ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की इजरायली हमले में मौत, पाक के खिलाफ जाकर भारत से निभाई थी दोस्ती

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खामेनेई का जाना भारत के लिए झटका?
अयातुल्लाह खामेनेई वह वैश्विक नेता थे जो हर बार आर्थिक और रणनीतिक मामलों में भारत का साथ देते थे। उनके कार्यकाल में ईरान ने भारत के साथ सहयोग को प्राथमिकता दी।

एजेंसी
नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान के सरकारी मीडिया ने भी खामेनेई की मौत की पुष्टि कर दी है। साथ ही इन हमलों में उनके परिवार के कई सदस्य मारे गए हैं। खामेनेई की बेटी, पोता, दामाद और बहू की मौत हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई की मौत का दावा किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर लिखा, “इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक, खामेनेई की मौत हो गई है। वह हमारे इंटेलिजेंस और बहुत एडवांस्ड ट्रैकिंग सिस्टम से बच नहीं पाया और इजरायल के साथ मिलकर काम करते हुए, वो या उसके साथ मारे गए दूसरे नेता कुछ भी नहीं कर सके।

अयातुल्लाह खामेनेई वह वैश्विक नेता थे जो हर बार आर्थिक और रणनीतिक मामलों में भारत का साथ देते थे। उनके कार्यकाल में ईरान ने भारत के साथ सहयोग को प्राथमिकता दी। उन्होंने ही भारत को चाबहार पोर्ट विकसित करने की अनुमति दी थी। यह पोर्ट भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है (पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच)। साल 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा पर खामेनेई ने मोदी से मुलाकात की और भारत के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंधों की तारीफ की थी।

आर्थिक संबंध मजबूत करने की वकालत
अयातुल्लाह खामेनेई ने कई बार कहा कि ईरान को भारत, चीन और रूस जैसी आर्थिक शक्तियों के साथ व्यापार बढ़ाना चाहिए। 2025 में अमेरिकी टैरिफ के दबाव में उन्होंने स्पष्ट रूप से भारत के साथ मजबूत आर्थिक रिश्तों की बात की थी। इसके अलावा वह भारत की संस्कृति, यहां के लोगों और इतिहास को चाहते थे।

ईरान के सात वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए
इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और इसमें उसके सात वरिष्ठ अधिकारी मारे गए हैं। जिन अधिकारियों को मारा गया है, उनमें अली शामखानी, मोहम्मद पाकपुर, सालेह असदी, मोहम्मद शिराजी, अजीज नासिरजादेह, होसैन जबल अमेलियन, रेजा मोजाफरी-निया शामिल है। आईडीएफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “आईएएफ लड़ाकू विमानों ने ईरान भर में सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिसमें ईरानी रक्षा नेतृत्व के 7 वरिष्ठ अधिकारी मारे गए: अली शमखानी, मोहम्मद पाकपुर, सालेह असादी, मोहम्मद शिराज़ी, अज़ीज़ नासिरज़ादेह, हुसैन जबल अमेलियन और रज़ा मुज़ाफ़्फ़री-निया। उनके बिना दुनिया एक बेहतर जगह है।”

अयातुल्लाह अली खामेनेई कौन थे?
अयातुल्लाह अली खामेनेई का जन्म 1939 में उत्तरी ईरानी शहर मशहद में हुआ था। खामेनेई ने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए 1958 से 1964 तक धार्मिक अध्ययन किया और फिर 1962 में ईरान के शाह के खिलाफ अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के आंदोलन में शामिल हो गए। शाह के शासनकाल में कई बार जेल में डाले जाने के बाद, खामेनेई 1979 की क्रांति में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे। उन्होंने 1981 से 1989 तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया और ईरान-इराक युद्ध के दौरान ईरान का नेतृत्व किया। इसके बाद वे खुमैनी के उत्तराधिकारी के रूप में सर्वोच्च नेता बने।

जब उन्हें ईरान का सर्वोच्च नेता बनाया गया तो संविधान में संशोधन किया गया। लेकिन उनका रास्ता आसान नहीं था और 1997 में जब मोहम्मद खातमी राष्ट्रपति बने तो उन्होंने सुधारों की वकालत की और इससे खामेनेई के लिए हालात और कठिन हो गए। राजनीतिक वैज्ञानिक क्जेटिल सेलविक अपनी किताब Dictators and Autocrats: Securing Power across Global Politics (2021) में लिखते हैं, “खामेनेई को तब अपनी क्रांतिकारी सत्ता स्थापित करनी पड़ी जब क्रांति के नारे कमजोर पड़ रहे थे।” सत्ता संभालते ही खामेनेई ने सशस्त्र बलों का नेतृत्व भी खुद किया। खोमैनी की तरह वह भी अमेरिका और इजरायल के विरोधी रहे हैं।