार पहचान हासिल करना दंडनीय अपराध है। दोष सिद्ध होने पर तीन वर्ष तक की जेल, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। कानून का उद्देश्य दूरसंचार सेवाओं में पहचान की विश्वसनीयता बनाए रखना और मोबाइल कनेक्शन के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना है। ऐसे में SIM लेने वाले उपभोक्ता के साथ-साथ उसे जारी करने की प्रक्रिया में शामिल लोगों के लिए भी सावधानी जरूरी हो जाती है।

किसी व्यक्ति को मोबाइल कनेक्शन की जरूरत है तो उसे अपनी सही पहचान और वैध दस्तावेजों के आधार पर ही SIM लेना चाहिए। किसी अन्य व्यक्ति के दस्तावेज का इस्तेमाल करना, गलत जानकारी देना या दूसरे व्यक्ति का रूप धारण करके कनेक्शन हासिल करना कानून के दायरे में आ सकता है। कई बार लोग सुविधा या किसी अन्य कारण से दूसरे व्यक्ति की पहचान पर SIM लेने की कोशिश करते हैं। ऐसी स्थिति में यह समझना जरूरी है कि मोबाइल नंबर किसके नाम पर है और उसका वास्तविक इस्तेमाल कौन कर रहा है। पहचान का गलत इस्तेमाल कर कनेक्शन हासिल करने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

मामला केवल SIM लेने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं है। SIM बेचने वाले दुकानदार, एजेंट या अन्य संबंधित व्यक्ति को भी निर्धारित पहचान प्रक्रिया का पालन करना होता है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर धोखाधड़ी या गलत पहचान के आधार पर SIM उपलब्ध कराने में मदद करता है, तो उसकी भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। इसलिए SIM विक्रेताओं के लिए जरूरी है कि वे ग्राहक की पहचान और कनेक्शन जारी करने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें। नियमों की अनदेखी कर गलत तरीके से कनेक्शन उपलब्ध कराने में सहयोग करना आगे चलकर कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है दूरसंचार अधिनियम में ऐसे अपराधों से जुड़े अन्य कृत्यों पर भी प्रावधान लागू होते हैं। उकसाना, अपराध का प्रयास करना या साजिश करना भी दंडनीय है। यानी फर्जी SIM हासिल करने की योजना बनाने या उसे अंजाम देने में सहयोग करने वालों की भूमिका भी जांच का विषय बन सकती है।

गलत पहचान पर जारी मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल धोखाधड़ी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में जिस व्यक्ति की पहचान पर नंबर जारी हुआ है, वह भी परेशानी में पड़ सकता है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं को अपने पहचान दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर सतर्क रहना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को पता चलता है कि उसकी जानकारी के बिना उसके नाम पर कोई मोबाइल कनेक्शन लिया गया है, तो उसे संबंधित दूरसंचार सेवा प्रदाता से संपर्क कर मामले की जानकारी लेनी चाहिए और आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।

सीधा संदेश यही है—SIM लेने में जल्दबाजी या किसी दूसरे की पहचान का इस्तेमाल भारी पड़ सकता है। सही पहचान, सही जानकारी और निर्धारित प्रक्रिया का पालन ही सुरक्षित रास्ता है। फर्जी तरीके से दूरसंचार पहचान हासिल करने पर कानून जेल और भारी जुर्माने दोनों का प्रावधान करता है।