देहरादून। उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर लंबे समय से चल रही ढिलाई पर अब सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए सभी मुतवल्लियों को एक माह की अंतिम मोहलत दी है। निर्देश है कि वे अपनी-अपनी वक्फ संपत्तियों का पूरा विवरण अनिवार्य रूप से ‘उम्मीद पोर्टल’ पर दर्ज करें, अन्यथा उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) गिरधारी सिंह रावत द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि यह केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का निर्णायक कदम है। जिन मुतवल्लियों ने अब तक जानकारी अपलोड नहीं की है, उनकी लापरवाही को गंभीर माना जाएगा।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में कुल 5362 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं। लेकिन इनमें से बड़ी संख्या का विवरण अभी तक ‘उम्मीद पोर्टल’ पर अपलोड नहीं किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 40 प्रतिशत संपत्तियां अब भी डिजिटल रिकॉर्ड से बाहर हैं, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है। यह स्थिति बताती है कि वर्षों से वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन पारंपरिक और कागजी व्यवस्था पर निर्भर रहा, जिससे गड़बड़ियों और अनियमितताओं की आशंका बनी रही।
वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। केंद्र स्तर पर उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि देशभर में लगभग 5.17 लाख वक्फ संपत्तियां ‘उम्मीद पोर्टल’ पर पंजीकृत की गई हैं, जबकि इनमें से करीब 2.16 लाख संपत्तियों को ही पूर्ण रूप से सत्यापित किया जा सका है। इससे स्पष्ट है कि यह एक व्यापक और जटिल प्रक्रिया है, जिसमें राज्यों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है।
वक्फ बोर्ड ने साफ कर दिया है कि अब किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एक माह के भीतर डेटा अपलोड करना अनिवार्य
समयसीमा के बाद संबंधित मुतवल्ली के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी
आवश्यक होने पर आर्थिक दंड (जुर्माना) भी लगाया जाएगा
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल चेतावनी नहीं, बल्कि लागू होने वाली कार्रवाई है। विवादित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें मुक्त कराने की योजना बनाई जा रही है। बोर्ड का मानना है कि जब तक जमीन पर कब्जे नहीं हटेंगे, तब तक डिजिटल रिकॉर्ड भी अधूरा रहेगा।‘उम्मीद पोर्टल’ से क्या बदलेगा?
‘उम्मीद पोर्टल’ केवल डेटा संग्रह का माध्यम नहीं, बल्कि वक्फ संपत्तियों के लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह सिस्टम बनाने की पहल है। इसके जरिए:
हर संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा
आय, उपयोग और स्थिति की निगरानी आसान होगी
अवैध कब्जों और गड़बड़ियों पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी
मुतवल्लियों की जिम्मेदारी तय होगीवक्फ संपत्तियां धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील मानी जाती हैं, लेकिन बोर्ड ने स्पष्ट संकेत दिया है कि नियमों के पालन में कोई रियायत नहीं दी जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर इसे सुधार और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों को लेकर अब निर्णायक दौर शुरू हो चुका है। 5362 संपत्तियों का पूरा और पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में ‘उम्मीद पोर्टल’ को केंद्र में रखकर सख्ती बढ़ा दी गई है। एक माह की मोहलत के बाद जो भी मुतवल्ली नियमों का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तय है। आने वाले समय में यह अभियान राज्य में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन की तस्वीर पूरी तरह बदल सकता है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने राज्यभर में 12,000 से अधिक वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण निरस्त कर दिए हैं। यह कार्रवाई पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान गलत जानकारी देने या आवश्यक दस्तावेज अपलोड न करने के कारण की गई है।
प्रदेश में कुल 1.26 लाख वक्फ संपत्तियां पंजीकृत की गई थीं, जिनमें से 12,135 पंजीकरण अमान्य पाए गए। सबसे अधिक मामले लखनऊ से सामने आए, जहां 1,114 पंजीकरण निरस्त किए गए।
अन्य जिलों की स्थिति इस प्रकार है:
बिजनौर – 1003 पंजीकरण खारिज
सहारनपुर – 990 पंजीकरण खारिज
बाराबंकी – 577 पंजीकरण खारिज
अमरोहा – 86 मामले
बागपत – 60 मामले
बरेली – 17 मामलेनिरस्तीकरण के मुख्य कारण
वक्फ बोर्ड के अनुसार, जिन संपत्तियों के पंजीकरण रद्द किए गए, उनमें मुख्य रूप से ये खामियां पाई गईं:
गलत या अधूरी जानकारी दर्ज करना
आवश्यक दस्तावेज अपलोड न करना
संपत्ति के स्वामित्व या उपयोग से संबंधित अस्पष्ट विवरणवक्फ संपत्तियों का पंजीकरण भारत सरकार के ‘उम्मीद’ पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है। यह प्रक्रिया डिजिटल पारदर्शिता और रिकॉर्ड की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई है।क्फ संपत्तियों के पंजीकरण की अंतिम तिथि 6 जून निर्धारित की गई है। अधिकारियों ने संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे समय रहते सही और पूर्ण जानकारी के साथ पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करें, अन्यथा उनके आवेदन निरस्त किए जा सकते हैं। यह कार्रवाई वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।











