चांदी आयात नियमों में बड़ा बदलाव: बिना सरकारी मंजूरी नहीं मंगाई जा सकेगी सिल्वर बार

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नई दिल्ली। भारत सरकार ने चांदी (Silver) के आयात नियमों में बड़ा और सख्त बदलाव करते हुए सिल्वर बार के आयात को अब “Free” श्रेणी से हटाकर “Restricted” श्रेणी में डाल दिया है। यह फैसला Directorate General of Foreign Trade और Ministry of Commerce and Industry द्वारा जारी अधिसूचना के माध्यम से लागू किया गया है।सरकार के इस फैसले के बाद अब सिल्वर बार का आयात पहले की तरह खुला नहीं रहेगा। आयातकों को अब सरकार से विशेष अनुमति लेनी होगी और तय नियमों एवं शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ITC (HS) Code 71069221 और 71069229 के अंतर्गत आने वाली सिल्वर बार पर यह नया नियम लागू होगा। इसमें शामिल हैं:
99.9% या उससे अधिक शुद्धता वाली सिल्वर बार
अन्य श्रेणी की सिल्वर बार
पहले इन उत्पादों का आयात RBI नियमों के तहत बिना किसी विशेष अनुमति के किया जा सकता था, लेकिन अब इन्हें “Restricted Category” में डाल दिया गया है।

पुरानी व्यवस्था (Old Policy)
सिल्वर बार आयात “Free” श्रेणी में था
आयातकों को अलग से सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं थी
सामान्य नियमों के तहत आयात संभव था
नई व्यवस्था (New Policy)
आयात नीति अब “Restricted” कर दी गई है
सरकार की पूर्व अनुमति लेना जरूरी होगा
Chapter 71 की Policy Condition No. 7 का पालन अनिवार्य रहेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार सरकार का उद्देश्य चांदी के अनियंत्रित आयात पर लगाम लगाना, विदेशी मुद्रा संतुलन बनाए रखना और घरेलू बाजार की निगरानी को मजबूत करना है। लगातार बढ़ते आयात और बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस फैसले का सीधा असर सर्राफा कारोबार, बुलियन ट्रेड और औद्योगिक उपयोग पर पड़ सकता है।

संभावित प्रभाव:
सिल्वर आयात प्रक्रिया अब अधिक नियंत्रित होगी
आयातकों की लागत और औपचारिकताएं बढ़ सकती हैं
बाजार में सप्लाई प्रभावित होने से कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव
घरेलू चांदी बाजार में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ेगी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में इसका असर चांदी की उपलब्धता, प्रीमियम और रिटेल कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अधिसूचना संख्या 14/2025- 26, दिनांक 09 मई 2025 के तहत यह निर्णय लागू किया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है और भारत में चांदी की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।

 

देहरादून में सराफ व्यापारियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “सोना नहीं खरीदने” की अपील के विरोध में निकाले जा रहे केंडल मार्च को अब कांग्रेस का भी खुला समर्थन मिल गया है। कांग्रेस महानगर व्यापार प्रकोष्ठ ने इस आंदोलन को व्यापारियों की जायज आवाज बताते हुए कहा कि सरकार को व्यापार और बाजार व्यवस्था को प्रभावित करने वाले फैसलों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

 

कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने कहा कि सराफ व्यापारियों की चिंाएं पूरी तरह उचित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की लगातार बदलती नीतियों और बयानों से व्यापारियों के बीच असमंजस और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है। शर्मा ने कहा कि कांग्रेस हमेशा छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों के साथ खड़ी रही है और देहरादून के सराफ व्यापारियों द्वारा निकाले जा रहे शांतिपूर्ण केंडल मार्च का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए, जिनका सीधा असर बाजार और व्यापार पर पड़े।

पूर्व विधायक राजकुमार ने भी व्यापारियों के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ छोटे व्यापारी और कारोबारी हैं, लेकिन केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण व्यापारी वर्ग लगातार दबाव महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि सोने के व्यापार से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका इस कारोबार पर निर्भर है और सरकार को उनकी भावनाओं और समस्याओं को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस व्यापारियों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की लड़ाई में मजबूती से उनके साथ खड़ी है।

 

कांग्रेस महानगर व्यापार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सुनील बांगा ने कहा कि सराफ व्यापारियों का केंडल मार्च लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को बार-बार आर्थिक दबाव और अनिश्चितता में डालने वाली नीतियों से बाजार व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बांगा ने कहा कि कांग्रेस महानगर व्यापार प्रकोष्ठ इस आंदोलन को पूर्ण समर्थन देता है और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी इसमें शामिल होंगे। उन्होंने सरकार से व्यापारी हितों को ध्यान में रखते हुए संवाद स्थापित करने की मांग की।

इस दौरान व्यापारी नेता और कारोबारी वर्ग के कई लोग मौजूद रहे, जिनमें मनीष गर्ग, वीरेंद्र बिष्ट, हिमांशु बिष्ट, आमिर खान, रजत कुमार, प्रवीण बांग्ला, राम कपूर, अजीत सिंह, चमन लाल, गुरुनेन सिंह, असरेज अली, दीक्षांत कुमार, शाहिद सिद्दीकी, महेश राशिद, राज, पप्पू सिंह, आमिर मुन्ना, महेश शंकर, राजू, आबिद, सागर, राजकुमार, अमजद, जुनैद और राजेंद्र सिंह घई सहित अन्य व्यापारी शामिल रहे।

कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि व्यापारियों की समस्याओं को नजरअंदाज करना देश की अर्थव्यवस्था और बाजार व्यवस्था दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को व्यापारियों के साथ संवाद कर उनकी आशंकाओं का समाधान निकालना चाहिए, ताकि बाजार में विश्वास और स्थिरता बनी रहे।