दिल्ली होटल में आग लगने से एक ही परिवार के 8 सदस्यों समेत 21 की मौत

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज रानी इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने राजधानी को झकझोर कर रख दिया। पांच मंजिला होटल ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ में लगी विनाशकारी आग में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 19 से अधिक लोग घायल या झुलस गए हैं। घायलों में नौ की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। मृतकों में गुरुग्राम के एक ही परिवार के आठ सदस्य और कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार होटल में भयंकर आग लगी। देखते ही देखते आग और जहरीले धुएं ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। होटल की संकरी संरचना, एकमात्र प्रवेश-निकास मार्ग और कथित सुरक्षा खामियों के कारण दर्जनों लोग अंदर फंस गए। स्थानीय लोगों, पुलिस और दमकल विभाग ने संयुक्त रूप से बड़े बचाव अभियान को अंजाम देते हुए लगभग 40 लोगों को बाहर निकाला। सभी को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां 21 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया।

मैक्स अस्पताल प्रशासन के अनुसार वहां 39 लोगों को लाया गया, जिनमें से 18 को मृत घोषित किया गया। 15 घायलों को आईसीयू में भर्ती किया गया है, जिनमें आठ वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। कई लोग धुएं से दम घुटने, गंभीर जलन और ऊंचाई से कूदने के कारण फ्रैक्चर जैसी चोटों से पीड़ित हैं। एम्स में 13 घायलों का उपचार जारी है। इनमें तीन लोग इमारत से कूदने के दौरान घायल हुए, जबकि 10 लोग बचाव अभियान में शामिल रहते हुए घायल हुए।

प्रारंभिक जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार होटल को दिल्ली सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट नीति के तहत केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति मिली थी, जबकि मौके पर 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे। इतना ही नहीं, बेसमेंट में भी अवैध रूप से कमरे बनाए गए थे।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि होटल के पास वैध फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) था या नहीं।अधिकारियों ने बताया कि इमारत में आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता था। आग लगने के बाद यह मार्ग धुएं और लपटों से भर गया, जिससे अंदर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल सके। होटल में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पांच ऊपरी मंजिलें थीं। भूतल पर रेस्तरां संचालित था, जबकि बाकी हिस्से का उपयोग होटल के रूप में किया जा रहा था।

जान बचाने के लिए तीसरी मंजिल से कूदे लोग
प्रत्यक्षदर्शियों ने भयावह मंजर का वर्णन करते हुए बताया कि लोग खिड़कियों के शीशे तोड़कर मदद की गुहार लगा रहे थे। स्थानीय निवासियों ने सड़क पर गद्दे बिछाकर लोगों की जान बचाने की कोशिश की।
एक महिला अपने बच्चे को गोद में लेकर तीसरी मंजिल से कूद गई। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बेसमेंट का दरवाजा बंद था, जिसे खोलने में 20 मिनट से अधिक समय लग गया, जिससे स्थिति और विकराल हो गई।पुलिस ने होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां आग लगने के वास्तविक कारण, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन, अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही की सभी संभावित कड़ियों की जांच कर रही हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। केंद्र और दिल्ली सरकार ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं। कई शव इतने बुरी तरह झुलस चुके हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। अस्पतालों के बाहर परिजनों की भारी भीड़ जुटी हुई है। डीएनए जांच और अन्य प्रक्रियाओं के जरिए मृतकों की पहचान की जा रही है।

यह हादसा राजधानी दिल्ली में अवैध निर्माण, फायर सुरक्षा नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक निगरानी की विफलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। दिल्ली सरकार, एमसीडी और अन्य संबंधित एजेंसियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान पूरा हो चुका है, लेकिन इस दर्दनाक त्रासदी ने कई परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया है। जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जो इस हादसे के जिम्मेदार लोगों को बेनकाब करेगी। प्रशासन ने मृतकों की संख्या 21 होने की पुष्टि की है। कई घायलों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। फायर एनओसी, अवैध निर्माण और होटल संचालन में नियमों के उल्लंघन को लेकर जांच तेज कर दी गई है।