CCTV से JCB तक; सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के सबूतों को बचाने को चतुर्वेदी की DM-SSP से मांग

Astitva Times Desk
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CCTV फुटेज, सरकारी फाइलें, पंचनामा, वीडियोग्राफी से लेकर JCB की लॉगबुक और फोर्स के ड्यूटी रोस्टर तक सुरक्षित कराने की मांग

सहारनपुर। सहारनपुर की कलेक्ट्रेट स्थित मस्जिद में हुई सीलिंग और ध्वस्तीकरण कार्रवाई के बाद अब कार्रवाई से जुड़े तमाम दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग उठी है। सामाजिक कार्यकर्ता नवनीत चतुर्वेदी ने जिलाधिकारी, SSP, सिटी मजिस्ट्रेट और कमिश्नर सहारनपुर मंडल को लिखित प्रतिनिधित्व भेजकर संबंधित रिकॉर्ड को तत्काल संरक्षित किए जाने का अनुरोध किया है।

चतुर्वेदी ने विशेष रूप से 4 सितंबर शाम 6 बजे से 5 सितंबर दोपहर 12 बजे तक कलेक्ट्रेट परिसर, सभी गेटों और प्रमुख स्थलों के प्रत्येक CCTV कैमरे की फुटेज सुरक्षित करने की मांग की है। इसके साथ CCTV सिस्टम लॉग, डिजिटल डेटा और फॉरेंसिक कॉपियां भी सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया है। सीलिंग और डिमोलिशन की अलग-अलग पत्रावली सुरक्षित हो प्रतिनिधित्व में 4 सितंबर की सीलिंग और 5 सितंबर के ध्वस्तीकरण से संबंधित पृथक आदेश, नोटिस, फाइलें, पत्राचार तथा कार्रवाई में प्रयुक्त कानूनी प्रावधानों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

 

 

चतुर्वेदी ने कहा है कि भविष्य में किसी न्यायिक मंच पर कार्रवाई से संबंधित सवाल उठने की स्थिति में प्रशासन के पास मूल रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए। पुलिस, PAC, RAF तथा अन्य विभागों द्वारा मौके पर की गई आधिकारिक वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और पंचनामे को भी सुरक्षित रखने की मांग की गई है। इसके अलावा मौके पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों का विवरण तथा उनकी ड्यूटी से संबंधित रिकॉर्ड भी संरक्षित किए जाने का अनुरोध किया गया है।

कितनी JCB लगीं, किसका था आदेश?
प्रतिनिधित्व में कार्रवाई के दौरान इस्तेमाल हुई मशीनरी का पूरा ब्यौरा सुरक्षित रखने की मांग की गई है। इसमें JCB एवं अन्य मशीनों की लॉगबुक, ठेकेदार के कार्यादेश तथा पुलिस/सुरक्षा बलों के ड्यूटी रोस्टर शामिल हैं। चतुर्वेदी ने 2 सितंबर से 4 सितंबर देर शाम तक विभिन्न सरकारी विभागों में ढांचा गिराए जाने से संबंधित हुई फाइलिंग और पत्राचार को भी सुरक्षित रखने की मांग की है।

“कल न कहा जाए—रिकॉर्ड गुम हो गया”
चतुर्वेदी ने अपने पत्र में कहा है कि उनका उद्देश्य किसी पक्ष की ओर से विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि संभावित न्यायिक प्रक्रिया के लिए रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना है। उनका कहना है कि यदि भविष्य में मस्जिद कमेटी या कोई अन्य संबंधित पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष याचिका लेकर उपस्थित होता है तो प्रशासन की ओर से यह नहीं कहा जाना चाहिए कि कोई महत्वपूर्ण CCTV फुटेज, फाइल, पंचनामा या अन्य रिकॉर्ड गुम हो गया, उपलब्ध नहीं है अथवा नष्ट हो गया। उन्होंने तकनीकी कारणों से CCTV डेटा ओवरराइट होने अथवा हार्डडिस्क खराब होने की आशंका को देखते हुए समय रहते डिजिटल डेटा की सुरक्षित प्रतियां तैयार कराने का अनुरोध किया है।

राष्ट्रपति और राज्यपाल को भी भेजे पत्र
नवनीत चतुर्वेदी के मुताबिक उन्होंने राष्ट्रपति और राज्यपाल को भी अलग-अलग पत्र भेजकर यही मांग दोहराई है। उन्होंने संबंधित घटना और ध्वस्तीकरण कार्रवाई से जुड़ी पत्रावलियां जिला प्रशासन से राज्य सरकार के माध्यम से तलब कराए जाने तथा तमाम रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाने की मांग की है। DM सहारनपुर को भेजे गए पत्र के साथ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल लेटर पिटीशन की प्रति तथा राष्ट्रपति और राज्यपाल को भेजे गए पत्रों की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।


“न मैं कमेटी का सदस्य, न मुकदमे में आवश्यक पक्षकार”
चतुर्वेदी ने अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह न तो मस्जिद कमेटी के सदस्य हैं और न संबंधित किसी मुकदमे में आवश्यक पक्षकार। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी मांग ध्वस्त किए गए ढांचे के पुनर्निर्माण की नहीं है।
उनकी मांग केवल यह है कि जो कार्रवाई हुई, उससे जुड़े सरकारी रिकॉर्ड और साक्ष्य सुरक्षित रहें। चतुर्वेदी के मुताबिक सड़क पर हंगामा या सोशल मीडिया पर बहस से न्यायिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती। सरकार और अदालतें कागज, फाइल और सबूत के आधार पर निर्णय लेती हैं। इसीलिए उनका जोर इस बात पर है कि सभी संबंधित रिकॉर्ड को अभी से सुरक्षित कर दिया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी न्यायिक कार्यवाही के दौरान साक्ष्यों की उपलब्धता पर सवाल न उठे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि जिला प्रशासन उनके प्रतिनिधित्व का संज्ञान ले अथवा उसका जवाब दे, इसके लिए वह प्रशासन को बाध्य करने का दावा नहीं करते। उनके अनुसार एक नागरिक के रूप में किसी संभावित न्यायिक प्रक्रिया के मद्देनजर रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की उचित मांग करना उनका संवैधानिक अधिकार है।

अब प्रशासन के अगले कदम पर नजर
अब निगाह इस बात पर है कि जिला प्रशासन इस प्रतिनिधित्व पर क्या कार्रवाई करता है और क्या संबंधित CCTV फुटेज, सरकारी पत्रावलियां, पंचनामे, वीडियोग्राफी, मशीनरी रिकॉर्ड और सुरक्षा बलों की तैनाती संबंधी दस्तावेज औपचारिक रूप से सुरक्षित किए जाते हैं।

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