मजदूर संगठनों ने की लाल पुल हादसे में मृत मजदूरों के परिजनों को सहायता राशि देने की मांग

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देहरादून। राजधानी देहरादून के लाल पुल पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे को लेकर चेतना आंदोलन और उत्तराखंड नव निर्माण मजदूर संघ ने राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठनों का कहना है कि वर्षों से मजदूरों के लिए सुरक्षित एवं निर्धारित स्थान की मांग की जा रही थी, लेकिन सरकार की अनदेखी और लापरवाही के कारण दो मजदूरों की जान चली गई, जबकि कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल होकर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। मुख्यमंत्री एवं श्रम मंत्री के नाम जारी एक पत्र में संगठनों ने कहा कि लाल पुल क्षेत्र में एक निजी बस ने सड़क किनारे खड़े पांच मजदूरों को कुचल दिया। इस हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि अन्य घायल मजदूर अस्पताल में उपचाराधीन हैं।

संगठनों ने कहा कि पिछले लगभग 13 वर्षों से शहर के दिहाड़ी मजदूर यह मांग उठाते आ रहे हैं कि विभिन्न चौकों और मजदूर एकत्रीकरण स्थलों पर उनके लिए सुरक्षित और निर्धारित स्थान उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे रोजगार की प्रतीक्षा के दौरान सड़क किनारे खड़े होने को मजबूर न हों। उनका आरोप है कि इस संबंध में कई बार प्रशासन और सरकार को ज्ञापन दिए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ वर्ष पहले केंद्र सरकार की ओर से निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड को निर्देश दिए गए थे कि मजदूरों के लिए चौकों पर छाया, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की जाए। इसके बावजूद देहरादून के किसी भी प्रमुख चौक पर ऐसी सुविधाएं विकसित नहीं की गई हैं।

मजदूर संगठनों ने श्रम विभाग और निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हाल ही में मजदूर पंजीकरण की प्रक्रिया में किए गए बदलावों से वास्तविक निर्माण मजदूरों के लिए पंजीकरण और अधिक कठिन हो गया है। इससे बड़ी संख्या में मजदूर सरकारी योजनाओं और कल्याणकारी सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं।चेतना आंदोलन और उत्तराखंड नव निर्माण मजदूर संघ का कहना है कि शहर के विकास और निर्माण कार्यों की नींव मजदूरों की मेहनत पर टिकी है, लेकिन सरकार उनकी सुरक्षा और बुनियादी जरूरतों के प्रति संवेदनशील नहीं दिखाई दे रही है। संगठनों ने दावा किया कि यदि मजदूरों के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराए गए होते तो लाल पुल जैसी दुर्घटना को रोका जा सकता था।

मजदूर संगठनों ने सरकार से मृतक मजदूरों के परिवारों को तत्काल 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने, घायल मजदूरों के इलाज का पूरा खर्च वहन करने तथा उनके परिवारों को एक वर्ष की दिहाड़ी के बराबर आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है। इसके अलावा देहरादून के सभी प्रमुख चौकों से 200 मीटर के भीतर मजदूरों के लिए निर्धारित स्थल विकसित कर वहां छत, शौचालय और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा मजदूर पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने की भी मांग की गई है।

देहरादून। राजधानी देहरादून के पटेल नगर थाना क्षेत्र स्थित लालपुल क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। जहां एक सिटी बस अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे चल रहे लोगों को कुचलते हुए आगे बढ़ गई। हादसे में छह से अधिक लोग घायल हो गए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सिटी बस अपने निर्धारित मार्ग पर सामान्य रूप से चल रही थी। इसी दौरान चालक की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिससे वह वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। अनियंत्रित बस सड़क किनारे पैदल जा रहे लोगों की ओर मुड़ गई और कई लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। सूचना मिलते ही पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीम मौके पर पहुंची तथा घायलों को उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायल लोगों का इलाज जारी है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बस चालक को वाहन चलाते समय अचानक दौरा पड़ा था, जिसके कारण यह हादसा हुआ। हालांकि पुलिस ने चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और उसके स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
पटेलनगर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस बस की तकनीकी स्थिति, चालक की स्वास्थ्य स्थिति और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर घटना की विस्तृत जांच कर रही है। फिलहाल किसी के मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। वहीं, इस हादसे के बाद सार्वजनिक परिवहन वाहनों के चालकों की नियमित स्वास्थ्य जांच को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।