देहरादून। सरकारी नौकरियों में फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रवेश पाने के मामलों पर अब सख्ती और तेज हो गई है। राजधानी देहरादून के डोईवाला क्षेत्र से सामने आए एक गंभीर प्रकरण में शिक्षा विभाग की शिकायत पर पुलिस ने सहायक महिला टीचर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद विभागीय तंत्र में हड़कंप मच गया है।

मामला डोईवाला ब्लॉक के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक विद्यालय जौलीग्रांट प्रथम का है, जहां सहायक अध्यापिका सीमा देवी कार्यरत थीं। आरोप है कि उन्होंने नियुक्ति के समय अनुसूचित जाति (SC) का फर्जी जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया और आरक्षित वर्ग का लाभ लेते हुए सरकारी नौकरी हासिल कर ली। यह मामला तब सामने आया जब उनके दस्तावेजों की जांच के दौरान प्रमाणपत्र की सत्यता पर संदेह हुआ।
बताया जा रहा है कि उपशिक्षा अधिकारी, डोईवाला ने मामले की प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस को औपचारिक शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित शिक्षिका के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना (फर्जी दस्तावेज तैयार करना) और सरकारी नौकरी में गलत तरीके से प्रवेश पाने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है।

सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस प्रकरण में कोई संगठित गिरोह या अन्य लोग तो शामिल नहीं हैं, जो फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर सरकारी नौकरियों में प्रवेश दिलाने का काम करते हैं। यदि ऐसा पाया जाता है, तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षिका की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाएगी और अब तक प्राप्त वेतन व अन्य लाभों की वसूली की भी कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, भविष्य में सरकारी सेवा के लिए अयोग्य घोषित किए जाने की संभावना भी है।

पुलिस के अनुसार प्रमाणपत्र की सत्यता की पुष्टि के लिए संबंधित तहसील और अभिलेख विभाग से रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। इसके अलावा, नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत किए गए अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों और ब्लॉकों को निर्देश जारी कर कर्मचारियों के शैक्षणिक और जाति प्रमाणपत्रों का पुनः सत्यापन करने के संकेत दिए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से न केवल व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, बल्कि वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के अधिकारों का भी हनन होता है। ऐसे में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई आवश्यक है। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।









