देहरादून। राजधानी देहरादून में कब्रिस्तान को लेकर उपजा विवाद अब गंभीर सामाजिक मुद्दे का रूप लेता जा रहा है। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा मुस्लिम समुदाय के शवों को कब्रिस्तान में दफनाने से रोका जा रहा है, जिससे शहर के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में गहरा आक्रोश फैल गया है। इस घटनाक्रम ने न केवल संवेदनशीलता को झकझोरा है, बल्कि सामाजिक सौहार्द पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक या स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से समुदायों के बीच दरार डालने की कोशिश हो सकती है। आशंका जताई जा रही है कि वक्फ भूमि पर पहले से कब्जा जमाए कुछ लोग इस तरह के विवाद खड़े कर अपने हित साधना चाहते हैं और अतिक्रमण को बढ़ावा देना चाहते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक प्रतिनिधियों का एक शिष्टमंडल कैबिनेट मंत्री खजान दास से मिला।
प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी धर्म में अंतिम संस्कार की गरिमा सर्वोपरि होती है और इसे बाधित करना मानवता के खिलाफ है। प्रतिनिधिमंडल में उत्तराखंड बार काउंसिल की सदस्य एडवोकेट रज़िया बेग, लताफत हुसैन, इनाम अली, इमरान अहमद, हर्षपति, इब्राहिम खान, सादिक और सैयद मिराज मेहंदी सहित कई प्रमुख लोग शामिल रहे।
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द उच्च स्तरीय बैठक बुलाने का आश्वासन दिया है। साथ ही उन्होंने जिलाधिकारी देहरादून को पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस विवाद ने प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती खड़ी कर दी है। अब नजरें प्रशासनिक कार्रवाई और आने वाले फैसलों पर टिकी हैं।











