आवासीय भवनों में कमर्शियल गतिविधियों पर MDDA का एक्शन; 150 को नोटिस, मसूरी में 71 निर्माण चिह्नित

Astitva Times Desk
8 Min Read

 

आवासीय नक्शे पर कारोबार करने वालों पर बढ़ी सख्ती, स्वीकृत मानचित्र और भू-उपयोग की हो रही पड़ताल

देहरादून। राजधानी देहरादून में आवासीय भवनों में नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों के खिलाफ मसूरी -देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने कार्रवाई तेज कर दी है। देहरादून में करीब 150 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जाने के साथ ही मसूरी में एक दिन के सर्वे के दौरान 71 निर्माण चिह्नित किए जाने और एक होटल के 12 कमरों व बेसमेंट को सील किए जाने की खबरों ने इस अभियान को लेकर हलचल बढ़ा दी है।
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, प्राधिकरण आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवनों में चल रही दुकानों, रेस्टोरेंट, होटलों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की जांच कर रहा है। मसूरी में 200 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट भी जांच के संभावित दायरे में बताए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, MDDA ने आवासीय नक्शे पर दुकान, रेस्टोरेंट या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित करने के मामलों में करीब 150 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए हैं।प्राधिकरण की टीमें विभिन्न सेक्टरों में मौके पर पहुंचकर स्वीकृत भवन मानचित्र और वास्तविक निर्माण का मिलान कर रही हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि भवन का इस्तेमाल उस भू-उपयोग के अनुरूप है या नहीं, जिसके लिए उसे मंजूरी दी गई थी। MDDA उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अनुसार नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है और जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा।

मसूरी में सर्वे के दौरान सामने आए आंकड़े भी अभियान की गंभीरता को दर्शाते हैं। MDDA के सहायक अभियंता अजय मलिक ने मसूरी प्रेस क्लब में सर्वे की जानकारी साझा की। रिपोर्ट के मुताबिक, एक दिन में 71 निर्माण चिह्नित किए गए। जिनमें से 51 के खिलाफ पहले से कार्रवाई की प्रक्रिया विचाराधीन बताई जबकि 20 निर्माण के स्वीकृत भवन मानचित्र मौके पर प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इनके संबंध में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। एक रिपोर्ट के अनुसार, मसूरी में 200 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट जांच के दायरे में लाए जाने की संभावना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जांच केवल भवन के नक्शे तक सीमित नहीं है, बल्कि भवन निर्माण उपविधियों, अग्नि सुरक्षा मानकों और पर्यावरण संबंधी नियमों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। मसूरी में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ भवनों के उपयोग, निर्माण की अनुमति और सुरक्षा मानकों का सवाल महत्वपूर्ण हो गया है। प्राधिकरण की जांच में यह देखा जाना है कि संबंधित प्रतिष्ठानों के पास आवश्यक स्वीकृतियां हैं या नहीं और उनका संचालन लागू नियमों के अनुरूप हो रहा है या नहीं। हालांकि, 200 से अधिक होटल-रेस्टोरेंट का आंकड़ा जांच के संभावित दायरे से संबंधित है। इसे अवैध घोषित किए गए प्रतिष्ठानों या सील किए गए होटलों की संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

होटल के 12 कमरे और बेसमेंट सील
मसूरी में कार्रवाई का एक उदाहरण 8 अक्टूबर को सामने आया, जब MDDA ने गांधी चौक के निकट स्थित होटल अतिथि के 12 कमरे और बेसमेंट सील किए। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित भवन में कुल 18 कमरे और एक बेसमेंट था। कार्रवाई के समय छह कमरों में मेहमान ठहरे हुए थे, जबकि 12 खाली कमरों को सील किया गया। शेष हिस्से के संबंध में आगे की कार्रवाई खाली होने के बाद किए जाने की बात कही गई थी। यह कार्रवाई संयुक्त सचिव के आदेश के बाद की गई।
अधिकारियों के अनुसार, भवन में अनधिकृत निर्माण से संबंधित रिकॉर्ड और पहले जारी आदेश कार्रवाई का आधार बने। यह मामला केवल सर्वे या नोटिस तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें भवन के कुछ हिस्सों को वास्तव में सील किया गया। हालांकि, यह कार्रवाई अनधिकृत निर्माण से संबंधित थी; इसे बिना अतिरिक्त प्रमाण के केवल आवासीय भवन में व्यावसायिक गतिविधि चलाने के मामले के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी निगरानी
आवासीय क्षेत्रों में अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने 25 मार्च 2026 को Loganathan बनाम State of Tamil Nadu एवं अन्य मामले में चिंता जताई थी। आदेश में आवासीय कॉलोनियों को नियमों के विपरीत व्यावसायिक क्षेत्रों में बदलने और भू-उपयोग संबंधी नियमों के उल्लंघन के मुद्दे पर ध्यान दिया गया। इसी कानूनी पृष्ठभूमि में देहरादून और मसूरी में स्वीकृत मानचित्रों तथा वास्तविक उपयोग की जांच को गति मिली है।

ऋषिकेश और पछुवादून तक जांच का दायरा
MDDA की जांच देहरादून शहर के विभिन्न सेक्टरों के साथ मसूरी, ऋषिकेश और पछुवादून तक बढ़ाए जाने की रिपोर्ट है। इस दौरान भवनों के स्वीकृत नक्शे, निर्माण की वास्तविक स्थिति और मौजूदा उपयोग का मिलान किया जा रहा है। जांच में अनियमितता की आशंका सामने आने पर संबंधित भवन स्वामियों से दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगे जा सकते हैं। इसके बाद उपलब्ध रिकॉर्ड और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

क्या हर दुकान, होटल या रेस्टोरेंट पर होगी कार्रवाई?
केवल किसी आवासीय भवन में व्यावसायिक गतिविधि चलने के आधार पर हर मामले को स्वतः अवैध निर्माण के दायरे में नहीं लाया जा सकता। यह देखना जरूरी है कि संबंधित क्षेत्र में किस प्रकार का उपयोग अनुमन्य है, भवन के लिए क्या स्वीकृति मिली है और क्या आवश्यक अनुमति या वैध उपयोग परिवर्तन कराया गया है। संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलना चाहिए। उल्लंघन साबित होने पर ही लागू कानूनों के अनुसार आगे की कार्रवाई का निर्णय किया जाएगा।

अब आगे क्या?
अभी तक सामने आए आंकड़े बताते हैं कि MDDA ने आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अनधिकृत निर्माण से जुड़े मामलों की जांच तेज की है। देहरादून में 150 प्रतिष्ठानों को नोटिस, मसूरी में 71 निर्माणों की पहचान और होटल अतिथि के कुछ हिस्सों की सीलिंग इस अभियान के अलग-अलग पहलू हैं। अब महत्वपूर्ण होगा कि नोटिसों के जवाब, भवनों के दस्तावेज और मौके पर की गई जांच के बाद कितने मामलों में नियमों का उल्लंघन साबित होता है तथा किन मामलों में सीलिंग, ध्वस्तीकरण या अन्य कार्रवाई की जाती है।
फिलहाल स्पष्ट संदेश यही है कि भवन का स्वीकृत नक्शा, निर्धारित भू-उपयोग और आवश्यक अनुमतियां महत्वपूर्ण हैं। लेकिन किसी प्रतिष्ठान को अवैध घोषित करने या उसके खिलाफ अंतिम कार्रवाई करने से पहले संबंधित मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!