कांग्रेस ने शहर की विभिन्न समस्याओं के समाधान को सौंपा नगरायुक्त को ज्ञापन

Astitva Times Desk
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देहरादून। महानगर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचन्द शर्मा के नेतृत्व में नगर निगम आयुक्त से मुलाकात कर नगर निगम देहरादून क्षेत्र की विभिन्न नागरिक समस्याओं के समाधान के संबंध में ज्ञापन प्रेषित करते हुए समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की।

ज्ञापन में पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचन्द शर्मा ने कहा कि शहर के 100 वार्डों में नागरिक सुविधाओं के संचालन एवं प्रबंधन की प्रमुख जिम्मेदारी निभाता है। किंतु तेजी से बढ़ती जनसंख्या, अनियोजित शहरीकरण तथा सीमित संसाधनों के कारण नगर निगम क्षेत्र में निवास करने वाले नागरिकों को अनेक गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ये समस्याएँ सीधे तौर पर शहरवासियों के दैनिक जीवन, स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा शहर के समग्र विकास को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देहरादून एक सुंदर पर्वतीय घाटी में स्थित शहर है, जो शिक्षा, पर्यटन एवं रोजगार के कारण निरंतर विस्तार कर रहा है। गांवों से शहर की ओर बढ़ते पलायन तथा अन्य राज्यों से लोगों के आगमन के कारण शहर की जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई है। नगर निगम के पास इस बढ़ती आबादी के अनुरूप आधारभूत ढांचे के विकास हेतु पर्याप्त योजनाओं एवं संसाधनों का अभाव दिखाई देता है, जिसके परिणामस्वरूप आवास, सड़क, जलापूर्ति, सीवर तथा कचरा प्रबंधन पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। नगर निगम देहरादून की सबसे गंभीर समस्याओं में ठोस कचरा प्रबंधन प्रमुख है। शहर में प्रतिदिन सैकड़ों टन कचरा उत्पन्न होता है, किंतु उसके संग्रहण, गीले-सूखे कचरे के पृथक्करण तथा वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था प्रभावी नहीं है। कई वार्डों में घर-घर कूड़ा उठाने वाली गाड़ियाँ कई दिनों तक नहीं पहुँचतीं। कूड़ा एकत्रीकरण केंद्रों एवं डस्टबिनों से भी समय पर कूड़ा उठान न होने के कारण सड़कों पर गंदगी, दुर्गंध एवं संक्रामक रोगों का खतरा बना रहता है, जिससे शहर की स्वच्छता, सुंदरता एवं पर्यटन छवि प्रभावित हो रही है।

लालचन्द शर्मा ने यह भी कहा कि नगर निगम के कई वार्डों में रिपीट चार्ज के टेंडर स्वीकृत एवं जारी हो चुके हैं, इसके बावजूद संबंधित कार्य आज तक धरातल पर प्रारंभ नहीं हुए हैं जो कि अत्यंत चिंताजनक है इससे नागरिक सुविधाएँ प्रभावित हो रही हैं तथा सरकारी धन के उपयोग, कार्य निष्पादन एवं ठेकेदारों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। इस विषय में संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करते हुए शीघ्र कार्य प्रारंभ कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में अतिक्रमण एवं जगह-जगह सड़कों की खुदाई के कारण यातायात व्यवस्था अत्यंत बदतर हो चुकी है। जर्जर सड़कों पर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। नगर निगम एवं अन्य विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्य बार-बार प्रभावित होते हैं। अतः संबंधित विभागों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।

पूर्व विधायक राजकुमार ने कहा कि देहरादून में सार्वजनिक भूमि, फुटपाथों, नालों एवं हरित क्षेत्रों पर अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। अतिक्रमण हटाने के अभियान प्रायः अस्थायी सिद्ध होते हैं और इनका प्रभाव अधिकतर गरीब एवं छोटे दुकानदारों पर पड़ता है। अतः एक ऐसी ठोस, मानवीय एवं स्थायी नीति बनाए जाने की आवश्यकता है, जिससे अतिक्रमण की समस्या का समाधान भी हो तथा गरीब व छोटे दुकानदारों का अहित भी न हो। उन्होंने कहा कि देहरादून को कभी “हरित नगरी” के रूप में जाना जाता था, किंतु आज तेज़ी से हो रही वृक्ष कटाई, अनियोजित निर्माण कार्य एवं बढ़ते प्रदूषण के कारण पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है। नगर निगम को हरित क्षेत्रों की रक्षा, पार्कों के रखरखाव तथा वायु-जल प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। इसके लिए एमडीडीए एवं अन्य संबंधित विभागों से समन्वय कर निर्माण नियमों का सख्ती से पालन, मास्टर प्लान का कठोर अनुपालन, अवैध निर्माण पर रोक तथा मलिन बस्तियों के स्थायी नियमितीकरण की नीति लागू की जाए। इसके अतिरिक्त, नगर निगम में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण व्यवस्थाएँ प्रभावित हो रही हैं। नए कर्मचारियों की नियुक्ति अत्यंत आवश्यक है। कई वार्डों में कूड़ा एकत्रीकरण की समुचित व्यवस्था न होने से आम नागरिकों को भारी परेशानी हो रही है। नगर निगम के पास घास काटने की मशीनें, उनके आवश्यक उपकरण, ब्लेड एवं घास काटने की तार उपलब्ध न होने से पार्कों, सड़क किनारों एवं सार्वजनिक स्थलों पर झाड़ -झंखाड़ फैल रही है।

लालचन्द शर्मा ने कहा कि शहर के सभी 100 वार्डों में पर्याप्त संख्या में नए स्ट्रीट लाइट पोल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, क्योंकि कई क्षेत्रों में प्रकाश व्यवस्था के अभाव में रात्रि के समय दुर्घटनाओं, चोरी एवं असामाजिक गतिविधियों की आशंका बनी रहती है।
इसके अतिरिक्त यह भी गंभीर विषय है कि मेयर निधि के अंतर्गत कई कार्यों के एस्टीमेट पूर्ण हो चुके हैं, किंतु अब तक टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की गई है, जिससे स्वीकृत विकास कार्य अनावश्यक रूप से लंबित पड़े हैं। इस संबंध में शीघ्र टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ कर कार्यों को धरातल पर उतारा जाना आवश्यक है। विभिन्न वार्डों से यह भी शिकायत मिल रही है कि वार्डों में अतिक्रमण बढता जा रहा है तथा पार्षदों द्वारा शिकायत करने के बावजूद अधिकारी कार्रवाई करने को तैयार नहीं हैं अधिकारियों का यह रवैया महानगर के लिए हानिकारक हो सकता है। साथ ही सिंगल -यूज़ प्लास्टिक पर सख्त प्रतिबंध, खुले नालों की ढकाई एवं नियमित सफाई, सड़कों का गुणवत्तापूर्ण निर्माण व नियमित मरम्मत, मानसून से पूर्व सड़कों का ऑडिट तथा जाम व पार्किंग समस्या के समाधान हेतु व्यस्त क्षेत्रों में मल्टी-लेवल पार्किंग निर्माण की दिशा में ठोस पहल की जाए।

शर्मा ने कहा कि उत्तरांचल पावर कॉरपोरेशन द्वारा कई वार्डों में केबल बिछाने के लिए खुदाई की गई है परन्तु विभाग द्वारा तोड़ी गई सडकों एवं नालियों की मरम्मत का कार्य करने से मना किया जा रहा है। अतः यूपीसीएल द्वारा उन सभी सडकों एवं नालियों की मरम्मत कराई जाय। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने नगर आयुक्त से उपरोक्त सभी बिंदुओं पर समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में पूर्व नेता प्रतिपक्ष नीनू सहगल, दीप बोहरा, पार्षद कोमल बोरा, संगीता गुप्ता, देवेन्द्र कौर, पार्षद अमित भंडारी, डॉ0 अरविन्द कुमार, पार्षद अभिषेक तिवारी, रौबिन त्यागी, पार्षद आयुष गुप्ता, प्रदेश सचिव कांग्रेस रमेश कुमार मंगू, सोम बाल्मीकि, पार्षद अनिल क्षेत्री, सुरेश कुमार, गुलशन कुमार, सुनील कुमार बांगा, विपिुल नौटियाल, अनुराग गुप्ता, महेन्द्र रावत, प्रकाश नेगी आदि शमिल थे।

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