नई दिल्ली। देशभर में एक बार फिर महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद जनता पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, मध्य-पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी का असर अब सीधे भारतीय बाजार में दिखाई देने लगा है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार कई शहरों में पेट्रोल और डीजल के दामों में 3.3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि CNG की कीमतों में करीब 2 रुपये प्रति किलो का इजाफा किया गया है। इस बढ़ोतरी ने वाहन चालकों से लेकर मध्यम वर्गीय परिवारों तक की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
आम आदमी पर दोहरी मार
ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहता। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा प्रभाव फल-सब्जियों, राशन, दूध, निर्माण सामग्री और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार में महंगाई और तेज हो सकती है।
लंबी दूरी के ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई का खर्च तेजी से बढ़ेगा, जिसका बोझ आखिरकार उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ेगा। वहीं CNG महंगी होने से ऑटो, टैक्सी और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के किराए में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह है। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से भारत को तेल आयात करने में अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत और वैश्विक दबाव के कारण कीमतों में संशोधन करना आवश्यक हो गया था। हालांकि विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा है कि आम जनता पहले से ही महंगाई से परेशान है और ईंधन मूल्य वृद्धि ने स्थिति को और कठिन बना दिया है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल- डीजल और CNG की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।












