देहरादून कैंट में 34.19% और राजपुर रोड में 32.64% की गिरावट; 36 विधानसभा क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की प्रतिशत गिरावट पुरुषों से अधिक
देहरादून। उत्तराखंड की मतदाता सूची में 2022 के विधानसभा चुनावों की तुलना में 11,07,695 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। यह कुल 13.40 प्रतिशत की गिरावट है। सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल और प्रवीण उप्रेती ने शनिवार को देहरादून प्रेस क्लब में “SIR और 2022 से 2027 के विधानसभा चुनावों के बीच उत्तराखंड का बदलता मतदाता परिदृश्य” रिपोर्ट जारी कर निर्वाचन आयोग से इस कमी का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की।

रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में राज्य में 82.66 लाख मतदाता थे, जबकि 3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या घटकर लगभग 71.59 लाख रह गई। जिलेवार आँकड़ों में देहरादून में करीब 3.03 लाख मतदाताओं की कमी सामने आई, जो 20.22 प्रतिशत है। विधानसभा क्षेत्रों में देहरादून कैंट में 34.19 प्रतिशत, राजपुर रोड में 32.64 प्रतिशत और धर्मपुर में 27.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट का एक प्रमुख निष्कर्ष राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है। वर्ष 2022 में यहाँ 1,19,615 मतदाता थे, जो अब घटकर 80,569 रह गए हैं। इसके मुकाबले बद्रीनाथ में 91,555 और केदारनाथ में 85,924 मतदाता दर्ज हैं। यानी राजपुर रोड में अब इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों से भी कम मतदाता हैं। रिपोर्ट में महिला मतदाताओं की संख्या में गिरावट पर भी चिंता जताई गई है। इसके अनुसार, राज्य के 70 में से 36 विधानसभा क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की प्रतिशत गिरावट पुरुषों से अधिक रही।

अनूप नौटियाल ने कहा कि मतदाता सूची में इतनी बड़ी कमी पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े गंभीर सवाल उठाती है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से नाम हटाए जाने के कारणों का विधानसभा क्षेत्रवार और मतदान केंद्रवार विवरण जारी करने तथा मृत्यु, पलायन, दोहरी प्रविष्टियों और अन्य कारणों के आँकड़े अलग-अलग सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। मतदाता सूची की सटीकता और पारदर्शिता चुनावों की विश्वसनीयता तथा लोकतंत्र में जनता के विश्वास के लिए अनिवार्य है। रिपोर्ट में देहरादून कैंट, राजपुर रोड और धर्मपुर में मतदाताओं की संख्या में आई असाधारण गिरावट की विस्तृत समीक्षा, महिला मतदाताओं के आँकड़ों का विश्लेषण और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण को पारदर्शी एवं सुलभ बनाने की मांग की गई है।
