सहारनपुर। देश के बहुप्रचारित और महत्वाकांक्षी देहरादून- दिल्ली एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। एक्सप्रेसवे के बिहारीगढ़ क्षेत्र के पास सड़क धंसने की घटना ने न केवल निर्माण कार्य की मजबूती पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे का लोकार्पण हुए अभी एक महीना भी नही हुआ है, लेकिन लगातार सामने आ रही खामियां परियोजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के अनुसार, बिहारीगढ़ के पास सड़क दो स्थानों पर अचानक धंस गई, जिससे वहां से गुजरने वाले वाहनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए निर्माण कंपनी ने तत्काल मौके पर जेसीबी मशीनें लगाकर मरम्मत कार्य शुरू कराया और सुरक्षा के लिहाज से एक तरफ की दो लेन बैरिकेडिंग कर बंद कर दी गईं। और एक साइड से ही ट्रैफिक चलाया गया।
गौरतलब है कि इससे पहले भी इसी एक्सप्रेसवे पर बिहारीगढ़ फ्लाईओवर की दीवार में दरारें आने का मामला सामने आया था। उस समय पुल के ढांचे को एंकर प्लेट्स के सहारे टिकाया गया था। अब सड़क धंसने की नई घटना ने निर्माण एजेंसियों की कार्य गुणवत्ता पर लोगों का भरोसा डगमगा दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अभी मानसून पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है, फिर भी सड़क की यह हालत हो गई। ऐसे में बारिश के दौरान हालात और भयावह हो सकते हैं। लोगों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते मजबूत और स्थायी समाधान नहीं किया गया तो बड़ा हादसा हो सकता है।
बड़गांव क्षेत्र के दलहेड़ी फ्लाईओवर के पास भी मिट्टी कटाव और गहरे गड्ढों की समस्या सामने आई है। लगातार वाहनों के दबाव और कमजोर भराव सामग्री के कारण फ्लाईओवर के किनारों की मिट्टी बहने लगी है, जिससे सड़क की मजबूती प्रभावित हो रही है।
निर्माण कंपनी के साइट इंजीनियर करण सिंह के अनुसार सड़क की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है और जल्द ही इसे पूरी तरह दुरुस्त कर यातायात सामान्य कर दिया जाएगा। हालांकि लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों ने एक्सप्रेसवे निर्माण की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने 210 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया गया था। यह परियोजना उत्तराखंड और दिल्ली के बीच यात्रा को तेज और सुगम बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई थी, लेकिन उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सामने आने वाली खामियां अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विश्वसनीयता पर असर डाल रही हैं।

देहरादून। देश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पित इस एक्सप्रेसवे के तहत बिहारीगढ़ कस्बे में बने फ्लाईओवर की दीवार में 10 दिनों के अंदर ही दरार पड़ गई।
जानकारी के अनुसार, फ्लाईओवर की रिटेनिंग वॉल में आई दरार धीरे-धीरे चौड़ी होती गई, जिससे दीवार में झुकाव भी आ गया। स्थानीय लोगों ने इस पर चिंता जताते हुए संबंधित विभाग को सूचना दी। मामले की जानकारी मिलने पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और कार्यदायी संस्था की टीम मौके पर पहुंची। दीवार को गिरने से बचाने के लिए लगभग 20 एंकर प्लेट्स लगाई गईं। फिलहाल इसे अस्थायी उपाय माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर एंकर प्लेट्स का उपयोग पुरानी या कमजोर हो चुकी संरचनाओं को सहारा देने के लिए किया जाता है। नई बनी दीवार में इसका प्रयोग निर्माण या डिजाइन संबंधी खामी की ओर संकेत करता है। करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने 213 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, शुरुआती दिनों में ही सामने आई इस घटना ने निर्माण गुणवत्ता, निगरानी और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं स्थानीय लोगों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच और स्थायी समाधान की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका को टाला जा सके।












